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गेहूं बीज उत्पादन तकनीक पर रोजगार परक प्रशिक्षण
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गोंडा। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर में शुक्रवार तक पांच दिवसीय गेहूं बीज उत्पादन तकनीक विषय पर रोजगार परक प्रशिक्षण आयोजित हुआ। प्रशिक्षण का शुभारंभ ग्राम प्रधान ललकपुर बाबूराम यादव ने किया। उन्होंने किसानों से गेहूं बीज उत्पादन तकनीक की विधा से स्वरोजगार अपनाने पर बल दिया।
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार पांडेय ने गेहूं बीज की मांग को देखते हुए ग्रामीण बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार सृजन के लिए गेहूं बीज उत्पादन अपनाने पर बल दिया। बताया कि किसानों द्वारा खाद्यान्न फसलों में धान एवं गेहूं के बीज की काफी मांग है। गेहूं बीज उत्पादन तकनीक अपनाकर किसान स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. राम लखन सिंह ने गेहूं बीज उत्पादन तकनीक की विधिवत जानकारी दी। उन्होंने भूमि एवं भूमि का चयन, उन्नतशील प्रजातियों, बीज शोधन एवं बीज उपचार, सिंचाई प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी।
डॉ. केके मौर्य ने गेहूं बीज उत्पादन में उन्नतशील कृषि यंत्रों के प्रयोग एवं महत्व के बारे में बताया। डॉ. पीके मिश्रा ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन, डॉ मनोज कुमार सिंह ने गोबर की खाद, बर्मी कंपोस्ट आदि कार्बनिक खादों के प्रयोग एवं महत्व की जानकारी दी।
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डॉ. दिनेश कुमार पांडे ने फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी। प्रशिक्षण के समापन पर ग्राम प्रधान लमटी उकरहवा रवीन्द्र कुमार सिंह ने कृषकों से आह्वान किया कि वह वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। इस मौके पर प्रगतिशील कृषकों अर्जुन यादव, छीटन प्रसाद, राजेश कुमार वर्मा, राम सागर वर्मा आदि ने प्रतिभाग कर गेहूं बीज उत्पादन तकनीक की विधिवत जानकारी प्राप्त की।
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केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार पांडेय ने गेहूं बीज की मांग को देखते हुए ग्रामीण बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार सृजन के लिए गेहूं बीज उत्पादन अपनाने पर बल दिया। बताया कि किसानों द्वारा खाद्यान्न फसलों में धान एवं गेहूं के बीज की काफी मांग है। गेहूं बीज उत्पादन तकनीक अपनाकर किसान स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. राम लखन सिंह ने गेहूं बीज उत्पादन तकनीक की विधिवत जानकारी दी। उन्होंने भूमि एवं भूमि का चयन, उन्नतशील प्रजातियों, बीज शोधन एवं बीज उपचार, सिंचाई प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी।
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डॉ. केके मौर्य ने गेहूं बीज उत्पादन में उन्नतशील कृषि यंत्रों के प्रयोग एवं महत्व के बारे में बताया। डॉ. पीके मिश्रा ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन, डॉ मनोज कुमार सिंह ने गोबर की खाद, बर्मी कंपोस्ट आदि कार्बनिक खादों के प्रयोग एवं महत्व की जानकारी दी।
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डॉ. दिनेश कुमार पांडे ने फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी। प्रशिक्षण के समापन पर ग्राम प्रधान लमटी उकरहवा रवीन्द्र कुमार सिंह ने कृषकों से आह्वान किया कि वह वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। इस मौके पर प्रगतिशील कृषकों अर्जुन यादव, छीटन प्रसाद, राजेश कुमार वर्मा, राम सागर वर्मा आदि ने प्रतिभाग कर गेहूं बीज उत्पादन तकनीक की विधिवत जानकारी प्राप्त की।