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शिक्षकों को बीमा पॉलिसी बेचने वाला बीईओ निलंबित
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गोंडा। जिले में तैनाती के समय शिक्षक-शिक्षिकाओं पर दबाव बनाकर बीमा पॉलिसी कराने के आरोप में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी राम प्रताप सिंह निलंबित कर दिए गये हैं। जबरन बीमा पॉलिसी कराने के आरोपों पर बीते 21 मार्च को शासन ने सहायक शिक्षा निदेशक अयोध्या व देवीपाटन मंडल को संयुक्त जांच सौंपी थी। जांच रिपोर्ट बीते दिनों अयोध्या के सहायक शिक्षा निदेशक राम सागर त्रिपाठी ने शासन को भेजी थी। इस पर शुक्रवार देर शाम शासन ने खंड शिक्षा अधिकारी राम प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया है। मौजूदा समय में बाराबंकी के मसौली ब्लॉक में उनकी तैनाती है।
जिले के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी राम प्रताप सिंह पर आरोप था कि वह अपनी तैनाती वाले ब्लॉकों के शिक्षकों को डरा-धमकाकर उनसे बीमा पॉलिसी कराते थे। मामले की जांच में सामने आया कि उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं को डरा-धमकाकर 1,992 बीमा पॉलिसियां करके कमीशन के रूप में लाखों रुपये कमाए हैं। वर्तमान में वह बाराबंकी के मसौली ब्लॉक में तैनात हैं।
एडी बेसिक, अयोध्या मंडल की जांच में सामने आया कि राम प्रताप सिंह पर लगे आरोप सही हैं। राम प्रताप सिंह अपनी पत्नी के नाम से बीमा कंपनी की एजेंसी चलाकर शिक्षक-शिक्षिकाओं की जबरन पॉलिसी करते थे। वर्ष 2000 से 2020 तक उन्होंने कुल 1,992 बीमा पॉलिसी कीं। मार्च में राम प्रताप सिंह पर लगे आरोपों की जांच अयोध्या और देवीपाटन मंडल के एडी बेसिक को सौंपी गई थी।
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जांच में पाया गया कि कानूनी रूप से सुरक्षित रहने के लिए राम प्रताप सिंह ने पत्नी को तलाक दे रखा था, लेकिन हकीकत में वह पत्नी के साथ ही रहकर बीमा एजेंसी संचालित कर रहे हैं। विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान वह शिक्षक-शिक्षिकाओं को डर दिखाकर पॉलिसी कराते रहे, जिससे उन्हें लाखों रुपये कमीशन के रूप में हर महीने मिलते थे।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राम प्रताप सिंह स्वयं बीमा एजेंट की तरह ब्लॉक में तैनात परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों व शिक्षिकाओं पर बीमा पॉलिसी खरीदने के लिए दबाव बनाते थे। जिन शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने उनसे बीमा पॉलिसी कराई थी, वह उन्हें कई तरह की छूट देते थे और जिन्होंने पॉलिसी नहीं कराई उनका शोषण करते थे। इतना ही नहीं, राम प्रताप सिंह पर बीआरसी भवन करनैलगंज के रखरखराव में भी वित्तीय अनियमितता और शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कराए बिना वेतन भुगतान कराने के भी आरोप लगे हैं।
बीईओ राम प्रताप सिंह पर पूर्व में बहराइच में तैनाती के दौरान जरवल ब्लॉक की शिक्षिकाओं ने भी जबरन बीमा पॉलिसी कराने के आरोप लगाए थे। जिसकी जांच देवीपाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक ने की थी। मगर जांच में शिक्षिकाओं ने पूरे साक्ष्य नहीं दिए थे।
यही नहीं, गोंडा के करनैलगंज ब्लॉक के शिक्षकों ने जांच के समय बीमा के लिए दबाव बनाने के आरोपों से इनकार कर दिया था। ऐसे में जांच पूरी ही नहीं हो सकी थी। अब शासन ने नए सिरे से जांच के आदेश दिए। इस पर मार्च माह में अयोध्या व देवीपाटन मंडल के अधिकारियों को जांच सौंपी गई थी। विभाग की मानें तो राम प्रताप सिंह साल 2017 से पहले बहराइच के जरवल ब्लॉक में तैनात थे। उससे पहले बाराबंकी जिले में तैनात थे। इससे गोंडा के साथ ही इन दोनों जिलों में कराई गई बीमा पॉलिसियों को भी जांच में शामिल किया गया।
