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बिजली आई नहीं, बिल आया 1.84 लाख

Sat, 21 May 2022 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 11:09 PM IST
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Electricity did not come, bill came 1.84 lakh
गोंडा। ‘खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना’ ये कहावत जिले के एक विद्युत उपभोक्ता पर पूरी तरह फिट बैठती है, जिन्होंने बिजली के भरोसे नलकूप से तालाब भरकर मछली पालन करके कमाई का सपना देखा था। मगर बिजली कनेक्शन जुड़े बिना ही पावर कॉरपोरेशन ने उन्हें 1.84 लाख रुपये का बिल भेज दिया।
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सात साल से परेशान उपभोक्ता को साढ़े चार साल पहले उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम ने राहत दी और संपूर्ण बिजली बिल माफ करके कनेक्शन को स्थाई रूप से विच्छेदित करने के आदेश दिए, मगर पावर कॉरपोरेशन ने इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। पावर कॉरपोरेशन की ओर से जारी 1.84 लाख रुपये के रिकवरी नोटिस से चिंतित होकर बीमार हुए उपभोक्ता की मौत के बाद अब उनके बेटे अब्दुल कुद्दूस ने फोरम में न्याय की गुहार लगाई है।
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मामला खरगूपुर क्षेत्र के गांव लोनावा दरगाह के मजरे सिसई जंगल का है। यहां के फसीउद्दीन (अब मृतक) ने साल 2015 में मछली पालन करने के लिए गांव की सरकारी भूमि के तालाब को पट्टे पर लिया था। तालाब में पानी की व्यवस्था के लिए उन्होंने नलकूप चलाने के लिए ग्रामीण विद्युत वाणिज्यिक कनेक्शन भी लिया, लेकिन गांव के ही कुछ लोगों से विवाद व दबाव में पावर कॉरपोरेशन ने कनेक्शन नहीं जोड़ा। मगर फसीउद्दीन ने समझा कि कनेक्शन निरस्त हो गया, लेकिन जब जनवरी 2017 में उन्हें 57 हजार का बिजली बिल मिला तो पैरों तले जमीन खिसक गई।
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पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों के यहां सुनवाई न होने पर फसीउद्दीन ने विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम में परिवाद दाखिल कर बिना किसी उपभोग के जारी बिल माफ करने और विद्युत कनेक्शन निरस्त करने की मांग की। फोरम ने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम को कारण बताओ नोटिस जारी किया तो उन्होंने जवाब में स्वीकार किया कि परिसर पर विद्युत का संयोजन नहीं पाया गया।
इस पर फोरम के तत्कालीन अध्यक्ष समयनाथ श्रीवास्तव, सचिव नंदलाल व तकनीकी सदस्य मुरारीलाल अग्रवाल ने 10 अक्तूबर 2017 को निर्णय सुनाते हुए फसीउद्दीन का बिल माफ करने व विद्युत कनेक्शन निरस्त करने का आदेश दिया। फोरम ने अनुपालन आख्या एक सप्ताह में न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, लेकिन विभागीय अफसरों ने इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया और 28 दिसंबर 2018 को विभागीय डिमांड नोटिस देकर 27 जनवरी 2019 तक बकाया बिल एक लाख 84 हजार रुपये जमा करने को कहा।
इस पर फसीउद्दीन ने अधिशासी अभियंता प्रथम को प्रार्थनापत्र देकर फोरम के आदेश का अनुपालन कराने की मांग की, मगर बिलिंग नहीं रुकी। इससे चिंतित फसीउद्दीन बीमार पड़े गये और उनकी मौत हो गई। अब उनके बेटे अब्दुल कुद्दूस ने फोरम में न्याय की गुहार लगाई है।

विद्युत वितरण खंड करनैलगंज के अधिशासी अभियंता प्रसून त्यागी ने बताया कि अभी प्रकरण के बारे में कोई जानकारी नही मिली है। कोई निर्देश मिलने पर पूरे मामले का नियमानुसार निस्तारण कराएंगे।
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