{"_id":"5820c9f24f1c1bf47eb384fc","slug":"devotee-descended-in-god-ghanshyam-s-birthday","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान घनश्याम के जनमोत्सव में उमड़े श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान घनश्याम के जनमोत्सव में उमड़े श्रद्धालु
अमर उजाला/गोंडा
Updated Tue, 08 Nov 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
महोत्सव में नृत्य करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश-विदेश से आए नारायण संप्रदाय सहित गोंडा के हजारों लोग सोमवार को भगवान घनश्याम के जन्मोत्सव के साक्षी बने। स्वामी नारायण के जयघोष व भक्ति के आनंद में डूबे श्रद्धालुओं की करतल ध्वनियों के बीच सोमवार की शाम भगवान घनश्याम पालने में आ गए। अपने आराध्य के प्रकट होते ही हरिभक्त प्रसन्नता से झूम उठे। इसके बाद बाल रूप भगवान घनश्याम को भक्तों ने पालकी सजाई और उन्हें झूला झुलाया।
बाल रूप भगवान के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश के कृषि मंत्री ने भी मंदिर पहुंचकर भगवान घनश्याम के दर्शन किए। जन्मोत्सव के पहले कथा में स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी महराज ने कहा की सत्संगी जीवन और स्वामी नारायण के दिखाए गए रास्ते पर चलकर जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है ।
भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली स्वामी नारायण छपिया मंदिर में चल रहे छपिया महोत्सव में तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं के जयकारों व घंटों घड़ियालों की ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया ।
विज्ञापन
महोत्सव में सोमवार को कथावाचक स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी ने भगवान के जीवन के पावन चरित्रों का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्णावतार के बीत जाने के बहुत समय बाद जब कलियुग का प्रभाव चारों ओर फैल रहा था और आसुरी प्रवृतियां धार्मिक लोगों का जीना दूभर कर रही थीं, तब लोगों को सन्मार्ग दिखाने के लिए भगवान घनश्याम का धरती पर अवतरण हुआ।
उन्होंने कहा की भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली पर आने से भक्तों को अक्षरधाम की प्राप्ति होती है तथा काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि दुर्गुणों का नाश होता है। इस संगीतमयी हरिकथा को सुनकर कथा पंडाल में हरिभक्त आनंद की मस्ती में गोता लगाते रहे।
कथा के बाद भगवान के जन्मोत्सव की झांकी का आयोजन किया गया। भगवान के जन्म लेते ही कथा पंडाल स्वामी नारायण स्वामी नारायण के जयकारों से गूंज उठा। इस जन्मोत्सव के लिए स्वामी नारायण के अनुयायिओं ने विशेष रूप से भगवान की पालकी सजाई और उन्हें पालने में बैठाकर झूला झुलाया।
हर्ष व उल्लास के बीच आकाश में गुब्बारे छोडे़ गए और महिलाओं ने गरबा नृत्य कर अपने आराध्य के बालरूप के दर्शन किए। जन्मोत्सव में मंदिर के महंत स्वामी वासुदेवानन्द, स्वामी हरिस्वरुपानंद, यजमान आशीष भाई, रमेश भाई मानसेता, रामप्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
बाल रूप भगवान के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश के कृषि मंत्री ने भी मंदिर पहुंचकर भगवान घनश्याम के दर्शन किए। जन्मोत्सव के पहले कथा में स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी महराज ने कहा की सत्संगी जीवन और स्वामी नारायण के दिखाए गए रास्ते पर चलकर जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है ।
विज्ञापन
भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली स्वामी नारायण छपिया मंदिर में चल रहे छपिया महोत्सव में तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं के जयकारों व घंटों घड़ियालों की ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया ।
विज्ञापन
महोत्सव में सोमवार को कथावाचक स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी ने भगवान के जीवन के पावन चरित्रों का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्णावतार के बीत जाने के बहुत समय बाद जब कलियुग का प्रभाव चारों ओर फैल रहा था और आसुरी प्रवृतियां धार्मिक लोगों का जीना दूभर कर रही थीं, तब लोगों को सन्मार्ग दिखाने के लिए भगवान घनश्याम का धरती पर अवतरण हुआ।
उन्होंने कहा की भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली पर आने से भक्तों को अक्षरधाम की प्राप्ति होती है तथा काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि दुर्गुणों का नाश होता है। इस संगीतमयी हरिकथा को सुनकर कथा पंडाल में हरिभक्त आनंद की मस्ती में गोता लगाते रहे।
कथा के बाद भगवान के जन्मोत्सव की झांकी का आयोजन किया गया। भगवान के जन्म लेते ही कथा पंडाल स्वामी नारायण स्वामी नारायण के जयकारों से गूंज उठा। इस जन्मोत्सव के लिए स्वामी नारायण के अनुयायिओं ने विशेष रूप से भगवान की पालकी सजाई और उन्हें पालने में बैठाकर झूला झुलाया।
हर्ष व उल्लास के बीच आकाश में गुब्बारे छोडे़ गए और महिलाओं ने गरबा नृत्य कर अपने आराध्य के बालरूप के दर्शन किए। जन्मोत्सव में मंदिर के महंत स्वामी वासुदेवानन्द, स्वामी हरिस्वरुपानंद, यजमान आशीष भाई, रमेश भाई मानसेता, रामप्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।