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बारिश न होने से किसान चिंतित
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2015 11:28 PM IST
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खरीफ में धान की खेती केवल बारिश पर ही निर्भर करती है। सिंचाई के साधन होने केे बावजूद जब तक बारिश की बूंदें फसलों पर नहीं पड़ती हैं, तब तक उनका उत्पादन अच्छा नहीं होता है। यह प्राकृतिक स्थिति है।
इस बार बारिश के मौसम में आसमान से आग बरस रही है। जिले में सूखे जैसे हालात बन जाने से बारिश न होने को लेकर किसानों में हाहाकार मचा है। खरीफ में फसलों के लिए जो वर्षा विज्ञान की गणनाएं हैं, उसमें मघा नक्षत्र का विशेष महत्व है।
कहावत है कि मघा न बरसा भरै न खेत, माता न परसे भरै न पेट। घाघ की ये कहावत सटीक है। कहा जाता है कि मघा नक्षत्र यदि बरस जाए तो धान की पैदावार दोगुनी होती है। लेकिन इस बार मघा नक्षत्र दगा दे गया। 16 से 29 अगस्त के मध्य मघा नक्षत्र बीत गया, लेकिन बारिश नहीं हुई।
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जिले में करीब एक लाख 1.39 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई होती है। खरीफ में खास कर गोंडा में धान, अरहर, मक्का, उरद व अन्य फसलें लगाई जाती हैं। लेकिन अगस्त व सितंबर में पानी न गिरने से धान को नुकसान हुआ है। अगस्त व सितंबर में धान में बालियां पौधों के पेट में आ जाती हैं।
ऐसे में बरसात होते ही ये फूट कर पूरी तरह बाहर आ जाती हैं। 15 दिनों से तेज धूप व गरमी होने से धान के खेतों की मिट्टी सूख गई है। नमी गायब है।
मौजूदा समय पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र चल रहा है। इसमें भी करीब आधा से अधिक समय निकल गया है। बरसात न होने तथा लगातार तेज धूप निकलने से खेतों की नमी गायब हो गई है।
किसानों ने इस बार देर से बारिश शुरू होने से पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान की रोपाई करवाई थी। घर की गाढ़ी कमाई लगा कर खरीफ की फसलों की बोआई करने वाले किसानों को आज फसलों को पानी की कमी से सूखता देख उनका कलेजा मुंह को आ रहा है।
सोमवार को अमर उजाला ने किसानों से मिल कर उनका दर्द जाना। उनका कहना है कि बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इससे लगता है कि उनकी पूंजी इस बार डूब जाएगी। रुपईडीह ब्लॉक के खैरा गांव निवासी किसान जय प्रकाश सिंह ने बताया कि दस बीघा धान लगाया था।
पानी न गिरने से धान के पौधे कुम्हलाकर सूखने लगे हैं। ग्राम शुक्लपुरवा निवासी जमुना प्रसाद शुक्ला का कहना है कि महंगा डीजल खरीद कर दो बार धान में पम्पिंगसेट से पानी लगा चुका हूं। अब फिर खेत की नमी सूख गई है। अब सिंचाई कर पाने की स्थिति में नही हूं।
बनकटी गांव के पुत्ती सिंह का कहना है कि बारिश न होने से पम्पिंग सेट से पानी भरवा कर धान की रोपाई की थी। पानी न मिला तो धान की बालियां नही निकलेंगी।
ग्राम शुक्लपुरवा निवासी किसान राम प्रताप पाण्डेय ने बताया कि धान की रोपाई के समय अपने एक साथी से कर्ज लिया था। लेकिन इस समय बारिश न होने से फसलें सूख रही हैं। ऐसे ही रहा तो फसलें चौपट हो जाएंगी। कर्ज भी चुकता नही कर पाऊंगा।
मौजूदा समय धान की फसल को पानी की अधिक जरूरत है, इसलिए किसानों को चाहिए कि धान के खेत में पंपिंग सेट से पानी भर दें और यूरिया की हल्की टापड्रेसिंग कर दें। इस समय धान की फसल में बालियां निकलने का समय चल रहा है, ऐसे में धान के खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। -विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी गोंडा
