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300 लोगों की खतौनी में गड़बड़ी
अमर उजाला/गोंडा
Updated Fri, 28 Apr 2017 11:33 PM IST
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तहसील करनैलगंज क्षेत्र के कई किसानों की खतौनी में बड़े फेरबदल का मामला सामने आया है। एसडीएम की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इस गड़बड़ी में तत्कालीन तहसीलदार समेत तीन लोग फंस गए हैं। तीन सौ से अधिक लोगों की खतौनी में गड़बड़ी की गई है।
इसमें बैनामा किसी के नाम और खतौनी में किसी और का नाम दर्ज मिला है। एसडीएम ने अब नए सिरे से भूमि के असली मालिकों का नाम खतौनी में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है। एसडीएम करनैलगंज ने तत्कालीन तहसीलदार समेत तीन लोगों पर कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी है।
तहसील क्षेत्र के ग्राम पिपरी राउत की ग्राम प्रधान सीतापती ने बताया कि उसके गांव के निवासी मेड़ई पुत्र सुकई के कोई औलाद नहीं थी। कुछ समय पूर्व उनकी मौत हो गई। नियम के अनुसार वारिस न होने की वजह से उनके नाम दर्ज कागजात भूमि नियमानुसार ग्राम समाज के खाते में दर्ज होनी चाहिए। म
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गर तत्कालीन तहसीलदार ने आठ नवंबर 2016 को मेड़ई का नाम खारिज कर सुमन सिंह पत्नी विजय बहादुर सिंह का नाम अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया। यहीं नहीं खतौनी में उसी तारीख में तहसीलदार का ही आदेश दर्शाते हुए मेड़ई का नाम खारिज कर जरिये वरासतन सुमन सिंह का नाम दर्ज किया गया है।
तहसील करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम डेहरास की रहने वाली शैलकुमारी पत्नी राजकुमार ने बताया कि उसकी भूमि का फर्जी तरीके से एक वसीयतनामा तैयार कराकर तहसील कर्मियों से मिलीभगत करके अप्रैल 2016 में बैनामा करा लिया गया। फर्जी बैनामा के आधार पर तहसीलदार न्यायालय के मुंसरिम/पेशकार को शामिल करके मई 2016 में बैनामा के आधार पर फर्जी पत्रावली तैयार करके बिना किसी सुनवाई के ही जून 2016 में दाखिल खारिज भी करा लिया गया।
तहसील करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम कुर्था के रहने वाले लाल बहादुर ने बताया कि उसके पिता महादेव ने अपने जीवनकाल में किसी को कोई बैनामा नहीं किया। मगर तहसील कर्मियों की मिलीभगत से रजिस्टर्ड बैनामा का परीक्षण को बगैर बिना किसी सुनवाई या पत्रावली के ही सितंबर 2016 में खतौनी से उसका नाम काटकर दूसरे के नाम भूमि का दाखिल खारिज कर दिया गया। इसकी जानकारी होने पर अब उसे खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए न्यायालय से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एसडीएम करनैलगंज हरिशंकर लाल शुक्ल ने बताया कि तहसील करनैलगंज में खतौनी में फर्जी तरीके से बिना सुनवाई के आदेश करने के तीन सौ से अधिक मामले सामने आए हैं। पत्रावलियों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। फर्जी मामले में तत्कालीन तहसीलदार समेत तीन लोग के नाम गड़बड़ी करने में आए है। इनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की गई है। डीएम को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है।
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इसमें बैनामा किसी के नाम और खतौनी में किसी और का नाम दर्ज मिला है। एसडीएम ने अब नए सिरे से भूमि के असली मालिकों का नाम खतौनी में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है। एसडीएम करनैलगंज ने तत्कालीन तहसीलदार समेत तीन लोगों पर कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी है।
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तहसील क्षेत्र के ग्राम पिपरी राउत की ग्राम प्रधान सीतापती ने बताया कि उसके गांव के निवासी मेड़ई पुत्र सुकई के कोई औलाद नहीं थी। कुछ समय पूर्व उनकी मौत हो गई। नियम के अनुसार वारिस न होने की वजह से उनके नाम दर्ज कागजात भूमि नियमानुसार ग्राम समाज के खाते में दर्ज होनी चाहिए। म
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गर तत्कालीन तहसीलदार ने आठ नवंबर 2016 को मेड़ई का नाम खारिज कर सुमन सिंह पत्नी विजय बहादुर सिंह का नाम अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया। यहीं नहीं खतौनी में उसी तारीख में तहसीलदार का ही आदेश दर्शाते हुए मेड़ई का नाम खारिज कर जरिये वरासतन सुमन सिंह का नाम दर्ज किया गया है।
तहसील करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम डेहरास की रहने वाली शैलकुमारी पत्नी राजकुमार ने बताया कि उसकी भूमि का फर्जी तरीके से एक वसीयतनामा तैयार कराकर तहसील कर्मियों से मिलीभगत करके अप्रैल 2016 में बैनामा करा लिया गया। फर्जी बैनामा के आधार पर तहसीलदार न्यायालय के मुंसरिम/पेशकार को शामिल करके मई 2016 में बैनामा के आधार पर फर्जी पत्रावली तैयार करके बिना किसी सुनवाई के ही जून 2016 में दाखिल खारिज भी करा लिया गया।
तहसील करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम कुर्था के रहने वाले लाल बहादुर ने बताया कि उसके पिता महादेव ने अपने जीवनकाल में किसी को कोई बैनामा नहीं किया। मगर तहसील कर्मियों की मिलीभगत से रजिस्टर्ड बैनामा का परीक्षण को बगैर बिना किसी सुनवाई या पत्रावली के ही सितंबर 2016 में खतौनी से उसका नाम काटकर दूसरे के नाम भूमि का दाखिल खारिज कर दिया गया। इसकी जानकारी होने पर अब उसे खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए न्यायालय से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एसडीएम करनैलगंज हरिशंकर लाल शुक्ल ने बताया कि तहसील करनैलगंज में खतौनी में फर्जी तरीके से बिना सुनवाई के आदेश करने के तीन सौ से अधिक मामले सामने आए हैं। पत्रावलियों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। फर्जी मामले में तत्कालीन तहसीलदार समेत तीन लोग के नाम गड़बड़ी करने में आए है। इनके खिलाफ रिपोर्ट तैयार की गई है। डीएम को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है।