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छह लाख को बूस्टर डोज की दरकार, निजी अस्पताल कर रहे इंकार
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गोंडा। हेलो सर हमें विदेश जाना है बूस्टर डोज कहां लगेगी। सीएमओ व वैक्सीन इंचार्ज के पास हर दिन इस तरह की फोन कॉल आ रही हैं। किसी को विदेश जाने के लिए बूस्टर डोज की दरकार है तो किसी की कंपनी ने कर्मचारियों के लिए वैक्सीन की तीसरी डोज लगवानी अनिवार्य कर दी है। जिले में 60 साल से कम उम्र वालों के लिए बूस्टर डोज की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी अस्पतालों को युवाओं के लिए बूस्टर डोज मिली नहीं। जबकि निजी अस्पतालों ने वैक्सीन खरीदने से हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में 60 साल से कम उम्र वाले करीब छह लाख लोगों को बूस्टर डोज के लिए भटकना पड़ रहा है।
जिले में कोरोना संक्रमण की संभावित चौथी लहर से बचाव की राह कठिन दिख रही है। सरकार ने 10 अप्रैल से 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों के लिए भी बूस्टर डोज दिए जाने की घोषणा कर दी लेकिन सरकारी फरमान का असर जिले तक नहीं पहुंच पाया। जिले में 60 साल से कम उम्र वाले करीब छह लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगे नौ महीने पूरे हो गए।
अब उन्हें वैक्सीन की तीसरी खुराक यानी की बूस्टर डोज की दरकार है। सरकारी आदेशानुसार 60 साल से कम आयु वालों को बूस्टर डोज फ्री न देकर निजी अस्पतालों के माध्यम से 387 रुपये चुकाकर लगवानी थी, मगर जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों ने बूस्टर डोज लगाने में सहयोग देने से इंकार किया है। वह अपने अस्पताल में इसका सेंटर बनाने को अब तक तैयार नहीं हुए हैं, जबकि उनको इसका शुल्क मिलेगा।
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पढ़ाई, नौकरी या पर्यटन के लिए विदेश जाने वालों को कोरोनारोधी वैक्सीन के तीसरी खुराक की जरूरत पड़ रही है। कई देशों में बिना बूस्टर डोज के प्रवेश की अनुमति नहीं है। वहीं, कुछ निजी कंपनियों ने अपने स्टाफ के लिए तीसरी डोज लगवानी अनिवार्य कर दी है। ऐसे में बूस्टर डोज लगवाने के लिए परेशान लोग सीएमओ डॉ. राधेश्याम केसरी व वैक्सीन इंचार्ज अरविंद कुमार को फोन कर रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि कई बार निजी अस्पतालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज खरीदकर लगाने की शुरुआत करने का निर्देश दिया गया, लेकिन किसी ने अभी तक बूस्टर डोज की वैक्सीन नहीं खरीदी।
एक तरफ जहां युवा वर्ग पैसे खर्च करके बूस्टर डोज लगवाने के लिए उतावला है तो वहीं 60 साल से अधिक उम्र वाले लोग मुफ्त में भी बूस्टर डोज लगवाने को तैयार नहीं हैं। जिले के तीन 3,32,836 बुजुर्गों के दूसरी खुराक लिए नौ महीने पूरे हो गए हैं। इनमें से अभी तक मात्र 36,549 लोगों ने ही बूस्टर डोज लगवायी है।
एक निजी अस्पताल के संचालक की मानें तो वायल खराब होने के डर से निजी अस्पताल बूस्टर डोज खरीदने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। बताया कि पांच एमएल की एक वायल में दस डोज होती हैं। वायल खोलने पर 10 लोगों को टीका लगाया जा सकता है। अगर 10 लोग एक समय पर न मिलें तो चार घंटे में खुली हुई वायल खराब हो जाएगी। इससे करीब 2,270 रुपये का नुकसान होगा।
एसीएमओ डॉ एपी सिंह ने बताया कि जिले के सभी बड़े निजी अस्पतालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज खरीदने व टीकाकरण सत्र चलाने का निर्देेश दिया गया है, लेकिन किसी भी अस्पताल ने बूस्टर डोज लगानी शुरू नहीं की है। अब जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इन मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।
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जिले में कोरोना संक्रमण की संभावित चौथी लहर से बचाव की राह कठिन दिख रही है। सरकार ने 10 अप्रैल से 18 साल से अधिक आयु वाले लोगों के लिए भी बूस्टर डोज दिए जाने की घोषणा कर दी लेकिन सरकारी फरमान का असर जिले तक नहीं पहुंच पाया। जिले में 60 साल से कम उम्र वाले करीब छह लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगे नौ महीने पूरे हो गए।
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अब उन्हें वैक्सीन की तीसरी खुराक यानी की बूस्टर डोज की दरकार है। सरकारी आदेशानुसार 60 साल से कम आयु वालों को बूस्टर डोज फ्री न देकर निजी अस्पतालों के माध्यम से 387 रुपये चुकाकर लगवानी थी, मगर जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों ने बूस्टर डोज लगाने में सहयोग देने से इंकार किया है। वह अपने अस्पताल में इसका सेंटर बनाने को अब तक तैयार नहीं हुए हैं, जबकि उनको इसका शुल्क मिलेगा।
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पढ़ाई, नौकरी या पर्यटन के लिए विदेश जाने वालों को कोरोनारोधी वैक्सीन के तीसरी खुराक की जरूरत पड़ रही है। कई देशों में बिना बूस्टर डोज के प्रवेश की अनुमति नहीं है। वहीं, कुछ निजी कंपनियों ने अपने स्टाफ के लिए तीसरी डोज लगवानी अनिवार्य कर दी है। ऐसे में बूस्टर डोज लगवाने के लिए परेशान लोग सीएमओ डॉ. राधेश्याम केसरी व वैक्सीन इंचार्ज अरविंद कुमार को फोन कर रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि कई बार निजी अस्पतालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज खरीदकर लगाने की शुरुआत करने का निर्देश दिया गया, लेकिन किसी ने अभी तक बूस्टर डोज की वैक्सीन नहीं खरीदी।
एक तरफ जहां युवा वर्ग पैसे खर्च करके बूस्टर डोज लगवाने के लिए उतावला है तो वहीं 60 साल से अधिक उम्र वाले लोग मुफ्त में भी बूस्टर डोज लगवाने को तैयार नहीं हैं। जिले के तीन 3,32,836 बुजुर्गों के दूसरी खुराक लिए नौ महीने पूरे हो गए हैं। इनमें से अभी तक मात्र 36,549 लोगों ने ही बूस्टर डोज लगवायी है।
एक निजी अस्पताल के संचालक की मानें तो वायल खराब होने के डर से निजी अस्पताल बूस्टर डोज खरीदने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। बताया कि पांच एमएल की एक वायल में दस डोज होती हैं। वायल खोलने पर 10 लोगों को टीका लगाया जा सकता है। अगर 10 लोग एक समय पर न मिलें तो चार घंटे में खुली हुई वायल खराब हो जाएगी। इससे करीब 2,270 रुपये का नुकसान होगा।
एसीएमओ डॉ एपी सिंह ने बताया कि जिले के सभी बड़े निजी अस्पतालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज खरीदने व टीकाकरण सत्र चलाने का निर्देेश दिया गया है, लेकिन किसी भी अस्पताल ने बूस्टर डोज लगानी शुरू नहीं की है। अब जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इन मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।