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Gonda News: धोखाधड़ी व गबन में फंसे पूर्व सांसद बिन्नू पांडेय को बड़ी राहत
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गोंडा। चिकित्सक के साथ छलकपट, धोखाधड़ी और 25 लाख रुपये गबन मामले में फंसे सपा नेता व श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व सांसद डाॅ. विनय कुमार उर्फ बिन्नू पांडेय को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के आदेश पर एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी है।
जालौन जिले के सिविल लाइंस निवासी डाॅ. उमाशंकर सोनी ने साल 2022 में पूर्व सांसद डाॅ. विनय कुमार उर्फ बिन्नू पांडेय के खिलाफ नगर कोतवाली में धोखाधड़ी और गबन का केस दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि पूर्व सांसद ने खनन के कारोबार में साझेदार बनाने के नाम पर उनसे बैंक खाते के माध्यम से 25 लाख रुपये ले लिए। इसके बाद कूटरचना कर सौ रुपये के स्टांप पर महीप ओझा के नाम से एक एमओयू तैयार कराकर 35 प्रतिशत का साझेदार बताया, लेकिन उन्हें न तो काम में साझेदार के रूप में शामिल किया और न ही रकम लौटाई।
पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और अपराध के पुख्ता साक्ष्य मिलने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। लेकिन पूर्व सांसद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर आरोप पत्र निरस्त कर मुकदमा समाप्त करने की याचना की।
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इस बीच दोनों पक्षों ने आपस में सुलह-समझौता कर लिया। बीते 23 जनवरी को याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने केस समाप्त करने का आदेश दिया। जिसके अनुपालन में एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम अपेक्षा सिंह ने मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी है।
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जालौन जिले के सिविल लाइंस निवासी डाॅ. उमाशंकर सोनी ने साल 2022 में पूर्व सांसद डाॅ. विनय कुमार उर्फ बिन्नू पांडेय के खिलाफ नगर कोतवाली में धोखाधड़ी और गबन का केस दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि पूर्व सांसद ने खनन के कारोबार में साझेदार बनाने के नाम पर उनसे बैंक खाते के माध्यम से 25 लाख रुपये ले लिए। इसके बाद कूटरचना कर सौ रुपये के स्टांप पर महीप ओझा के नाम से एक एमओयू तैयार कराकर 35 प्रतिशत का साझेदार बताया, लेकिन उन्हें न तो काम में साझेदार के रूप में शामिल किया और न ही रकम लौटाई।
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पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना की और अपराध के पुख्ता साक्ष्य मिलने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। लेकिन पूर्व सांसद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर आरोप पत्र निरस्त कर मुकदमा समाप्त करने की याचना की।
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इस बीच दोनों पक्षों ने आपस में सुलह-समझौता कर लिया। बीते 23 जनवरी को याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने केस समाप्त करने का आदेश दिया। जिसके अनुपालन में एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम अपेक्षा सिंह ने मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी है।