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फीकी रहेगी संविदा कर्मचारियों की दीपावली
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:57 PM IST
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दीपावली के पर्व पर सभी कर्मचारियों को वेतन देने के शासन के निर्देश के बावजूद कई विभागों के कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला है। जिले में संविदा पर कार्यरत रोजगार सेवक, साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत कार्यरत प्रेरकों व स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों समेत करीब तीन हजार संविदा कर्मचारी मानदेय से वंचित रह गए। मानदेय के अभाव में इन कर्मचारियों के घरों में दीपावली का पर्व फीका रह गया है।
प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन देने का निर्देश जारी किया था। शासन के निर्देश पर स्थाई कर्मचारियों को तो मानदेय मिल गया, लेकिन संविदा पर काम करने वाले कई विभागों के कर्मचारी मानदेय पाने से वंचित रह गए। इन कर्मचारियों ने मानदेय की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन शासन-प्रशासन ने इनकी मांग को अनसुना कर दिया। मानदेय न मिलने से इन कर्मचारियोें के घरों में दीपावली का त्योहार फीका रहेगा।
साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत प्रौढों को साक्षर बनाने के लिए लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना की गई थी। इन केंद्रों पर करीब दो हजार प्रेरकों की तैनाती की गई थी। यह अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम भी दे रहे हैं, लेकिन पिछले 11 माह से इन्हें मानदेय नहीं मिला है।
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मानदेय की मांग को लेकर इन प्रेरकों ने धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन शासन-प्रशासन ने इनकी मांग को अनसुना कर दिया और दीपावली का त्योहार होने के बावजूद इन्हें मानदेय नही दिया गया। साक्षरताकर्मी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह का कहना है कि प्रेरकाें के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है। मानदेय न मिलने से इनकी दीपावली फीकी रहेगी।
कुछ ऐसा ही हाल पंचायती राज विभाग में संविदा पर कार्यरत रोजगार सेवकों का है। इन्हें भी पिछले 13 माह से मानदेय नहीं दिया गया है। गांवों के विकास की योजनाओं को क्रियान्वयन में इनकी भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद जिले के 998 रोजगार सेवक 13 माह से मानदेय के लिए भटक रहे हैं। मानदेय बगैर ग्राम रोजगार सेवकों की दीपावली फीकी रहेगी ।
स्वास्थ्य विभाग में संविदा के आधार पर विभिन्न पदों पर कार्यरत कई कर्मचारियों को भी दीपावली से पहले मानदेय नहीं मिल सका है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एपसीटीएस ऑपरेटरों को कई माह से मानदेय नहीं मिला है। इन कर्मचारियों का कहना है कि मानदेय की मांग को लेकर कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी से गुहार लगाई गई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मानदेय नहीं दिया गया।
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प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले सभी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन देने का निर्देश जारी किया था। शासन के निर्देश पर स्थाई कर्मचारियों को तो मानदेय मिल गया, लेकिन संविदा पर काम करने वाले कई विभागों के कर्मचारी मानदेय पाने से वंचित रह गए। इन कर्मचारियों ने मानदेय की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन शासन-प्रशासन ने इनकी मांग को अनसुना कर दिया। मानदेय न मिलने से इन कर्मचारियोें के घरों में दीपावली का त्योहार फीका रहेगा।
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साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत प्रौढों को साक्षर बनाने के लिए लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना की गई थी। इन केंद्रों पर करीब दो हजार प्रेरकों की तैनाती की गई थी। यह अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम भी दे रहे हैं, लेकिन पिछले 11 माह से इन्हें मानदेय नहीं मिला है।
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मानदेय की मांग को लेकर इन प्रेरकों ने धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन शासन-प्रशासन ने इनकी मांग को अनसुना कर दिया और दीपावली का त्योहार होने के बावजूद इन्हें मानदेय नही दिया गया। साक्षरताकर्मी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह का कहना है कि प्रेरकाें के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है। मानदेय न मिलने से इनकी दीपावली फीकी रहेगी।
कुछ ऐसा ही हाल पंचायती राज विभाग में संविदा पर कार्यरत रोजगार सेवकों का है। इन्हें भी पिछले 13 माह से मानदेय नहीं दिया गया है। गांवों के विकास की योजनाओं को क्रियान्वयन में इनकी भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद जिले के 998 रोजगार सेवक 13 माह से मानदेय के लिए भटक रहे हैं। मानदेय बगैर ग्राम रोजगार सेवकों की दीपावली फीकी रहेगी ।
स्वास्थ्य विभाग में संविदा के आधार पर विभिन्न पदों पर कार्यरत कई कर्मचारियों को भी दीपावली से पहले मानदेय नहीं मिल सका है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एपसीटीएस ऑपरेटरों को कई माह से मानदेय नहीं मिला है। इन कर्मचारियों का कहना है कि मानदेय की मांग को लेकर कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी से गुहार लगाई गई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मानदेय नहीं दिया गया।