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Gonda News: बृजभूषण की शिकायत करने वाले राजाराम सिंह गुमनान
Fri, 04 Aug 2023 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 04 Aug 2023 11:26 PM IST
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गोंडा। महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों की चर्चा अभी थमी नहीं थी कि बालू के अवैध खनन के आरोप से एक बार फिर कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार तो एनजीटी में पत्र याचिका दायर करने वाले राजाराम सिंह रहस्य ही बने हुए हैं। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। हालांकि एनजीटी को रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए पत्र पर गुप्तार घाट, अयोध्या पता लिखा है।
एनजीटी में पत्र याचिका के माध्यम से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाले राजाराम सिंह कौन हैं? ये बड़ा सवाल है क्योंकि एनजीटी के इस आदेश में शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। विधि विशेषज्ञ केके मिश्र की मानें तो पत्र याचिका में याची द्वारा रजिस्टर्ड डाक में भेजी गई शिकायत को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता। न्यायिक पीठ सुरक्षा की दृष्टि से उसे गोपनीय रख सकती है। बृजभूषण के सियासी और अन्य विरोधियों में भी राजाराम का नाम अब तक चर्चा में नहीं आया है। इसके चलते राजाराम सिंह कौन है? ये अभी रहस्य बना हुआ है।
सांसद प्रतिनिधि संजीव सिंह का कहना है कि एनजीटी ने बगैर वास्तविक पहचान के यदि आदेश पास किया है तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई गाइडलाइन के विपरीत है। शिकायत सही या झूठी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। अब जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शिकायतकर्ता को सामने लाया जाए।
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एनजीटी की ओर से जारी आदेश में भी राजाराम सिंह का पता आदि का खुलासा नहीं है। ऐसे में राजाराम का पता करना हर किसी के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है। माना जा रहा है कि राजाराम किसी बड़े स्तर से जुड़े हैं और ऐसी शिकायत हुई है जो प्रदेश सरकार की नजर में सबसे गंभीर अपराध है। इसी सरकार में प्रदेश के एक विधायक की सदस्यता खत्म हो चुकी है। ऐसे में शिकायतों की जांच में जिस तरह से तेजी आई है, उससे कैसरगंज सांसद की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गईं हैं। स्थिति चाहे जो हो, उन्हें जांच का सामना तो करना ही पड़ेगा। इसी दौरान सरकार की ओर से भी कड़ा कदम उठाए जाने से जांच में भी तेजी है। ऐसा तब है जब शिकायत करने वाला सामने तक नहीं आया है। इसके भी निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं।
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एनजीटी में पत्र याचिका के माध्यम से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाले राजाराम सिंह कौन हैं? ये बड़ा सवाल है क्योंकि एनजीटी के इस आदेश में शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। विधि विशेषज्ञ केके मिश्र की मानें तो पत्र याचिका में याची द्वारा रजिस्टर्ड डाक में भेजी गई शिकायत को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता। न्यायिक पीठ सुरक्षा की दृष्टि से उसे गोपनीय रख सकती है। बृजभूषण के सियासी और अन्य विरोधियों में भी राजाराम का नाम अब तक चर्चा में नहीं आया है। इसके चलते राजाराम सिंह कौन है? ये अभी रहस्य बना हुआ है।
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सांसद प्रतिनिधि संजीव सिंह का कहना है कि एनजीटी ने बगैर वास्तविक पहचान के यदि आदेश पास किया है तो यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई गाइडलाइन के विपरीत है। शिकायत सही या झूठी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। अब जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शिकायतकर्ता को सामने लाया जाए।
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एनजीटी की ओर से जारी आदेश में भी राजाराम सिंह का पता आदि का खुलासा नहीं है। ऐसे में राजाराम का पता करना हर किसी के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है। माना जा रहा है कि राजाराम किसी बड़े स्तर से जुड़े हैं और ऐसी शिकायत हुई है जो प्रदेश सरकार की नजर में सबसे गंभीर अपराध है। इसी सरकार में प्रदेश के एक विधायक की सदस्यता खत्म हो चुकी है। ऐसे में शिकायतों की जांच में जिस तरह से तेजी आई है, उससे कैसरगंज सांसद की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गईं हैं। स्थिति चाहे जो हो, उन्हें जांच का सामना तो करना ही पड़ेगा। इसी दौरान सरकार की ओर से भी कड़ा कदम उठाए जाने से जांच में भी तेजी है। ऐसा तब है जब शिकायत करने वाला सामने तक नहीं आया है। इसके भी निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं।