{"_id":"61f2e4d2a3417f626c61b910","slug":"cold-family-gonda-news-lko615237083","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड के सितम से जनजीवन अस्त व्यस्त, घरों में दुबके लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड के सितम से जनजीवन अस्त व्यस्त, घरों में दुबके लोग
विज्ञापन
फोटो-19 गोंडा के सूरजहोटल रोड पर कोहरा के बीच हेडलाइट जलाकर निकलते वाहन। संवाद
- फोटो : GONDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा। बारिश व ओलावृष्टि के बाद बढ़ी हाड़कंपाऊ ठंड जिले में सितम ढा रही है। बर्फीली हवा के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। गुुरुवार को सीजन की सबसे अधिक ठंडी रिकार्ड की गई। लोग ठंड से बचने के लिए घर में दुबके नजर आए तो वहीं कई लोग अलाव जलाकर तापते नजर आए। सुबह कोहरे के कारण सड़कों पर वाहनों की संख्या भी कम दिखी।
पिछले दिनों जिले में हुई बारिश व बर्फबारी के चलते ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। बारिश बंद होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन बर्फीली हवा से तापमान न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। भारी भरकम रजाई ओढ़कर बंद कमरे में लेटने वालों को भी ठंड का कहर झेलना पड़ रहा है। तेज बर्फीली हवा के आगे वह भी बेअसर साबित हो रही है। हालात ये हैं कि बच्चे, युवा और बूढ़ों के साथ पशु-पक्षी भी ठंड के आगे अपने को कमजोर महसूस कर रहे हैं।
ठंड ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल
कड़ाके की ठंड ने जिला प्रशासन की ओर से किए गए बचाव के इंतजामों की भी पोल खोल दी। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव खोजते नजर आए। कोहरे व धुंध के साथ बर्फीली हवा के बीच हाड़ कंपाने वाली ठंड से हर कोई सहम है लेकिन जिला प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा। जिला प्रशासन सिर्फ कागजों पर असहाय, निराश्रित, यात्रियों व आमजनों की ठंड दूर कर रहा है। पूरे जिले में गिनती के सार्वजनिक स्थलों को छोड़ किसी भी कस्बे में अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं कराई गई है। गुरुवार को दीवानी कचहरी के बाहर लोग लोग ठिठुरते दिखे तो वहीं रोडवेज बस स्टाप पर बैठे यात्री गर्म कपड़ों व कंबल के बीच दुबके दिखाई पड़े।
विज्ञापन
बच्चों के लिए एहतियात जरूरी
पिछले तीन दिन से अचानक ठंड बढ़ गई और शीत लहर चल रही है। चिकित्सकों के मुताबिक ठंड का असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा होता है। विंटर डायरिया के साथ सर्दी, जुकाम, खांसी की चपेट में मासूम बच्चे आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम गुप्ता ने बताया कि वैसे तो सर्दी का मौसम हेल्दी सीजन होता है लेकिन बच्चों को ठंड से बचाने के लिए एहतियात बरतनी जरूरी है। उनके यहां ज्यादातर मरीज विंटर डायरिया, सर्दी, जुकाम व खांसी के आ रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले दिनों जिले में हुई बारिश व बर्फबारी के चलते ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। बारिश बंद होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन बर्फीली हवा से तापमान न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। भारी भरकम रजाई ओढ़कर बंद कमरे में लेटने वालों को भी ठंड का कहर झेलना पड़ रहा है। तेज बर्फीली हवा के आगे वह भी बेअसर साबित हो रही है। हालात ये हैं कि बच्चे, युवा और बूढ़ों के साथ पशु-पक्षी भी ठंड के आगे अपने को कमजोर महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन
ठंड ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल
कड़ाके की ठंड ने जिला प्रशासन की ओर से किए गए बचाव के इंतजामों की भी पोल खोल दी। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव खोजते नजर आए। कोहरे व धुंध के साथ बर्फीली हवा के बीच हाड़ कंपाने वाली ठंड से हर कोई सहम है लेकिन जिला प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा। जिला प्रशासन सिर्फ कागजों पर असहाय, निराश्रित, यात्रियों व आमजनों की ठंड दूर कर रहा है। पूरे जिले में गिनती के सार्वजनिक स्थलों को छोड़ किसी भी कस्बे में अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं कराई गई है। गुरुवार को दीवानी कचहरी के बाहर लोग लोग ठिठुरते दिखे तो वहीं रोडवेज बस स्टाप पर बैठे यात्री गर्म कपड़ों व कंबल के बीच दुबके दिखाई पड़े।
विज्ञापन
बच्चों के लिए एहतियात जरूरी
पिछले तीन दिन से अचानक ठंड बढ़ गई और शीत लहर चल रही है। चिकित्सकों के मुताबिक ठंड का असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा होता है। विंटर डायरिया के साथ सर्दी, जुकाम, खांसी की चपेट में मासूम बच्चे आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम गुप्ता ने बताया कि वैसे तो सर्दी का मौसम हेल्दी सीजन होता है लेकिन बच्चों को ठंड से बचाने के लिए एहतियात बरतनी जरूरी है। उनके यहां ज्यादातर मरीज विंटर डायरिया, सर्दी, जुकाम व खांसी के आ रहे हैं।