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जिले के सवा तीन लाख बच्चों की लंबाई पर ब्रेक

Mon, 27 Jan 2020 10:24 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jan 2020 10:24 PM IST
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Break on length of 1.5 lakh children up to five years
गोंडा। आईसीडीएस एवं पोषण अभियान के तहत सामुदायिक स्तर पर सरकार की ओर से बच्चों कुपोषण मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन बच्चों के रैपिड सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये हैं। यहां शून्य से पांच साल तक के सवा 3 लाख बच्चों की लंबाई पर ब्रेक लग गया है। डीपीओ मनोज कुमार ने कहा कि पोषण अभियान का उद्देश्य सरल एवं सफल दृष्टिकोण को अपनाते हुए बेहतर तालमेल से कुपोषण की दर में कमी लाना है। पोषण अभियान का लक्ष्य वर्ष 2022 तक 0-6 वर्ष तक के आयु वाले बच्चों में व्याप्त नाटेपन को 38.4 प्रतिशत से 25 प्रतिशत लाना है।बता दें कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार, जिले में 5 वर्ष तक के 56.9 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनकी लंबाई, उनकी आयु के अनुपात में कम है। 9.8 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में कम है। वहीं 38.6 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी आयु के अनुपात में कम है। इतना ही नहीं 5 वर्ष तक के 72.6 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी पायी गयी 7
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दो दिवसीय कार्यशाला हुई
सरकार की सेवाओं में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने के उद्देश्य से दो दिवसीय सहयोगात्मक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन सीएमओ कार्यालय के सभागर में किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए डीपीओ मनोज कुमार ने बताया कि निरीक्षण के स्थान पर सहयोगात्मक पर्यवेक्षण को लागू करने के लिए पर्यवेक्षण चेकलिस्ट जारी की गयी है। जिसको मुख्य सेविका एवं अधिकारियों द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान उपयोग किया जाना है।
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50 प्रतिशत बच्चे अविकसित
साल 2013-14 के रैपिड सर्वे के आंकड़े बतातें हैं कि सही खान-पान के अभाव में 50.4 प्रतिशत बच्चे अविकिसित, 10 प्रतिशत कमजोर व 34.6 प्रतिशत बच्चे कम वजन के रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान की सफलता आंगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों की ओर से लाभार्थियों को प्रभावी तरीके से सेवाओं को प्रदान करने तथा लाभार्थियों को सही पोषण संदेशों को अपनाने में सहायता करने पर ही निर्भर करता है।
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कुपोषण के चलते हो रहा नाटापन
सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने कहा कि जब कम उम्र में लड़कियों की शादी होती है तो उनसे पैदा होने वाले बच्चे भी अक्सर कुपोषित रहते हैं। ज्यादा बच्चे होना, बच्चों में कम अंतर होना भी कारण हैं। जागरूकता के कारण महिलाएं अपने शिशुओं को स्तनपान सही से नहीं कराती। छह महीने तक के शिशु को सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए. लेकिन उसे भी कई बार आहार दे दिया जाता है. साथ ही फॉर्मूला मिल्क या गाय का मिल्क भी दे देते हैं। जबकि छह माह के बाद मां के दूध के साथ पूरक आहार देना चाहिए जिसे अक्सर ही काफी कम दिया जाता है। पौष्टिक आहार न मिलने से बच्चों की लंबाई कम रह जाती है।

बच्चों को पोषण तत्व की आवश्यकता
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि जो बच्चे अच्छे पोषण की स्थिति में होंगे वो ही आगे चलकर मानसिक और शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत होंगे। समाज में उनका योगदान बेहतर होगा। ऐसा होने पर ही वो गरीबी के कुचक्र से भी बाहर निकल सकते हैं।
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