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आवासीय स्कूल के घपले में दो की संविदा समाप्त, होगी रिकवरी
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गोंडा। कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में सप्लाई के 96 लाख बजट में बड़े स्तर पर घपले हुए थे। इसकी जांच सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने करके डीएम को भेजी थी। शासन से कार्रवाई के आदेश हुए थे, जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने जिला समन्वयक बालिका शिक्षा और लेखाधिकारी की सेवा समाप्त कर दिया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि घपला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारों से अधिक भुगतान की गई धनराशि की वसूली भी कराई जाएगी।
जिले के 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में सामग्री की सप्लाई की गई थी। जिसमें सामग्री की एमआरपी से अधिक का भुगतान लिया गया था।
इसमें बोर्नबीटा एक किलोग्राम का मूल्य 410 रुपये था लेकिन भुगतान 600 रुपये का लिया गया। इसमें 190 रूपए अधिक का भुगतान लिया गया। इसके लिए विभाग से दो लाख 89 हजार 180 रुपये अधिक भुगतान किया गया। इसी तरह च्वयनप्राश के लिए 340 रुपये की एमआरपी थी लेकिन भुगतान 470 रुपये का किया गया।
इसमें भी एक लाख 97 हजार 860 रुपये का अधिक भुगतान किया गया। इस तरह चार लाख 85 हजार 40 रुपये अधिक भुगतान किया गया। इस मामले में जिलाधिकारी ने कार्रवाई की है।
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सोमवार को बताया कि जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव ने पत्रावलियों को प्रस्तुत करने में अनियमितता बरती है, जबकि उन्हें नियमों की जानकारी की थी। इसके कारण जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
शासन से ही निर्देश मिले थे, इसी तरह सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी सुदीप की सेवा विभाग से समाप्त कर दी गई है। उनके खिलाफ अन्य कार्रवाई के लिए उनके मूल विभाग को संस्तुति भेजी गई है।
इसी तरह कार्रवाई में अधिक भुगतान लिए गए धनराशि की रिकवरी कराने की कार्रवाई हो रही है। जिसमें सामग्री सप्लाई करने वाली फर्मों से रिकवरी होगी। इसके लिए बीएसए को निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए विनय मोहन वन ने बताया कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अंधेरे में रखकर भुगतान कराने वालों से सख्ती होगी। इसके साथ ही पूरे प्रक्रिया का परीक्षण किया जा रहा है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में सामग्री सप्लाई में घपले का मामला तूल पकड़ रहा है। इसमें भुगतान की गई धनराशि की निविदा पहले स्वीकृत की गई थी। इसमें ही सही जानकारी नही दी गई, बाद में जांच के दौरान तथ्य सामने आने पर सीडीओ ने निविदा को निरस्त कर दिया और कार्रवाई की संस्तुति की।
ऐसे में अधिक भुगतान होने का रास्ता निविदा से ही साफ हो गया था और यहीं से जिला समन्वयक की गर्दन फंस गई थी। निविदा की पत्रावली उन्होंने ही प्रस्तुत किया था। अब जिला समन्वयक बालिका शिक्षा तर्क दे रही हैं कि उन्होंने भुगतान की पत्रावली पर हस्ताक्षर ही नही किए थे। लेकिन निविदा की पत्रावली में रेट तय करने का मामला चर्चा मे हैं और वहीं से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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जिलाधिकारी ने कहा कि घपला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारों से अधिक भुगतान की गई धनराशि की वसूली भी कराई जाएगी।
जिले के 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में सामग्री की सप्लाई की गई थी। जिसमें सामग्री की एमआरपी से अधिक का भुगतान लिया गया था।
इसमें बोर्नबीटा एक किलोग्राम का मूल्य 410 रुपये था लेकिन भुगतान 600 रुपये का लिया गया। इसमें 190 रूपए अधिक का भुगतान लिया गया। इसके लिए विभाग से दो लाख 89 हजार 180 रुपये अधिक भुगतान किया गया। इसी तरह च्वयनप्राश के लिए 340 रुपये की एमआरपी थी लेकिन भुगतान 470 रुपये का किया गया।
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इसमें भी एक लाख 97 हजार 860 रुपये का अधिक भुगतान किया गया। इस तरह चार लाख 85 हजार 40 रुपये अधिक भुगतान किया गया। इस मामले में जिलाधिकारी ने कार्रवाई की है।
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सोमवार को बताया कि जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव ने पत्रावलियों को प्रस्तुत करने में अनियमितता बरती है, जबकि उन्हें नियमों की जानकारी की थी। इसके कारण जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
शासन से ही निर्देश मिले थे, इसी तरह सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी सुदीप की सेवा विभाग से समाप्त कर दी गई है। उनके खिलाफ अन्य कार्रवाई के लिए उनके मूल विभाग को संस्तुति भेजी गई है।
इसी तरह कार्रवाई में अधिक भुगतान लिए गए धनराशि की रिकवरी कराने की कार्रवाई हो रही है। जिसमें सामग्री सप्लाई करने वाली फर्मों से रिकवरी होगी। इसके लिए बीएसए को निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए विनय मोहन वन ने बताया कि मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अंधेरे में रखकर भुगतान कराने वालों से सख्ती होगी। इसके साथ ही पूरे प्रक्रिया का परीक्षण किया जा रहा है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में सामग्री सप्लाई में घपले का मामला तूल पकड़ रहा है। इसमें भुगतान की गई धनराशि की निविदा पहले स्वीकृत की गई थी। इसमें ही सही जानकारी नही दी गई, बाद में जांच के दौरान तथ्य सामने आने पर सीडीओ ने निविदा को निरस्त कर दिया और कार्रवाई की संस्तुति की।
ऐसे में अधिक भुगतान होने का रास्ता निविदा से ही साफ हो गया था और यहीं से जिला समन्वयक की गर्दन फंस गई थी। निविदा की पत्रावली उन्होंने ही प्रस्तुत किया था। अब जिला समन्वयक बालिका शिक्षा तर्क दे रही हैं कि उन्होंने भुगतान की पत्रावली पर हस्ताक्षर ही नही किए थे। लेकिन निविदा की पत्रावली में रेट तय करने का मामला चर्चा मे हैं और वहीं से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।