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Gonda News: मेडिकल कॉलेज में स्थापित होगा दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
Tue, 13 Jan 2026 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 13 Jan 2026 11:17 PM IST
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मेडिकल कॉलेज स्थित आइसोलेशन विभाग। - संवाद
गोंडा। दिव्यांगजनों के लिए मेडिकल कॉलेज में मंडल का पहला जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड को चिह्नित करके डीडीआरसी में तब्दील करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निदेशालय स्तर से कर्मचारियों की तैनाती के साथ ही आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही केंद्र का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की मंशा है कि दिव्यांगजनों को इलाज, परामर्श और पुनर्वास के लिए अलग-अलग जगह भटकना न पड़े, बल्कि एक ही छत के नीचे उनकी सभी जरूरतों का समाधान उपलब्ध हो।
डीडीआरसी में दिव्यांगजनों को चिकित्सीय परामर्श, फिजियोथेरेपी, स्पीच और ऑक्युपेशनल थेरेपी, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण, मानसिक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही केंद्र में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, डिजिटल पंजीकरण, ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम और प्रशिक्षित स्टाफ फिजियोथेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक, स्पीच थेरेपिस्ट और प्रॉस्थेटिस्ट की तैनाती की जाएगी।
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आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा फोकस
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी रजनीश किरन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड को डीडीआरसी के लिए चिह्नित कर लिया गया है। निदेशालय से कर्मचारियों की तैनाती के बाद आवश्यक उपकरणों और फर्नीचर की खरीद प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र का उद्देश्य सिर्फ उपचार नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए एकीकृत सेवाएं प्रदान की जाएंगी और संचालन एक समिति के माध्यम से किया जाएगा।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निदेशालय स्तर से कर्मचारियों की तैनाती के साथ ही आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही केंद्र का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की मंशा है कि दिव्यांगजनों को इलाज, परामर्श और पुनर्वास के लिए अलग-अलग जगह भटकना न पड़े, बल्कि एक ही छत के नीचे उनकी सभी जरूरतों का समाधान उपलब्ध हो।
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डीडीआरसी में दिव्यांगजनों को चिकित्सीय परामर्श, फिजियोथेरेपी, स्पीच और ऑक्युपेशनल थेरेपी, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण, मानसिक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही केंद्र में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, डिजिटल पंजीकरण, ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम और प्रशिक्षित स्टाफ फिजियोथेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक, स्पीच थेरेपिस्ट और प्रॉस्थेटिस्ट की तैनाती की जाएगी।
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आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा फोकस
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी रजनीश किरन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड को डीडीआरसी के लिए चिह्नित कर लिया गया है। निदेशालय से कर्मचारियों की तैनाती के बाद आवश्यक उपकरणों और फर्नीचर की खरीद प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र का उद्देश्य सिर्फ उपचार नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए एकीकृत सेवाएं प्रदान की जाएंगी और संचालन एक समिति के माध्यम से किया जाएगा।