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Gonda News: भाग्यवती से हुई ज्यादती से हर कोई हतप्रभ

Thu, 31 Jul 2025 11:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Thu, 31 Jul 2025 11:39 PM IST
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Everyone is shocked by the atrocities done to Bhagyavati
गोंडा। एक दिन वह भी था, जब बहू जया के घर में आने पर सास भाग्यवती की खुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने मोहल्ले में लोगों को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया था। आज जब बुढ़ापे में भाग्यवती को कैंसर की बीमारी ने जकड़ लिया, जब इलाज व सहारे की दरकार थी तो बहू ने उन्हें अयोध्या में लावारिस हालत में छोड़ दिया। भाग्यवती अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जैसे ही यह पता चला कि वह गोंडा के नगर कोतवाली क्षेत्र के छेदीपुरवा की मूल निवासी हैं, हर कोई हतप्रभ रह गया।
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अयाेध्या के कोतवाल मनोज शर्मा ने बताया कि जांच में पता चला कि भाग्यवती कैंसर से पीड़ित थीं। इलाज न कराना पड़े, इसलिए बहू ने दो साथियों की मदद से उन्हें अयोध्या के दर्शनगर में किशुनदासपुर में छोड़ दिया था। छानबीन में पता चला कि भाग्यवती गोंडा के बड़गांव छेदीपुरवा की मूल निवासी हैं। भाग्यवती के पति बृजपाल सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। वह इकलौते बेटे राजू व बहू जया के साथ लखनऊ के इंदिरानगर में रहती थीं। बेटा कभी-कभी गोंडा आता था। ऐसे में जब भाग्यवती बीमार हुईं तो बहू जया ने इलाज कराने के बजाय साजिश रची। उसने अपने पति को बताया कि मां भाग्यवती कहीं चली गई हैं।
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बृहस्पतिवार को मामले की जानकारी होने के बाद हर कोई बस यही चर्चा करता दिखा कि समाज को क्या हो गया है। कवियत्री नीता सिंह ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला मामला है। समाज के गिरते स्तर का यह एक नमूना है। शिक्षिका सरिता पांडेय का कहना है कि जब से इस मामले की जानकारी हुई, मन में कई सवाल आ रहे हैं। शिक्षिका एकता पांडेय का कहना है कि जिस वक्त भाग्यवती को अपनों की जरूरत थी, उस वक्त साथ छोड़ देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
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शून्य हो गई हैं पारिवारिक संवेदना
मालवीय नगर निवासी सेवानिवृत्त कर्मचारी केबी सिंह का कहना है कि पारिवारिक संवेदनाएं शून्य हो गई हैं। संयुक्त परिवार का विघटन हो गया है। एकल परिवार का चलन है। संस्कार विहीन बच्चे स्वार्थी हो रहे हैं। तमाम बुजुर्गों को इसी पीड़ा को झेलना पड़ रहा है।
एलबीएस पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि समाज का पतन हो रहा है। मां-बाप धरती के ईश्वर हैं। उनके साथ इस तरह का व्यवहार चौंकाने वाला है। यह बात दिल को झकझोर देती है। इसको लेकर सभी को मंथन करना होगा।

नारी ज्ञानस्थली महाविद्यालय की समाजशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम छाबड़ा का कहना है कि समाज में नैतिक मूल्यों का हृास हो रहा है। यह चिंतनीय है। सभी को मिलकर इसके बारे में चिंतन करने की आवश्यकता है।
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