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साहित्यिक संस्था बज्मे ने शामे गजल से बांधी शमा
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गोंडा। साहित्यिक संस्था बज्में शामें गजल का वार्षिक तरही मुसालमा नगर के कसगरान मोहल्ले में स्थित बाबा शहीद मर्द मजार पर आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रख्यात शायर रहबर ताबानी दरियावादी ने की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वसी जौनपुरी लखनऊ रहे। संचालन याक़ूब सिद्दीकी व शरफ़ उतरौलवी ने किया। हाफिज खुर्शीद की तिलावत और हाफ़िज शमीम की नात से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। महामंत्री मुजीब सिद्दीकी ने स्वागत वक्तव्य दिया। प्रतिनिधि चेयरमैन शमीम अख़्तर अच्छन ने बैत के फजाएल बयान करते हुए बज्म की सराहना की।
संस्था अध्यक्ष हाजी शब्बीर शबनम ने इस मनकबती मुशायरे पर खुशी का इजहार किया। वरिष्ठ साहित्यकार गणेश तिवारी नेश ने हजरत मुश्लिम और उनके बच्चों की शहादत और कूफा वालों की बेवफ़ाई का जिक्र किया।
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मुख्य वक्ता मौलाना नुरुन्नबी आजमी ने अपने ख़िताब में हजरत हसन व हजरत हुसैन की सख़ावत और हुजूर की इन से मुहब्बत पर रौशनी डाली। शायरों ने कलमा पेश किया। अध्यक्षता कर रहे रहबर ताबानी ने कर्बला पर कहा जां बक्श वो सहरा है दिलकश वो बयाबां है उस का हमें हर गोशा फिरदौस बदमां है।
अन्जुमन जैदी बहराइची ने हजरत अली असग़र के हवाले से कहा-कातिल की तबाही के एलान है मकत्तल में, होटों पे तबस्सुम जो बे शीर के रक्सां है। वीरेंद्र तिवारी बेतुक ने पढ़ा-ठुकराई हुकूमत तक झुकने न दिया परचम, इस्लाम की हस्ती पर हसनैन का एहसां है।
अजय कुमार श्रीवास्तव ने यूं इमाम हुसैन पर कहा-शह आते जो भारत में हम सर पे बिठा लेते-हम हिन्दू हैं पर अब तक दिल में। यही अरमाँ है। साथ ही वसी जौनपुरी, मुजीब सिद्दीकी, नियाज क़मर, मौलाना उवैस कादरी, वाकिफ कस्तवी, डॉ असलम बक़ाई, मुबीन मंसूरी, ताज मु कुरबान, कौसर सलमानी, हैदर गोंडवी, सगीर सिद्दीकी, कासिम गोंडवी, याक़ूब अज्म, शरफ़ उतरौलवी, सलीम बेदिल, साबिर गुड्डू अहमद रजा, शब्बीर शाद, अवध राज वर्मा, अंजुम वारसी और राजू अंसारी ने कलाम पेश किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वसी जौनपुरी लखनऊ रहे। संचालन याक़ूब सिद्दीकी व शरफ़ उतरौलवी ने किया। हाफिज खुर्शीद की तिलावत और हाफ़िज शमीम की नात से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। महामंत्री मुजीब सिद्दीकी ने स्वागत वक्तव्य दिया। प्रतिनिधि चेयरमैन शमीम अख़्तर अच्छन ने बैत के फजाएल बयान करते हुए बज्म की सराहना की।
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संस्था अध्यक्ष हाजी शब्बीर शबनम ने इस मनकबती मुशायरे पर खुशी का इजहार किया। वरिष्ठ साहित्यकार गणेश तिवारी नेश ने हजरत मुश्लिम और उनके बच्चों की शहादत और कूफा वालों की बेवफ़ाई का जिक्र किया।
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मुख्य वक्ता मौलाना नुरुन्नबी आजमी ने अपने ख़िताब में हजरत हसन व हजरत हुसैन की सख़ावत और हुजूर की इन से मुहब्बत पर रौशनी डाली। शायरों ने कलमा पेश किया। अध्यक्षता कर रहे रहबर ताबानी ने कर्बला पर कहा जां बक्श वो सहरा है दिलकश वो बयाबां है उस का हमें हर गोशा फिरदौस बदमां है।
अन्जुमन जैदी बहराइची ने हजरत अली असग़र के हवाले से कहा-कातिल की तबाही के एलान है मकत्तल में, होटों पे तबस्सुम जो बे शीर के रक्सां है। वीरेंद्र तिवारी बेतुक ने पढ़ा-ठुकराई हुकूमत तक झुकने न दिया परचम, इस्लाम की हस्ती पर हसनैन का एहसां है।
अजय कुमार श्रीवास्तव ने यूं इमाम हुसैन पर कहा-शह आते जो भारत में हम सर पे बिठा लेते-हम हिन्दू हैं पर अब तक दिल में। यही अरमाँ है। साथ ही वसी जौनपुरी, मुजीब सिद्दीकी, नियाज क़मर, मौलाना उवैस कादरी, वाकिफ कस्तवी, डॉ असलम बक़ाई, मुबीन मंसूरी, ताज मु कुरबान, कौसर सलमानी, हैदर गोंडवी, सगीर सिद्दीकी, कासिम गोंडवी, याक़ूब अज्म, शरफ़ उतरौलवी, सलीम बेदिल, साबिर गुड्डू अहमद रजा, शब्बीर शाद, अवध राज वर्मा, अंजुम वारसी और राजू अंसारी ने कलाम पेश किया।