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इस बार बारिश के मौसम में आसमान से आग बरस रही है। जिले में सूखे जैसे हालात बन जाने से बारिश न होने को लेकर किसानों में हाहाकार मचा है। खरीफ में फसलों के लिए जो वर्षा विज्ञान की गणनाएं हैं, उसमें मघा नक्षत्र का विशेष महत्व है।
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कहावत है कि मघा न बरसा भरै न खेत, माता न परसे भरै न पेट। घाघ की ये कहावत सटीक है। कहा जाता है कि मघा नक्षत्र यदि बरस जाए तो धान की पैदावार दोगुनी होती है। लेकिन इस बार मघा नक्षत्र दगा दे गया। 16 से 29 अगस्त के मध्य मघा नक्षत्र बीत गया, लेकिन बारिश नहीं हुई।
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जिले में करीब एक लाख 1.39 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई होती है। खरीफ में खास कर गोंडा में धान, अरहर, मक्का, उरद व अन्य फसलें लगाई जाती हैं। लेकिन अगस्त व सितंबर में पानी न गिरने से धान को नुकसान हुआ है। अगस्त व सितंबर में धान में बालियां पौधों के पेट में आ जाती हैं।
ऐसे में बरसात होते ही ये फूट कर पूरी तरह बाहर आ जाती हैं। 15 दिनों से तेज धूप व गरमी होने से धान के खेतों की मिट्टी सूख गई है। नमी गायब है।
मौजूदा समय पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र चल रहा है। इसमें भी करीब आधा से अधिक समय निकल गया है। बरसात न होने तथा लगातार तेज धूप निकलने से खेतों की नमी गायब हो गई है।
किसानों ने इस बार देर से बारिश शुरू होने से पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान की रोपाई करवाई थी। घर की गाढ़ी कमाई लगा कर खरीफ की फसलों की बोआई करने वाले किसानों को आज फसलों को पानी की कमी से सूखता देख उनका कलेजा मुंह को आ रहा है।
सोमवार को अमर उजाला ने किसानों से मिल कर उनका दर्द जाना। उनका कहना है कि बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इससे लगता है कि उनकी पूंजी इस बार डूब जाएगी। रुपईडीह ब्लॉक के खैरा गांव निवासी किसान जय प्रकाश सिंह ने बताया कि दस बीघा धान लगाया था।
पानी न गिरने से धान के पौधे कुम्हलाकर सूखने लगे हैं। ग्राम शुक्लपुरवा निवासी जमुना प्रसाद शुक्ला का कहना है कि महंगा डीजल खरीद कर दो बार धान में पम्पिंगसेट से पानी लगा चुका हूं। अब फिर खेत की नमी सूख गई है। अब सिंचाई कर पाने की स्थिति में नही हूं।
बनकटी गांव के पुत्ती सिंह का कहना है कि बारिश न होने से पम्पिंग सेट से पानी भरवा कर धान की रोपाई की थी। पानी न मिला तो धान की बालियां नही निकलेंगी।
ग्राम शुक्लपुरवा निवासी किसान राम प्रताप पाण्डेय ने बताया कि धान की रोपाई के समय अपने एक साथी से कर्ज लिया था। लेकिन इस समय बारिश न होने से फसलें सूख रही हैं। ऐसे ही रहा तो फसलें चौपट हो जाएंगी। कर्ज भी चुकता नही कर पाऊंगा।
मौजूदा समय धान की फसल को पानी की अधिक जरूरत है, इसलिए किसानों को चाहिए कि धान के खेत में पंपिंग सेट से पानी भर दें और यूरिया की हल्की टापड्रेसिंग कर दें। इस समय धान की फसल में बालियां निकलने का समय चल रहा है, ऐसे में धान के खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। -विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी गोंडा