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Gonda News: अनुचर ने रिसीव की थीं 299 मदरसों की फाइलें
Fri, 17 Jan 2025 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 17 Jan 2025 11:50 PM IST
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गोंडा। मदरसों के फर्जीवाड़े में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। 299 फर्जी मदरसों की जिन फाइलों को जांच एजेंसी खोज नहीं पा रही है, उन फाइलों को लेकर नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि 19 अक्तूबर 2016 को मदरसा आधुनिकीकरण योजना की 299 फाइलों को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में कार्यरत अनुचर अजहर हुसैन ने निदेशालय से रिसीव किया था। मगर संबंधित कर्मचारी का 13 सितंबर 2022 को निधन हो चुका है।
जांच से जुड़े अफसरों की मानें तो यह बात तो साफ हो गई कि कार्यालय को निदेशालय से फाइलें मिली थीं। यही नहीं, 14 दिसंबर 2023 को लिपिक शमीम अहमद को लिखे पत्र में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने कहा था कि तबादले के बाद प्रभार किस लिपिक को दिया, इस बारे में जानकारी दें। ऐसे में अभिलेख का मामला अब गले की हड्डी बन गया है। विभागीय अधिकारी सफाई पेश कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि अगर लिपिक ने चार्ज नहीं दिया तो अफसरों ने क्या प्रयास किए।
सवालों में कई अफसरों की कार्यप्रणाली
लिपिक शमीम अहमद का तबादला एटा के लिए वर्ष 2018 में हुआ। इसके बाद संबंधित ने न तो चार्ज दिया और न ही वहां का चार्ज प्राप्त किया। जांच अधिकारियों के अनुसार शमीम अहमद वर्तमान समय में निलंबित है। 2018 के बाद से जिले में छह अफसर विभाग में आ चुके हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। जांच अधिकारियों का कहना है कि अगर लिपिक ने चार्ज नहीं दिया था, तो उसी वक्त डीएम को सूचना देकर मजिस्ट्रेट नामित कराकर कार्रवाई की जाती। आलमारी का ताला तोड़कर वीडियोग्राफी कराकर रिकॉर्ड लिए जाने चाहिए, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं किया गया।
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हाई प्रोफाइल मामले के बावजूद सुस्ती
मामले की शिकायत वर्ष 2018 में सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने की थी। इस शिकायत पर छह साल तक बस जांच का खेल चलता रहा। अब जब कीर्तिवर्धन सिंह केंद्रीय मंत्री बने तो अफसरों को उनकी शिकायत याद आई। इसके बाद मुकदमा तो दर्ज कराया गया, लेकिन पांच दिन बाद भी जांच के नाम पर खामोशी है। कोई भी जांच को लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
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जांच से जुड़े अफसरों की मानें तो यह बात तो साफ हो गई कि कार्यालय को निदेशालय से फाइलें मिली थीं। यही नहीं, 14 दिसंबर 2023 को लिपिक शमीम अहमद को लिखे पत्र में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने कहा था कि तबादले के बाद प्रभार किस लिपिक को दिया, इस बारे में जानकारी दें। ऐसे में अभिलेख का मामला अब गले की हड्डी बन गया है। विभागीय अधिकारी सफाई पेश कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि अगर लिपिक ने चार्ज नहीं दिया तो अफसरों ने क्या प्रयास किए।
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सवालों में कई अफसरों की कार्यप्रणाली
लिपिक शमीम अहमद का तबादला एटा के लिए वर्ष 2018 में हुआ। इसके बाद संबंधित ने न तो चार्ज दिया और न ही वहां का चार्ज प्राप्त किया। जांच अधिकारियों के अनुसार शमीम अहमद वर्तमान समय में निलंबित है। 2018 के बाद से जिले में छह अफसर विभाग में आ चुके हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। जांच अधिकारियों का कहना है कि अगर लिपिक ने चार्ज नहीं दिया था, तो उसी वक्त डीएम को सूचना देकर मजिस्ट्रेट नामित कराकर कार्रवाई की जाती। आलमारी का ताला तोड़कर वीडियोग्राफी कराकर रिकॉर्ड लिए जाने चाहिए, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं किया गया।
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हाई प्रोफाइल मामले के बावजूद सुस्ती
मामले की शिकायत वर्ष 2018 में सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने की थी। इस शिकायत पर छह साल तक बस जांच का खेल चलता रहा। अब जब कीर्तिवर्धन सिंह केंद्रीय मंत्री बने तो अफसरों को उनकी शिकायत याद आई। इसके बाद मुकदमा तो दर्ज कराया गया, लेकिन पांच दिन बाद भी जांच के नाम पर खामोशी है। कोई भी जांच को लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।