बीईओ राम प्रताप सिंह गोंडा में तैनाती से पहले लखनऊ, बाराबंकी और बहराइच में तैनात रह चुके हैं। जिले में तैनाती के समय वह बीएसए का प्रभार भी देख चुके हैं। गोंडा में सबसे पहले उनकी तैनाती परसपुर ब्लॉक में हुई थी। इसके बाद उन्हें करनैलगंज ब्लॉक का प्रभार मिला। जहां वह लंबे समय तक तैनात रहे। यहां शिक्षक संगठन की ओर से शिकायत की गई, लेकिन उस समय अधिकतर शिक्षक बीईओ के पक्ष में ही रहे। बाद में वह कटरा बाजार ब्लॉक के बीईओ रहे। विधानसभा चुनाव के दौरान बीएसए का प्रभार देख रहे थे। उसी समय बाराबंकी तबादला हो गया था और चुनाव बाद कार्यमुक्त हुए थे।
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जिले के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी राम प्रताप सिंह पर आरोप था कि वह अपनी तैनाती वाले ब्लॉकों के शिक्षकों को डरा-धमकाकर उनसे बीमा पॉलिसी कराते थे। मामले की जांच में सामने आया कि उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं को डरा-धमकाकर 1,992 बीमा पॉलिसियां करके कमीशन के रूप में लाखों रुपये कमाए हैं। वर्तमान में वह बाराबंकी के मसौली ब्लॉक में तैनात हैं।
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एडी बेसिक, अयोध्या मंडल की जांच में सामने आया कि राम प्रताप सिंह पर लगे आरोप सही हैं। राम प्रताप सिंह अपनी पत्नी के नाम से बीमा कंपनी की एजेंसी चलाकर शिक्षक-शिक्षिकाओं की जबरन पॉलिसी करते थे। वर्ष 2000 से 2020 तक उन्होंने कुल 1,992 बीमा पॉलिसी कीं। मार्च में राम प्रताप सिंह पर लगे आरोपों की जांच अयोध्या और देवीपाटन मंडल के एडी बेसिक को सौंपी गई थी।
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जांच में पाया गया कि कानूनी रूप से सुरक्षित रहने के लिए राम प्रताप सिंह ने पत्नी को तलाक दे रखा था, लेकिन हकीकत में वह पत्नी के साथ ही रहकर बीमा एजेंसी संचालित कर रहे हैं। विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान वह शिक्षक-शिक्षिकाओं को डर दिखाकर पॉलिसी कराते रहे, जिससे उन्हें लाखों रुपये कमीशन के रूप में हर महीने मिलते थे।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राम प्रताप सिंह स्वयं बीमा एजेंट की तरह ब्लॉक में तैनात परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों व शिक्षिकाओं पर बीमा पॉलिसी खरीदने के लिए दबाव बनाते थे। जिन शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने उनसे बीमा पॉलिसी कराई थी, वह उन्हें कई तरह की छूट देते थे और जिन्होंने पॉलिसी नहीं कराई उनका शोषण करते थे। इतना ही नहीं, राम प्रताप सिंह पर बीआरसी भवन करनैलगंज के रखरखराव में भी वित्तीय अनियमितता और शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कराए बिना वेतन भुगतान कराने के भी आरोप लगे हैं।
बीईओ राम प्रताप सिंह पर पूर्व में बहराइच में तैनाती के दौरान जरवल ब्लॉक की शिक्षिकाओं ने भी जबरन बीमा पॉलिसी कराने के आरोप लगाए थे। जिसकी जांच देवीपाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक ने की थी। मगर जांच में शिक्षिकाओं ने पूरे साक्ष्य नहीं दिए थे।
यही नहीं, गोंडा के करनैलगंज ब्लॉक के शिक्षकों ने जांच के समय बीमा के लिए दबाव बनाने के आरोपों से इनकार कर दिया था। ऐसे में जांच पूरी ही नहीं हो सकी थी। अब शासन ने नए सिरे से जांच के आदेश दिए। इस पर मार्च माह में अयोध्या व देवीपाटन मंडल के अधिकारियों को जांच सौंपी गई थी। विभाग की मानें तो राम प्रताप सिंह साल 2017 से पहले बहराइच के जरवल ब्लॉक में तैनात थे। उससे पहले बाराबंकी जिले में तैनात थे। इससे गोंडा के साथ ही इन दोनों जिलों में कराई गई बीमा पॉलिसियों को भी जांच में शामिल किया गया।
बीईओ राम प्रताप सिंह गोंडा में तैनाती से पहले लखनऊ, बाराबंकी और बहराइच में तैनात रह चुके हैं। जिले में तैनाती के समय वह बीएसए का प्रभार भी देख चुके हैं। गोंडा में सबसे पहले उनकी तैनाती परसपुर ब्लॉक में हुई थी। इसके बाद उन्हें करनैलगंज ब्लॉक का प्रभार मिला। जहां वह लंबे समय तक तैनात रहे। यहां शिक्षक संगठन की ओर से शिकायत की गई, लेकिन उस समय अधिकतर शिक्षक बीईओ के पक्ष में ही रहे। बाद में वह कटरा बाजार ब्लॉक के बीईओ रहे। विधानसभा चुनाव के दौरान बीएसए का प्रभार देख रहे थे। उसी समय बाराबंकी तबादला हो गया था और चुनाव बाद कार्यमुक्त हुए थे।