{"_id":"6a946bf81634177f5b0568b9","slug":"civil-judge-who-made-headlines-over-the-commissioners-phone-incident-granted-security-gonda-news-c-100-1-slko1026-165211-2026-08-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: कमिश्नर के फोन मामले से सुर्खियों में आईं सिविल जज को मिली सुरक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: कमिश्नर के फोन मामले से सुर्खियों में आईं सिविल जज को मिली सुरक्षा
Sun, 30 Aug 2026 11:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:14 PM IST
विज्ञापन
गोंडा। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के फोन मामले से सुर्खियों में आईं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान को सुरक्षा दी गई है।उनकी सुरक्षा में गनर तैनात किया गया है। सीओ सदर/सीओ लाइन अभिषेक दवाच्या ने सिविल जज को सुरक्षा दिए जाने की पुष्टि की है।
उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने सिविल जज पर कथित प्रशासनिक दबाव बनाने के मामले में निंदा प्रस्ताव पारित किया है। संघ का कहना है कि किसी लंबित वाद को लेकर न्यायिक अधिकारी पर किसी भी तरह का प्रशासनिक दबाव न्यायिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर विषय है।
संघ के अनुसार, कमिश्नर ने शबीना खान को फोन किया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान न्यायिक अधिकारी के बच्चे से नाम, पता, भाई-बहन और स्कूल से संबंधित जानकारी ली गई। इसके बाद न्यायिक अधिकारी से एक लंबित सिविल वाद को लेकर बातचीत और दबाव बनाने का आरोप लगाया गया। मंडलायुक्त ने फोन पर बातचीत की बात स्वीकार की थी, लेकिन मुकदमे के संबंध में कोई बात करने से इन्कार किया था।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने 24 अगस्त को ऑनलाइन बैठक कर मामले पर चर्चा की। संघ ने कथित घटना को न्यायिक कार्य में अनुचित हस्तक्षेप बताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया। संघ ने सरकार से न्यायिक अधिकारियों पर प्रशासनिक दबाव रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने सिविल जज पर कथित प्रशासनिक दबाव बनाने के मामले में निंदा प्रस्ताव पारित किया है। संघ का कहना है कि किसी लंबित वाद को लेकर न्यायिक अधिकारी पर किसी भी तरह का प्रशासनिक दबाव न्यायिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर विषय है।
विज्ञापन
संघ के अनुसार, कमिश्नर ने शबीना खान को फोन किया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान न्यायिक अधिकारी के बच्चे से नाम, पता, भाई-बहन और स्कूल से संबंधित जानकारी ली गई। इसके बाद न्यायिक अधिकारी से एक लंबित सिविल वाद को लेकर बातचीत और दबाव बनाने का आरोप लगाया गया। मंडलायुक्त ने फोन पर बातचीत की बात स्वीकार की थी, लेकिन मुकदमे के संबंध में कोई बात करने से इन्कार किया था।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने 24 अगस्त को ऑनलाइन बैठक कर मामले पर चर्चा की। संघ ने कथित घटना को न्यायिक कार्य में अनुचित हस्तक्षेप बताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया। संघ ने सरकार से न्यायिक अधिकारियों पर प्रशासनिक दबाव रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।