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Gonda News: पटाखे जलाते समय न करें लापरवाही
Sat, 07 Nov 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 07 Nov 2026 11:19 PM IST
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गोंडा। दीपावली पर आतिशबाजी की खुशी में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। पटाखों से जलने, आंखों में चोट लगने और आग की घटनाओं का खतरा रहता है। विशेषज्ञों ने सुरक्षित तरीके से आतिशबाजी करने और हादसों से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। पटाखे खुले स्थान पर जलाएं और बच्चों को अकेले आतिशबाजी न करने दें। पेश है एक रिपोर्ट :
सुरक्षित दूरी से जलाएं पटाखे
नीमा के अध्यक्ष डॉ. महमूद आलम ने बताया कि पटाखे हमेशा खुले मैदान में जलाएं। घरों, दुकानों, वाहनों और बिजली के तारों के आसपास आतिशबाजी न करें। पटाखे जलाने के लिए लंबी अगरबत्ती या मोमबत्ती का इस्तेमाल करें। एक बार में एक ही पटाखा जलाएं। पटाखा न जलने पर उसके पास तुरंत न जाएं और दोबारा जलाने की कोशिश न करें। पास में पानी से भरी बाल्टी और रेत जरूर रखें।
जलने पर ठंडे पानी से करें प्राथमिक उपचार
मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से पर तुरंत करीब 20 मिनट तक सामान्य ठंडा बहता पानी डालें। बर्फ, टूथपेस्ट, घी, तेल या हल्दी न लगाएं। छाले न फोड़ें और त्वचा से चिपके कपड़े जबरन न खींचें। चेहरे, आंखों, हाथों या शरीर के बड़े अथवा गहरे हिस्से में जलने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें। सांस लेने में परेशानी होने पर भी देर न करें।
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आंख में चोट लगे तो न रगड़ें
मेडिकल कॉलेज के नेत्र परीक्षण अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि पटाखे की चिंगारी या धूल आंख में जाने पर उसे रगड़ने से बचें। कोई कण फंस जाए तो खुद निकालने की कोशिश न करें। आंख में चोट, तेज दर्द, लालिमा या धुंधला दिखाई देने पर तुरंत नेत्र चिकित्सक को दिखाएं। आंख पर दबाव डालने और घरेलू उपचार करने से बचें।
बच्चों के साथ रहें अभिभावक
महिला अस्पताल की डॉ. माधुरी त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों को फुलझड़ी और अनार जैसे पटाखे भी बड़ों की निगरानी में ही जलाने दें। ढीले और सिंथेटिक कपड़ों की जगह सूती कपड़े पहनाएं। पटाखे जलाते समय चेहरा पास न ले जाएं। जेब में पटाखे रखकर न घूमें और हाथ में पकड़कर पटाखे न जलाएं। आतिशबाजी के दौरान जूते पहनना भी जरूरी है।
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सुरक्षित दूरी से जलाएं पटाखे
नीमा के अध्यक्ष डॉ. महमूद आलम ने बताया कि पटाखे हमेशा खुले मैदान में जलाएं। घरों, दुकानों, वाहनों और बिजली के तारों के आसपास आतिशबाजी न करें। पटाखे जलाने के लिए लंबी अगरबत्ती या मोमबत्ती का इस्तेमाल करें। एक बार में एक ही पटाखा जलाएं। पटाखा न जलने पर उसके पास तुरंत न जाएं और दोबारा जलाने की कोशिश न करें। पास में पानी से भरी बाल्टी और रेत जरूर रखें।
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जलने पर ठंडे पानी से करें प्राथमिक उपचार
मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से पर तुरंत करीब 20 मिनट तक सामान्य ठंडा बहता पानी डालें। बर्फ, टूथपेस्ट, घी, तेल या हल्दी न लगाएं। छाले न फोड़ें और त्वचा से चिपके कपड़े जबरन न खींचें। चेहरे, आंखों, हाथों या शरीर के बड़े अथवा गहरे हिस्से में जलने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें। सांस लेने में परेशानी होने पर भी देर न करें।
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आंख में चोट लगे तो न रगड़ें
मेडिकल कॉलेज के नेत्र परीक्षण अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि पटाखे की चिंगारी या धूल आंख में जाने पर उसे रगड़ने से बचें। कोई कण फंस जाए तो खुद निकालने की कोशिश न करें। आंख में चोट, तेज दर्द, लालिमा या धुंधला दिखाई देने पर तुरंत नेत्र चिकित्सक को दिखाएं। आंख पर दबाव डालने और घरेलू उपचार करने से बचें।
बच्चों के साथ रहें अभिभावक
महिला अस्पताल की डॉ. माधुरी त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों को फुलझड़ी और अनार जैसे पटाखे भी बड़ों की निगरानी में ही जलाने दें। ढीले और सिंथेटिक कपड़ों की जगह सूती कपड़े पहनाएं। पटाखे जलाते समय चेहरा पास न ले जाएं। जेब में पटाखे रखकर न घूमें और हाथ में पकड़कर पटाखे न जलाएं। आतिशबाजी के दौरान जूते पहनना भी जरूरी है।