फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   cane

बकाएदार मिल को गन्ना बेचने के दबाव से दुखी किसानों ने फूंका गन्ना

Thu, 09 Dec 2021 11:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 11:18 PM IST
विज्ञापन
cane
- गोंडा के करनैलगंज तहसील में खेत में जला गन्ना - फोटो : GONDA
गोंडा। जिस बजाज चीनी मिल ने बीते सालों से किसानों को गन्ना का भुगतान नहीं दिया, उसी को फिर गन्ना बेचने के दबाव को किसान नहीं झेल पा रहे हैं। बिना भुगतान के गन्ना बेचने से अच्छा किसानों से उसे खेत में ही फूंक कर दूसरी फसल की तैयारी करना उचित समझा। ऐसा ही कुछ करनैलगंज तहसील के नरायनपुर जय सिंह ब्लाक परसपुर में दो किसानों ने किया। गन्ना मैजापुर या हैदरगढ़ चीनी मिल को बेचने का मौका मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसानों के क्षेत्र से करीब 50 किलोमीटर बजाज चीनी मिल को गन्ना आरक्षण करते समय दे दिया गया। जब किसानों को पता चला कि फिर से उनके क्षेत्र का गन्ना बजाज चीनी मिल ही खरीदेगी तो उनका सब्र जवाब दे गया। किसानों ने खेत में खड़ा गन्ना फूंक दिया।
विज्ञापन

किसान समस्याएं दूर नहीं हो रही हैं। परसपुर के नरायनपुर जयसिंह गांव में दो किसानों ने अपना गन्ना खेत में ही फूंक दिया है। किसानों का आरोप है कि जिस चीनी मिल ने बीते साल गन्ना लेने के बाद भी भुगतान नहीं दिया। उसी को फिर से गन्ना का क्षेत्र आवंटित कर दिया गया। अब गन्ना बेचना बेकार ही है, भुगतान तो होना नहीं है। ऐसे में गन्ना फूंक कर खेत खाली किया गया है। गांव के गन्ना किसान हरिश्चंद्र लोनिया ने पांच बीघे गन्ना बोया था। गन्ना बेेचने के लिए बजाज चीनी मिल का नाम सुनते ही आपा खो बैठे। हर साल मिल गन्ना ले लेती है, लेकिन भुगतान नहीं करती है। फिर उसी मिल को गन्ना बेचना होगा। इसी तरह गांव के रामनरायन सिंह ने भी छह बीघे गन्ना बोया था। वह भी बजाज चीनी मिल को गन्ना नहीं देना चाहते हैं। उन्होंने भी अपना गन्ना फूंक कर राहत की सांस ली। क्षेत्र में दो किसानों की ओर से करीब 11 बीघे गन्ना फूंक दिये जाने के मामले की खासी चर्चा है। इसे क्षेत्र आवंटन में की गई अनदेखी से जोड़कर देखा जा रहा है।
विज्ञापन

172 करोड़ बाकी है मिल, नहीं हो रहा है भुगतान
बजाज चीनी मिल दो सालों से किसानों से खरीदे गये गन्ना मूल्य का भुगतान सही ढंग से नही कर पा रही है। करीब 172 करोड़ का बकाया है, जो किसानों को मिलना चाहिए। मिल के दावों पर यकीन करें तो सरकार ने बीते सालों में खरीद बिजली का भुगतान नहीं किया है। बिजली का भुगतान न होने से किसानों को भुगतान देने में दिक्कत होने की बात कही जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्हें किसी मामले से मतलब नहीं है। उन लोगों ने मिल को गन्ना दिया है और पेराई हुई है। उन्हें भुगतान होना चाहिए, प्रशासन की भूमिका से किसान दुखी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसानों के साथ अन्याय कर रही है सरकार: पूर्व मंत्री
करनैलगंज में किसानों के गन्ना फूंके जाने पर पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। किसानों को जिस मिल ने भुगतान नही दिया, उन्हें उसी मिल में फिर से गन्ना बेंचने के लिए मजबूर किया जाना उचित नही है। उन्होने कहा कि एक नेता ने पैरवी करके परसपुर क्षेत्र के किसानों का गन्ना खरीद का केंद्र बजाज को आवंटित करा दिया है। ऐसा करने से पहले भाजपा के लोगों को किसानों के दर्द को समझना चाहिए था। उन्होने कहा कि किसानों को मजबूर होकर अपना गन्ना खेत में ही फूंकना पड़ रहा है। इसकी भरपाई सरकार करे और किसानों को दूसरे मिलों को गन्ना बेंचने की छूट दे। यदि छूट नही दे सकती है तो भुगतान कराए।
किसानों के गन्ना फूंके जाने की जानकारी अभी नही हुई है। किसानों के बकाये के भुगतान के लिए कार्रवाई की जा रही है। - ओपी सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed