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Gonda News: मंडी सचिव से स्पष्टीकरण तलब
Thu, 08 Jan 2026 11:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:31 PM IST
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करनैलगंज। कृषि उत्पादों के अवैध व्यापार और मंडी शुल्क की चोरी को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। मंडी सभापति एवं उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने मंडी समिति के सचल दल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए गल्ला एवं फल-सब्जी मंडी के सचिव से स्पष्टीकरण तलब किया है।
एसडीएम ने कर की वसूली न होने और कर चोरी के मामलों में कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रदेश सरकार की मंडी नियमावली-1996 के कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मंडी शुल्क की चोरी की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसके बावजूद 10 सितंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद से अब तक सचल दल द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
एसडीएम का मानना है कि कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत न किया जाना इस ओर इशारा करता है कि या तो सचल दल पूरी तरह निष्क्रिय है अथवा मंडी कर्मचारियों की व्यापारियों से मिलीभगत है। इस लापरवाही के चलते मंडी समिति को राजस्व की हानि हो रही है।
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एसडीएम ने स्पष्ट किया कि नए नियमों के तहत मंडी शुल्क की चोरी करने वालों पर देय शुल्क का दस गुना तक या अधिकतम दस लाख रुपये तक शमन शुल्क लगाने का प्रावधान है। उन्होंने अवैध व्यापार पर तत्काल प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
मंडी सचिव को जारी नोटिस में कहा गया कि वे तत्काल यह स्पष्ट करें कि तहसील क्षेत्र पर सचल दल का संचालन क्यों नहीं किया जा रहा है। यदि सचल दल सक्रिय है तो उसमें तैनात अधिकारियों के नाम, अब तक की गई कार्रवाई और उसका पूरा विवरण तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
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एसडीएम ने कर की वसूली न होने और कर चोरी के मामलों में कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रदेश सरकार की मंडी नियमावली-1996 के कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मंडी शुल्क की चोरी की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसके बावजूद 10 सितंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद से अब तक सचल दल द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
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एसडीएम का मानना है कि कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत न किया जाना इस ओर इशारा करता है कि या तो सचल दल पूरी तरह निष्क्रिय है अथवा मंडी कर्मचारियों की व्यापारियों से मिलीभगत है। इस लापरवाही के चलते मंडी समिति को राजस्व की हानि हो रही है।
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एसडीएम ने स्पष्ट किया कि नए नियमों के तहत मंडी शुल्क की चोरी करने वालों पर देय शुल्क का दस गुना तक या अधिकतम दस लाख रुपये तक शमन शुल्क लगाने का प्रावधान है। उन्होंने अवैध व्यापार पर तत्काल प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
मंडी सचिव को जारी नोटिस में कहा गया कि वे तत्काल यह स्पष्ट करें कि तहसील क्षेत्र पर सचल दल का संचालन क्यों नहीं किया जा रहा है। यदि सचल दल सक्रिय है तो उसमें तैनात अधिकारियों के नाम, अब तक की गई कार्रवाई और उसका पूरा विवरण तत्काल उपलब्ध कराया जाए।