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Gonda News: नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व आज से
Mon, 04 Nov 2024 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 04 Nov 2024 11:11 PM IST
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गोंडा में पुरानी सब्जी मंडी के पास छठ पूजा को लेकर सजी दुकान। - संवाद
गोंडा। छठ महापर्व पर चार दिवसीय पूजन की शुरुआत मंगलवार से होगी। संतान की लंबी आयु व घर में समृद्धि-खुशहाली के लिए नहाय-खाय के साथ मंगलवार को अनुष्ठान शुरू होगा। शुक्रवार को सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। पूजा करने वाले सैकड़ों लोगों ने सोमवार से तैयारियां शुरू कर दी हैं। फल व अन्य पूजन सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही।
मान्यता है कि सूर्य की ऊर्जा बीमारियों को ठीक करने, समृद्धि सुनिश्चित करने और कल्याण प्रदान करने में मदद करती है। समृद्धि व खुशहाली का आशीर्वाद मांगने के लिए व्रती सूर्य और छठी मैया की पूजा-अर्चना करते हैं। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय से व्रत शुरू होगा। इस दिन घर की साफ-सफाई की जाती है। व्रती स्नान कर शुद्ध व सात्विक भोजन ग्रहण करेंगे। लौकी की सब्जी, रोटी, मूली आदि का सेवन करेंगे। नहाय-खाय को ही छठ पूजा की शुरुआत का प्रतीक माना गया है। दूसरे दिन बुधवार को खरना होगा। इस दिन व्रती दिनभर में केवल रात में ही अपने घर में मिट्टी के बने चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर गुड़ व चावल से बनी खीर खाएंगे। परिवार के लोग भी इसी महाप्रसाद को ग्रहण करेंगे। पूरे दिन व रात में नमक नहीं खाएंगे। तीसरे दिन बृहस्पतिवार को भोर से ही पूजा में इस्तेमाल होने वाले सामग्री बनाई जाएगी। पांच तरह के फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, देसी घी में बनी पूरी, चना को टोकरी में रखकर व्रती शाम को तालाब व नदी के तट पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। फिर अंतिम दिन शुक्रवार को तालाब व पोखरे के पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगे।
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मान्यता है कि सूर्य की ऊर्जा बीमारियों को ठीक करने, समृद्धि सुनिश्चित करने और कल्याण प्रदान करने में मदद करती है। समृद्धि व खुशहाली का आशीर्वाद मांगने के लिए व्रती सूर्य और छठी मैया की पूजा-अर्चना करते हैं। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय से व्रत शुरू होगा। इस दिन घर की साफ-सफाई की जाती है। व्रती स्नान कर शुद्ध व सात्विक भोजन ग्रहण करेंगे। लौकी की सब्जी, रोटी, मूली आदि का सेवन करेंगे। नहाय-खाय को ही छठ पूजा की शुरुआत का प्रतीक माना गया है। दूसरे दिन बुधवार को खरना होगा। इस दिन व्रती दिनभर में केवल रात में ही अपने घर में मिट्टी के बने चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर गुड़ व चावल से बनी खीर खाएंगे। परिवार के लोग भी इसी महाप्रसाद को ग्रहण करेंगे। पूरे दिन व रात में नमक नहीं खाएंगे। तीसरे दिन बृहस्पतिवार को भोर से ही पूजा में इस्तेमाल होने वाले सामग्री बनाई जाएगी। पांच तरह के फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, देसी घी में बनी पूरी, चना को टोकरी में रखकर व्रती शाम को तालाब व नदी के तट पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। फिर अंतिम दिन शुक्रवार को तालाब व पोखरे के पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगे।
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