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Gonda News: 177 मदरसों के 28 हजार बच्चों की नहीं हुई डाटा एंट्री
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गोंडा। मदरसों में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार की सख्ती काम नहीं आ रही है। फरवरी बीतने के बावजूद 177 मदरसों में 28 हजार बच्चों की डाटा एंट्री नहीं हो सकी है। तीन सौ मदरसों में बच्चों की अपार आईडी बनाने की शुरुआत नहीं हुई है। अधिकारियों के तमाम प्रयासों के बावजूद भी जिला अल्पसंख्यक विभाग आदेशों का अनुपालन नहीं करा पा रहा है।
जिले में छह सहायता प्राप्त के साथ ही 495 निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब 42 हजार बच्चे पंजीकृत बताए जा रहे हैं। पिछले कई महीनों में शासन से लेकर जिले के अधिकारियों ने अपार आईडी को लेकर अलग-अलग स्तर पर बैठक कर अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए, लेकिन मदरसा संचालक आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं।
आलम यह है कि जिले में अब तक करीब नौ हजार बच्चों की ही अपार आईडी बन पाई है। 35 हजार से अधिक बच्चों की अपार आईडी के बारे में कुछ अता-पता नहीं है। ये बच्चे कहां पढ़ रहे हैं, उनकी अपार आईडी क्यों नहीं बन पा रही है, इन सवालों का जवाब जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास नहीं है। एमआईएस इंचार्ज जगदीश शरण गुप्त ने बताया कि जिले में लगभग 300 से अधिक मदरसों में अपार आईडी बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। इसके साथ ही फरवरी के आखिरी तक 177 मदरसों में बच्चों की डाटा एंट्री तक नहीं हुई है। पुरानी संख्या दिखाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जा रहा है।
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फर्जीवाड़े का गहरा रहा शक
सत्र के आखिरी तक डाटा एंट्री न होने से कागजों में ही बच्चों के पढ़ने के शक गहरा गया है। हालांकि, अभी भी अधिकारियों को उम्मीद है कि मार्च के अंत तक डाटा एंट्री के साथ ही बच्चों की अपार आईडी बनाई जाएगी, लेकिन पिछले महीनों में एंटी करप्शन की टीम ने 100 से अधिक मदरसों के कागजों में संचालित होने को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
तरबगंज मदरसे में नहीं बनी आईडी
तरबगंज ब्लॉक में 11 निजी मदरसों में 608 बच्चे तालीम ले रहे हैं, लेकिन अभी तक एक भी बच्चे की अपार आईडी नहीं बनी है। वजीरगंज, परसपुर, बेलसर और छपिया समेत अन्य ब्लॉकों की भी यही स्थिति है। मंगलवार को डीएम ने कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा कर अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की चेतावनी दी है।
समीक्षा में ये बातें आईं सामने
जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक में पता चला कि 177 मदरसों के अलावा 118 बेसिक के निजी विद्यालयों के साथ ही 21 माध्यमिक विद्यालयों में डाटा एंट्री नहीं शुरू हुई है। जिलाधिकारी ने तीन दिन में डाटा एंट्री के साथ ही अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद संबंधित विभागाध्यक्षों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
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जिले में छह सहायता प्राप्त के साथ ही 495 निजी मदरसे संचालित हो रहे हैं। इसमें करीब 42 हजार बच्चे पंजीकृत बताए जा रहे हैं। पिछले कई महीनों में शासन से लेकर जिले के अधिकारियों ने अपार आईडी को लेकर अलग-अलग स्तर पर बैठक कर अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए, लेकिन मदरसा संचालक आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं।
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आलम यह है कि जिले में अब तक करीब नौ हजार बच्चों की ही अपार आईडी बन पाई है। 35 हजार से अधिक बच्चों की अपार आईडी के बारे में कुछ अता-पता नहीं है। ये बच्चे कहां पढ़ रहे हैं, उनकी अपार आईडी क्यों नहीं बन पा रही है, इन सवालों का जवाब जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास नहीं है। एमआईएस इंचार्ज जगदीश शरण गुप्त ने बताया कि जिले में लगभग 300 से अधिक मदरसों में अपार आईडी बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। इसके साथ ही फरवरी के आखिरी तक 177 मदरसों में बच्चों की डाटा एंट्री तक नहीं हुई है। पुरानी संख्या दिखाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जा रहा है।
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फर्जीवाड़े का गहरा रहा शक
सत्र के आखिरी तक डाटा एंट्री न होने से कागजों में ही बच्चों के पढ़ने के शक गहरा गया है। हालांकि, अभी भी अधिकारियों को उम्मीद है कि मार्च के अंत तक डाटा एंट्री के साथ ही बच्चों की अपार आईडी बनाई जाएगी, लेकिन पिछले महीनों में एंटी करप्शन की टीम ने 100 से अधिक मदरसों के कागजों में संचालित होने को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। साथ ही शासन को रिपोर्ट भेजी थी।
तरबगंज मदरसे में नहीं बनी आईडी
तरबगंज ब्लॉक में 11 निजी मदरसों में 608 बच्चे तालीम ले रहे हैं, लेकिन अभी तक एक भी बच्चे की अपार आईडी नहीं बनी है। वजीरगंज, परसपुर, बेलसर और छपिया समेत अन्य ब्लॉकों की भी यही स्थिति है। मंगलवार को डीएम ने कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा कर अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की चेतावनी दी है।
समीक्षा में ये बातें आईं सामने
जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक में पता चला कि 177 मदरसों के अलावा 118 बेसिक के निजी विद्यालयों के साथ ही 21 माध्यमिक विद्यालयों में डाटा एंट्री नहीं शुरू हुई है। जिलाधिकारी ने तीन दिन में डाटा एंट्री के साथ ही अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद संबंधित विभागाध्यक्षों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।