फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Devipatan habitation were capacitance mother Sita

देवीपाटन धाम में समाईं थीं माता सीता

Tue, 13 Oct 2015 11:39 PM IST
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 13 Oct 2015 11:39 PM IST
विज्ञापन
सिरिया नदी के पवित्र तट पर स्थित देवीपाटन शक्तिपीठ अपने आप में कई प्राचीन मान्यताओं की साक्षी है। यहीं पर भगवान परशुराम ने धनुषधारी व दानवीर कर्ण को शिक्षा दी थी। त्रेता युग में माता सीता ने पाताल गमन यहीं पर किया था। इस शक्तिपीठ की स्थापना नाथ संप्रदाय के आदि गुरु गोरक्षनाथ ने भगवान भोलेनाथ के आदेश पर की थी। मंदिर का पाताल चबूतरा, अखंड ज्योति, यंत्र सहित नवदुर्गा प्रतिमा, अखंड धूना व सूर्य कुंड आदि प्रमुख स्थल भी अपने आप में अनेक प्राचीन मान्यताएं व महत्व को संजोए हुए हैं।
विज्ञापन


देवीपाटन का एक नाम पातालेश्वरी भी है। ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने जन अपवाद के भय से माता सीता को अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए कहा तो देवी सीता ने इसे अपना अपमान माना।
विज्ञापन


उन्होंने लज्जा से धरती माता से प्रार्थना की कि यदि वह सही मायने में पतिव्रता हैं तो अपनी गोद में उन्हें समा लें। सीता माता की प्रार्थना से पृथ्वी फट गई व सिंहासन पर बैठी धरती माता ने सीता जी को गोद में बैठाया और वापस पाताल में समा गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोगों का मानना है कि इसी स्थान पर सीता जी का पाताल गमन हुआ था इसीलिए इसे पातालेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है।

भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से छठा अवतार भगवान परशुराम माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने द्वापर युग में महारथी कर्ण को इसी स्थान पर धनुर्विद्या का ज्ञान दिया था।

कर्ण ने योग साधना करके भगवान  परशुराम से दिव्य अस्त्रों की शिक्षा ली थी। ये भी कहा जाता है कि यहीं पर स्थित सूर्य कुंड में स्नान करके महादानी कर्ण प्रतिदिन भगवान सूर्य की उपासना करते थे।

सतयुग में माता सती का वाम स्कंध सहित पाटंबर गिरने, त्रेता युग में माता सीता  के यहां पाताल में समाने और द्वापर युग में महारथी कर्ण का यहां धनुर्विद्या ग्रहण करने जैसी मान्यताआें से जुड़े इस प्राचीन स्थल पर सर्वप्रथम मंदिर निर्माण का जो उल्लेख मिलता है वह महायोगी गुरु गोरक्षनाथ से संबंधित है।


देवीपाटन में उपलब्ध एक शिलालेख के अनुसार गुरु गोरक्षनाथ ने महादेव की आज्ञा से जहां देवी सती का पाटंबर सहित वाम स्कंध गिरा था वहां एक मढ़ी का निर्माण कराया। बाद में मंदिर का जीर्णोद्घार महाराजा विक्रमादित्य द्वारा कराया गया।

फोटो-04 व 05-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed