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कटने से बचा एल्गिन-चरसड़ी बांध
अमर उजाला/गोंडा
Updated Fri, 22 Jul 2016 11:24 PM IST
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कटान करती घाघरा
- फोटो : अमर उजाला
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एल्गिन-चरसड़ी बांध पर शुक्रवार को रायपुर गांव के समीप जो कुछ हुआ, वह हर किसी के लिए चौंकाना वाला रहा। घाघरा नदी की तेज लहरों से उठे एक मशीने ने देखते ही देखते बांध बचाव के लिए सिंचाई विभाग के बनाए गए उस कटवन के 12 मीटर हिस्से को काट दिया, जो कि बांध की मजबूती के लिए बनाया गया था।
कटवन के कटते ही बांध पर मौजूद अधिकारियों के हांथ-पांव फूल गए और सभी लोग बांध पर रखे सामानों को हटाने में जुट गए। हालांकि नदी कुछ और तबाही मचाती, इससे पहले उसका पानी स्थिर हो गया, जिससे एल्गिन-चरसड़ी बांध कटते-कटते बच गया। नदी के पानी में आई स्थिरता के बाद बंधे पर कैंप करने पहुंचे अधिकारियों ने कटे हुए कटवन के साथ ही बांध की मजबूती का काम तेजी से शुरू करा दिया है। लेकिन नदी की धारा जिस तरह से कटान कर रही है। उससे आने वाले दिनों बांध के लिए एक बड़े खतरे की आशंका जताई जा रही है।
शुक्रवार को जैसे-जैसे घाघरा नदी का जलस्तर घट रहा था, वैसे-वैसे नदी से होने वाली कटान भी तेज होती जा रही थी। रायपुर गांव के नजदीक सुबह नौ बजे नदी में अचानक एक मशीना उठा और देखते ही देखते बांध की सुरक्षा के लिए बनाया गया कट वन 12 मीटर नदी में समा गया। जबकि कटवन की मजबूती के लिए उसके इर्द-गिर्द रखी गईं बालू की बोरियां भी नदी की धारा में समा गईं।
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यह देखते ही बांध पर कैंप करने वाले अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और सभी लोग बांध को बचाने के बजाय बांध पर रखे उन सामानों को हटाने में जुट गए, जो बांध कटने पर नदी की आगोश में समा सकते थे। वहीं मजदूरों ने भी काम करना बंद कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद नदी का पानी स्थिर हो गया। जिस पर सिंचाई विभाग के लोगों ने राहत की सांस लेते हुए कटवन और बांध की मजबूती का काम फिर से शुरू करा दिया है। क्योंकि 12 मीटर दूरी में कटवन के कटने के बाद नदी की धारा अब सीधे-सीधे बांध से टकरा रही है, जो जिससे बांध पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
जानकारों की मानें तो अगर नदी में दोबारा से मशीना उठा तो बांध को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जिसके बाद बाढ़ से तहसील करनैलगंज में फैलने वाली तबाही को कोई नहीं रोक सकता। सिंचाई विभाग के एई अशोक कुमार का कहना है कि नदी के पानी का दबाव बंधे पर बन रहा है, इसलिए उसकी मजबूती के साथ ही कटवन को दोबारा से मजबूत करने का काम शुरू करा दिया गया है। वहीं, एसडीएम अनिल कुमार मिश्र ने दोबारा से मशीना उठने पर बांध के लिए पैदा होने वाली दिक्कत से इन्कार नहीं किया है।
गुरुवार की आधी रात देखते ही देखते नवाबगंज के गंगूपुरवा गांव में नान्हू का घर सरयू नदी में समा गया। गनीमत रही कि घर में लगी कटान के खतरे को नान्हू का परिवार पहले से भांप गया था और उसने वह जगह खाली कर दी थी, नहीं तो कटान से उसका पूरा परिवार नदी में डूब सकता था।
