फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   APO terminated for attempting to embezzle 64 lakh

64 लाख के गबन की कोशिश में एपीओ की सेवा समाप्त

Tue, 06 Oct 2020 10:12 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2020 10:12 PM IST
विज्ञापन
APO terminated for attempting to embezzle 64 lakh
गोंडा। लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने और तरबगंज में बिना काम कराए ही श्रमिकों को 64 लाख 90 हजार रुपये के भुगतान की कोशिश हुई थी। ऑनलाइन मॉनीटरिंग में सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने मामले को पकड़ा और जांच के आदेश दिए थे।
विज्ञापन

जांच में पता चला कि 64 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान बिना काम कराए ही कराने की तैयारी थी। मामले में दोषी मिलने पर अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरिजेश पांडेय की सेवा समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही बीडीओ कृष्ण बहादुर सिंह के विरुद्ध कार्रवाई के लिए आयुक्त ग्राम्य विकास को संस्तुति भेजी गई है। इसके साथ ही दो कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
विज्ञापन

मनरेगा की वेबसाइट पर तीन साल के भुगतान के लिए कराए गए कार्यों की जांच को 29 अप्रैल को अधिकारी नामित हुए थे। वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 में मनरेगा की अधिकारिक वेबसाइट पर सामग्री अंश की लंबित भुगतान प्रदर्शित धनराशि की जांच हुई तो सामग्री मद में 27 अप्रैल को 74 लाख 27 हजार रुपये का बिल वाउचर फीड हुआ पाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

मामले में संदेह होने पर छानबीन शुरू हुई तो आनन-फानन में 74 लाख 27 हजार रुपये के भुगतान की फीडिंग में से 64 लाख 90 हजार रुपये की फीडिंग को डिलीट कर दिया गया। मनरेगा में बिना कार्य कराये ही सामग्री मद की धनराशि के भुगतान कराने के लिए की गई फीडिंग गंभीर मामला है। समय रहते मामला पकड़ में न आता तो बड़े पैमाने पर फर्जी भुगतान हो जाता।
सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने इस मामले में तत्कालीन बीडीओ कृष्ण कुमार सिंह, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरिजेश कुमार पांडेय, श्याम कुमार लेखाकार (प्रथम हस्ताक्षरकर्ता) व मोनू सेठ कंप्यूटर ऑपरेटर से स्पष्टीकरण तलब किया। अधिकारियों को तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। माना गया कि मनरेगा से फर्जी भुगतान कराने की साजिश के तहत फीडिंग की गई थी। जिसमें 64 लाख 90 हजार रुपये का बजट हड़पने की तैयारी थी।
इसमें दोष सिद्ध होने पर अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी गिरिजेश कुमार पांडेय की सेवा समाप्त कर उन्हें संयुक्त विकास आयुक्त को वापस कर दिया। इसके साथ ही तत्कालीन बीडीओ कृष्ण कुमार सिंह के विरुद्ध कार्रवाई के लिए ग्राम्य विकास आयुक्त को रिपोर्ट भेजी गई है। लेखाकार श्याम कुमार व कंप्यूटर ऑपरेटर मोनू सेठ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।
मस्टर रोल निकालकर दिखा दिया जाता है कार्य पूरा
मनरेगा में फर्जी भुगतान का खेल मस्टर रोल से शुरू होता है। पहले श्रमिकों के लिए परियोजना के आधार पर मस्टर रोल निकाला जाता है और फिर श्रमिकों को होने वाले भुगतान के सापेक्ष सामग्री पर भुगतान के लिए बिल वाउचर लगाए जाते हैं। इसके बाद इसे मनरेगा के वेबसाइट पर फीड करके अपलोड कर दिया जाता है। इस काम को अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी करते हैं और फिर बीडीओ की सहमति से प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। भुगतान में बीडीओ के साथ ही लेखाकार भी शामिल होते हैं। तरबगंज में 64 लाख 90 हजार रुपये के फर्जी भुगतान की तैयारी इसी तरह की गई थी।

तरबगंज ब्लॉक में बिना काम कराए भुगतान के लिए फीडिंग का मामला मई में ही पकड़ में आ गया था। भुगतान तो नहीं हो पाया था लेकिन ये काफी गंभीर हैं। इसमें जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed