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बर्ड फ्लू को लेकर विभाग सतर्क टीमें गठित
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बर्ड फ्लू को लेकर गठित टास्क फोर्स टीम के साथ बैठक करते जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही।
- फोटो : GONDA
गोंडा। बर्ड फ्लू की आहट से प्रशासन सतर्क है। जिला प्रशासन 10 सदस्यीय टास्क फोर्स बनाकर पोल्ट्री फार्मों पर विशेष नजर रख रहा है। वहीं पशु चिकित्सा विभाग भी इन फार्मों की निगरानी कर रहा है।
सामान्य चेकअप और सैंपलिंग के लिए विभाग की ओर से पांच रैपिड रिस्पांस टीम गठित की गई है, जो उच्च अधिकारियों की निगरानी में सैंपलिंग कर रही है। जिले में कहीं किसी पक्षी के मरने की सूचना मिलती है, तुरंत रैपिड एक्शन टीम द्वारा उसका सैम्पल लेकर जांच की जा रही है।
सोमवार को कर्नलगंज के धौरहरा गांव में कौवों के मरने की सूचना मिलने पर तुरंत रैपिड एक्शन टीम मौके पर पहुंचीं तो पाया कि एक उल्लू की मौत हुई है। सैंपल लेकर जांच कराने पर ठंड से मौत की पुष्टि हुई। वहीं जिले में बर्ड फ्लू के डर से मुर्गियों व अंडों की मांग घट गई है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में बर्ड फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा अधिकारियों को पोल्ट्री फार्मों के नियमित निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। पक्षियों के मरने की सूचना मिलते ही चिकित्सक व पशु चिकित्सकों को टीम मौके पहुंचकर से सैंपल लेकर जांच कराएगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रवींद्र सिंह राठौर के मुताबिक बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (एच5 एन1) की वजह से होता है। यह एक वायरल इंफेक्शन है, जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले अन्य पक्षियों, जानवरों और इंसानों में फैलता है। बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं, लेकिन एच5 एल1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है जो इंसानों को संक्रमित करता है।
बर्ड फ्लू प्रवासी जलीय पक्षियों खासतौर से जंगली बतख से प्राकृतिक रूप से फैलता है। ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है। ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से होती है।
संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।
सीएमओ डॉ. अजय सिंह गौतम के मुताबिक बर्ड फ्लू होने पर कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी परेशानी, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट दर्द, उल्टी, निमोनिया गले में खरास, नाक बहना, बेचैनी, आंखों में इंफेक्शन जैसी समस्या हो सकती है।
ऐसे लक्षण दिखायी देने पर किसी और के संपर्क में आने से पहले चिकित्सक को दिखाएं। जिले की सभी सीएचसी पर चिकित्सकों को अलर्ट पर रखा गया है।
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सामान्य चेकअप और सैंपलिंग के लिए विभाग की ओर से पांच रैपिड रिस्पांस टीम गठित की गई है, जो उच्च अधिकारियों की निगरानी में सैंपलिंग कर रही है। जिले में कहीं किसी पक्षी के मरने की सूचना मिलती है, तुरंत रैपिड एक्शन टीम द्वारा उसका सैम्पल लेकर जांच की जा रही है।
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सोमवार को कर्नलगंज के धौरहरा गांव में कौवों के मरने की सूचना मिलने पर तुरंत रैपिड एक्शन टीम मौके पर पहुंचीं तो पाया कि एक उल्लू की मौत हुई है। सैंपल लेकर जांच कराने पर ठंड से मौत की पुष्टि हुई। वहीं जिले में बर्ड फ्लू के डर से मुर्गियों व अंडों की मांग घट गई है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में बर्ड फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा अधिकारियों को पोल्ट्री फार्मों के नियमित निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। पक्षियों के मरने की सूचना मिलते ही चिकित्सक व पशु चिकित्सकों को टीम मौके पहुंचकर से सैंपल लेकर जांच कराएगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रवींद्र सिंह राठौर के मुताबिक बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस (एच5 एन1) की वजह से होता है। यह एक वायरल इंफेक्शन है, जो संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले अन्य पक्षियों, जानवरों और इंसानों में फैलता है। बर्ड फ्लू कई तरह के होते हैं, लेकिन एच5 एल1 पहला ऐसा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है जो इंसानों को संक्रमित करता है।
बर्ड फ्लू प्रवासी जलीय पक्षियों खासतौर से जंगली बतख से प्राकृतिक रूप से फैलता है। ये पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है। ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाले पानी के संपर्क में आने से होती है।
संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।
सीएमओ डॉ. अजय सिंह गौतम के मुताबिक बर्ड फ्लू होने पर कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी परेशानी, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट दर्द, उल्टी, निमोनिया गले में खरास, नाक बहना, बेचैनी, आंखों में इंफेक्शन जैसी समस्या हो सकती है।
ऐसे लक्षण दिखायी देने पर किसी और के संपर्क में आने से पहले चिकित्सक को दिखाएं। जिले की सभी सीएचसी पर चिकित्सकों को अलर्ट पर रखा गया है।