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Gonda News: हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी, बीएसए को अवमानना नोटिस
Fri, 02 Jun 2023 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 02 Jun 2023 12:33 AM IST
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गोंडा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के मामले में लखनऊ खंडपीठ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक राजनारायण उपाध्याय की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव ने बहस की। याची राज नारायण उपाध्याय करनैलगंज विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रुदौली में प्रधानाध्यापक थे। सेवाकाल के दौरान जुलाई 2009 से जून 2010 तक मेडिकल अवकाश के दौरान बिना वेतन अवकाश के आधार पर उन्हें वेतन से वंचित कर दिया गया। इस पर उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली तो पांच दिसंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने 11 मई 2011 के आदेश को निरस्त करते हुए जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को छह सप्ताह में अवकाश स्वीकृति के संबंध में पुन: आदेश पारित करने का आदेश दिया।
अदालत के आदेश की जानकारी देते हुए याची राज नारायण उपाध्याय ने 13 दिसंबर 2022 को जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर वेतन दिलाने की मांग की, लेकिन बीएसए ने कोई कार्रवाई नहीं की, तब विवश होकर राजनारायण ने न्यायालय में अवमानना प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
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यह आदेश न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक राजनारायण उपाध्याय की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव ने बहस की। याची राज नारायण उपाध्याय करनैलगंज विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रुदौली में प्रधानाध्यापक थे। सेवाकाल के दौरान जुलाई 2009 से जून 2010 तक मेडिकल अवकाश के दौरान बिना वेतन अवकाश के आधार पर उन्हें वेतन से वंचित कर दिया गया। इस पर उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली तो पांच दिसंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने 11 मई 2011 के आदेश को निरस्त करते हुए जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को छह सप्ताह में अवकाश स्वीकृति के संबंध में पुन: आदेश पारित करने का आदेश दिया।
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अदालत के आदेश की जानकारी देते हुए याची राज नारायण उपाध्याय ने 13 दिसंबर 2022 को जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर वेतन दिलाने की मांग की, लेकिन बीएसए ने कोई कार्रवाई नहीं की, तब विवश होकर राजनारायण ने न्यायालय में अवमानना प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
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