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डॉक्टरों की हड़ताल से बिना इलाज लौट 5 हजार मरीज
amar ujala
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:17 PM IST
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की तरह से घोषित हड़ताल मंगलवार को मरीजों पर भारी पड़ी। हड़ताल के कारण जिले के किसी भी निजी डॉक्टर ने मरीजों को हाथ तक नहीं लगाया। इस कारण करीब 5 हजार मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा।
8 दिन पहले जहां दवा दुकानदारों (केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन) की हड़ताल से मरीजों को तमाम तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा वहीं मंगलवार को आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की हड़ताल ने मरीजों को पस्त कर दिया। नतीजा यह रहा कि आईएमए के समर्थन में ओपीडी करने वाले जिले के 72 निजी डाक्टरों ने मंगलवार को एक भी मरीज नहीं देखा और करीब पांच हजार मरीजों को अपनी ओपीडी से बाहर कर दिया। जिससे मरीजों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ी।
आईएमए हॉल में बैठकर महामंत्री डॉ. आलोक अग्रवाल, अध्यक्ष डा.संजय त्रिपाठी, डा.नितिन गुप्ता, डा.विनीत मोदी, डॉ.ओएन पांडेय, डा.एनएन तिवारी, डा. साबिर हुसैन व डा.वीपी सिंह ने आगामी रणनीति पर विचार करने के बाद शाम को जिलाधिकारी को जाकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
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एक हफ्ते पहले से प्रस्तावित आईएमए की हड़ताल के मद्देनजर मंगलवार को जिला अस्पताल में रोज की अपेक्षा मरीजों की भीड़ कहीं ज्यादा थी। वैसे तो बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल में रोजाना करीब 2 से ढाई हजार मरीज इलाज कराने आते ही हैं। लेकिन मंगलवार को आईएमए में शमिल निजी डाक्टरों की हड़ताल के चलते इनकी संख्या साढ़े 3 हजार के करीब रही। जिला अस्पताल में सुबह 8 बजते ही मरीजों की भीड़ टूट पड़ी, जिसका दबाव दोपहर के 2 बजे तक सरकारी डाक्टरों की ओपीडी के बाहर बना रहा।
मंगलवार को आईएमए की हड़ताल के चलते एससीपीएम हास्पिटल, आर्शीवाद नर्सिंग होम, गोंडा मेडिकल सेंटर, अवध नर्सिंग होम, श्रीराम नर्सिंग होम, किरम हास्पिटल, आरएन पाण्डेय नर्सिंग होम, आशा देव मेमोरियल हास्पिटल, स्टार हास्पिटल, मंगलम हास्पिटल, गायत्री हास्पिटल सहित तमाम निजी डाक्टरों की ओपीडी बंद रही। वहीं भारत, प्रकाश, नेशनल जैसे कई पैथालाजी सेंटर भी मंगलवार को बंद रहे।
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8 दिन पहले जहां दवा दुकानदारों (केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन) की हड़ताल से मरीजों को तमाम तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा वहीं मंगलवार को आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की हड़ताल ने मरीजों को पस्त कर दिया। नतीजा यह रहा कि आईएमए के समर्थन में ओपीडी करने वाले जिले के 72 निजी डाक्टरों ने मंगलवार को एक भी मरीज नहीं देखा और करीब पांच हजार मरीजों को अपनी ओपीडी से बाहर कर दिया। जिससे मरीजों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ी।
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आईएमए हॉल में बैठकर महामंत्री डॉ. आलोक अग्रवाल, अध्यक्ष डा.संजय त्रिपाठी, डा.नितिन गुप्ता, डा.विनीत मोदी, डॉ.ओएन पांडेय, डा.एनएन तिवारी, डा. साबिर हुसैन व डा.वीपी सिंह ने आगामी रणनीति पर विचार करने के बाद शाम को जिलाधिकारी को जाकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
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एक हफ्ते पहले से प्रस्तावित आईएमए की हड़ताल के मद्देनजर मंगलवार को जिला अस्पताल में रोज की अपेक्षा मरीजों की भीड़ कहीं ज्यादा थी। वैसे तो बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल में रोजाना करीब 2 से ढाई हजार मरीज इलाज कराने आते ही हैं। लेकिन मंगलवार को आईएमए में शमिल निजी डाक्टरों की हड़ताल के चलते इनकी संख्या साढ़े 3 हजार के करीब रही। जिला अस्पताल में सुबह 8 बजते ही मरीजों की भीड़ टूट पड़ी, जिसका दबाव दोपहर के 2 बजे तक सरकारी डाक्टरों की ओपीडी के बाहर बना रहा।
मंगलवार को आईएमए की हड़ताल के चलते एससीपीएम हास्पिटल, आर्शीवाद नर्सिंग होम, गोंडा मेडिकल सेंटर, अवध नर्सिंग होम, श्रीराम नर्सिंग होम, किरम हास्पिटल, आरएन पाण्डेय नर्सिंग होम, आशा देव मेमोरियल हास्पिटल, स्टार हास्पिटल, मंगलम हास्पिटल, गायत्री हास्पिटल सहित तमाम निजी डाक्टरों की ओपीडी बंद रही। वहीं भारत, प्रकाश, नेशनल जैसे कई पैथालाजी सेंटर भी मंगलवार को बंद रहे।