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2600 प्राइमरी स्कूलों में तय सारणी से होगी बच्चों की पढ़ाई
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गोंडा। जूनियर हाईस्कूलों के बाद अब एक मार्च से 2600 से अधिक प्राइमरी स्कूलों को खोलने की तैयारी पूरी हो गई है। समय सारिणी से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई होनी है। एक मार्च को स्कूल सुबह नौ बजे से खुलेंगे।
कक्षा एक से पांच तक के लिए सुबह के 15 मिनट प्रार्थना व उपस्थिति दर्ज करने के लिए और आधे घंटे मिड डे मील के लिए दिए जाएंगे। शिक्षकों का विभाजन विषय विशेषज्ञता के आधार पर न करके कक्षानुसार किया जाएगा। विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम प्राप्त कराने की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक की होगी।
सभी कक्षाओं की समय सारिणी में पुस्तकालय को विशेष तरजीह दी गई है। अंग्रेजी, गणित, हिंदी, पर्यावरण विज्ञान, खेल, चित्रकला, नाटक, संगीत, संस्कृत आदि के पीरियड का निर्धारण कर दिया गया है।
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गर्मियों में आठ से दो और सर्दियों में नौ से तीन बजे तक स्कूल का समय होगा। छोटी कक्षाओं में एक विषय के लिए दो घंटे का एक पीरियड होगा तो कक्षा पांच में आधे घंटे का। कक्षा एक व दो में ऐसे शिक्षकों को पढ़ाने के लिए भेजा जाए जो सबसे कर्मठ, लगनशील व उत्साही हों।
पढ़ाई में टीएलएम का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाए। गतिविधि आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाए। शिक्षक आंकलन पत्र के जरिएइन बच्चों का परीक्षण करेंगे। पता करेंगे कि कोविड काल में उन्होंने कितना सीखा, कितना छोड़ा। फिर इसके आधार पर उनकी रिमेडियल पढ़ाई होगी। सभी प्राइमरी स्कूलों में रोजाना 40 मिनट की रिमेडियल चलाई जाएगी।
प्राथमिक विद्यालय के छात्रों की दक्षता बढ़ाने के लिए योगी सरकार का प्रेरक मिशन 6 महीने में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर को बदल देगा। पहले एक प्ररेक विद्यालय बनाया जाएगा। इसी तर्ज पर पूरे जनपद के विद्यालयों को प्रेरक विद्यालय के रूप में तैयार किया जाएगा।
यही नहीं, सरकार की ओर से निर्धारित तीसरी संस्था प्ररेक विद्यालयों के बच्चों की दक्षता की जांच करेगी। संस्था की जांच में खरा उतरने के बाद उसे प्ररेक विद्यालय व जनपद का खिताब दिया जाएगा। इसके अलावा यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्ररेक शिक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों की भाषा व गणित में दक्षता बढ़ाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रेरणा ज्ञानोत्सव अभियान की शुरूआत की गई है। बच्चों को आधारभूत लर्निंग कौशल बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। कक्षा एक से तीन तक छात्रों की दक्षता की पहचान 14 बिन्दुओं पर की जाएगी जबकि कक्षा 4 व 5 के छात्रों की दक्षता की पहचान 16 बिन्दुओं पर होगी। इन बिन्दुओं के हिसाब से शिक्षकों को छात्रों को तैयार करना होगा।
स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के छात्रों की क्षमताओं का आंकलन केवल हिंदी और गणित विषय में ही किया जाएगा। इन दो विषयों में छात्रों के लिए कुछ शब्द पहचानने तथा कुछ प्रश्न हल करने के लिए दिए जाएंगे। अगर वह अपनी कक्षा के अनुसार इन्हें बता लेते हैं तो ठीक है नहीं तो उनकी रेमेडियल कराई जाएगी।
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कक्षा एक से पांच तक के लिए सुबह के 15 मिनट प्रार्थना व उपस्थिति दर्ज करने के लिए और आधे घंटे मिड डे मील के लिए दिए जाएंगे। शिक्षकों का विभाजन विषय विशेषज्ञता के आधार पर न करके कक्षानुसार किया जाएगा। विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम प्राप्त कराने की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक की होगी।
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सभी कक्षाओं की समय सारिणी में पुस्तकालय को विशेष तरजीह दी गई है। अंग्रेजी, गणित, हिंदी, पर्यावरण विज्ञान, खेल, चित्रकला, नाटक, संगीत, संस्कृत आदि के पीरियड का निर्धारण कर दिया गया है।
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गर्मियों में आठ से दो और सर्दियों में नौ से तीन बजे तक स्कूल का समय होगा। छोटी कक्षाओं में एक विषय के लिए दो घंटे का एक पीरियड होगा तो कक्षा पांच में आधे घंटे का। कक्षा एक व दो में ऐसे शिक्षकों को पढ़ाने के लिए भेजा जाए जो सबसे कर्मठ, लगनशील व उत्साही हों।
पढ़ाई में टीएलएम का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाए। गतिविधि आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाए। शिक्षक आंकलन पत्र के जरिएइन बच्चों का परीक्षण करेंगे। पता करेंगे कि कोविड काल में उन्होंने कितना सीखा, कितना छोड़ा। फिर इसके आधार पर उनकी रिमेडियल पढ़ाई होगी। सभी प्राइमरी स्कूलों में रोजाना 40 मिनट की रिमेडियल चलाई जाएगी।
प्राथमिक विद्यालय के छात्रों की दक्षता बढ़ाने के लिए योगी सरकार का प्रेरक मिशन 6 महीने में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर को बदल देगा। पहले एक प्ररेक विद्यालय बनाया जाएगा। इसी तर्ज पर पूरे जनपद के विद्यालयों को प्रेरक विद्यालय के रूप में तैयार किया जाएगा।
यही नहीं, सरकार की ओर से निर्धारित तीसरी संस्था प्ररेक विद्यालयों के बच्चों की दक्षता की जांच करेगी। संस्था की जांच में खरा उतरने के बाद उसे प्ररेक विद्यालय व जनपद का खिताब दिया जाएगा। इसके अलावा यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्ररेक शिक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों की भाषा व गणित में दक्षता बढ़ाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रेरणा ज्ञानोत्सव अभियान की शुरूआत की गई है। बच्चों को आधारभूत लर्निंग कौशल बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। कक्षा एक से तीन तक छात्रों की दक्षता की पहचान 14 बिन्दुओं पर की जाएगी जबकि कक्षा 4 व 5 के छात्रों की दक्षता की पहचान 16 बिन्दुओं पर होगी। इन बिन्दुओं के हिसाब से शिक्षकों को छात्रों को तैयार करना होगा।
स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के छात्रों की क्षमताओं का आंकलन केवल हिंदी और गणित विषय में ही किया जाएगा। इन दो विषयों में छात्रों के लिए कुछ शब्द पहचानने तथा कुछ प्रश्न हल करने के लिए दिए जाएंगे। अगर वह अपनी कक्षा के अनुसार इन्हें बता लेते हैं तो ठीक है नहीं तो उनकी रेमेडियल कराई जाएगी।