कुछ ऐसा ही हाल नवाबगंज के उन तमाम गांवों का है, जो नदी के मुहाने पर बसे हैं और कभी भी कट सकते हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर से ऐसे लोगों को किसी सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही। वहीं नवाबगंज में ही साखीपुर, जैतपुर मांझा, दुर्गागंज माझा जैसे कई गांवों पर भी सरयू की तबाही का खतरा मंडरा रहा है, जो किसी भी वक्त यहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है।
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कटवन के कटते ही बांध पर मौजूद अधिकारियों के हांथ-पांव फूल गए और सभी लोग बांध पर रखे सामानों को हटाने में जुट गए। हालांकि नदी कुछ और तबाही मचाती, इससे पहले उसका पानी स्थिर हो गया, जिससे एल्गिन-चरसड़ी बांध कटते-कटते बच गया। नदी के पानी में आई स्थिरता के बाद बंधे पर कैंप करने पहुंचे अधिकारियों ने कटे हुए कटवन के साथ ही बांध की मजबूती का काम तेजी से शुरू करा दिया है। लेकिन नदी की धारा जिस तरह से कटान कर रही है। उससे आने वाले दिनों बांध के लिए एक बड़े खतरे की आशंका जताई जा रही है।
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शुक्रवार को जैसे-जैसे घाघरा नदी का जलस्तर घट रहा था, वैसे-वैसे नदी से होने वाली कटान भी तेज होती जा रही थी। रायपुर गांव के नजदीक सुबह नौ बजे नदी में अचानक एक मशीना उठा और देखते ही देखते बांध की सुरक्षा के लिए बनाया गया कट वन 12 मीटर नदी में समा गया। जबकि कटवन की मजबूती के लिए उसके इर्द-गिर्द रखी गईं बालू की बोरियां भी नदी की धारा में समा गईं।
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यह देखते ही बांध पर कैंप करने वाले अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और सभी लोग बांध को बचाने के बजाय बांध पर रखे उन सामानों को हटाने में जुट गए, जो बांध कटने पर नदी की आगोश में समा सकते थे। वहीं मजदूरों ने भी काम करना बंद कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद नदी का पानी स्थिर हो गया। जिस पर सिंचाई विभाग के लोगों ने राहत की सांस लेते हुए कटवन और बांध की मजबूती का काम फिर से शुरू करा दिया है। क्योंकि 12 मीटर दूरी में कटवन के कटने के बाद नदी की धारा अब सीधे-सीधे बांध से टकरा रही है, जो जिससे बांध पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
जानकारों की मानें तो अगर नदी में दोबारा से मशीना उठा तो बांध को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जिसके बाद बाढ़ से तहसील करनैलगंज में फैलने वाली तबाही को कोई नहीं रोक सकता। सिंचाई विभाग के एई अशोक कुमार का कहना है कि नदी के पानी का दबाव बंधे पर बन रहा है, इसलिए उसकी मजबूती के साथ ही कटवन को दोबारा से मजबूत करने का काम शुरू करा दिया गया है। वहीं, एसडीएम अनिल कुमार मिश्र ने दोबारा से मशीना उठने पर बांध के लिए पैदा होने वाली दिक्कत से इन्कार नहीं किया है।
गुरुवार की आधी रात देखते ही देखते नवाबगंज के गंगूपुरवा गांव में नान्हू का घर सरयू नदी में समा गया। गनीमत रही कि घर में लगी कटान के खतरे को नान्हू का परिवार पहले से भांप गया था और उसने वह जगह खाली कर दी थी, नहीं तो कटान से उसका पूरा परिवार नदी में डूब सकता था।
कुछ ऐसा ही हाल नवाबगंज के उन तमाम गांवों का है, जो नदी के मुहाने पर बसे हैं और कभी भी कट सकते हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर से ऐसे लोगों को किसी सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही। वहीं नवाबगंज में ही साखीपुर, जैतपुर मांझा, दुर्गागंज माझा जैसे कई गांवों पर भी सरयू की तबाही का खतरा मंडरा रहा है, जो किसी भी वक्त यहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है।