{"_id":"f5fb93a6263274eb519768c66f683812","slug":"adopting-double-standard-on-the-raging-school-operator-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोहरे मानक अपनाने पर भड़के विद्यालय संचालक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोहरे मानक अपनाने पर भड़के विद्यालय संचालक
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2015 12:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर में संचालित चित्रगुप्त इंटर कॉलेज में रविवार को वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधक संघ की बैठक हुई। जिसकी अध्यक्षता यश प्रकाश त्रिपाठी व संचालन रवींद्र पांडेय ने किया। बैठक में ब्लॉक स्तरीय पदाधिकारियों का चयन भी किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष जय प्रकाश मिश्र ने कहा कि शिक्षा विभाग की दोहरी नीतियों को देखते हुए इस संघ की स्थापना की गई है। विद्यालय के संचालन से लेकर मान्यता करवाने तक विद्यालय के प्रबंधकों को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इसकी चिंता किसी को नहीं है। इन्हें सभी सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। किसी तरह भूमि भवन की व्यवस्था करके विद्यालय का संचालन प्रारंभ करने वाले प्रबंधकों को प्रोत्साहित करने के बजाय उन्हें परेशान किया जाता है।
विज्ञापन
छोटे स्तर की तो बात ही छोड़ दीजिए डीएम से लेकर सीएम तक सभी लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में न पढ़ा कर, प्राइवेट व वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। यदि हम बहुत गलत हैं और मानक विहीन हैं तो फिर अपने बच्चों को सरकार चला रहे लोग व सरकारी अधिकारी हमारे विद्यालय में क्यों पढ़ा रहे हैं।
दो से पांच हजार रुपये तक पाने वाले शिक्षक के पढ़ाये हुए कक्षा एक के छात्र अपना हस्ताक्षर अंग्रेजी में बना रहे हैं और उनके यहां 25 से 35 हजार रुपये पाने वाले शिक्षक के पढ़ाये कक्षा आठ के छात्र अपना नाम हिंदी में किसी तरह लिख पा रहे हैं। ऐसे में यह लोग किस मानक की बात कर रहे हैं।
वास्तव में मानक विहीन हमारा नही उनका विद्यालय हैं। हमारे अच्छे कार्य को देख कर सरकार को तो घर बैठे हमारे विद्यालय की मान्यता दे देनी चाहिए। लेकिन ऐसा भी नही हो रहा है, हमारे प्रबंधकों को उल्टे नियम और कानून बताए जा रहे हैं।
वह मान्यता के लिये मोटी फाइल बनाकर इस कार्यालय से उस कार्यालय का चक्कर काटते रहते हैं। जिला अध्यक्ष लाखन सिंह, नीलम प्रकाश पाठक, संजय श्रीवास्तव, मनोज यादव, खालिक अख्तर एवं एसपी गुप्त सहित अन्य कई लोगों ने बैठक का संबोधित किया।
उसके बाद तहसील स्तरीय पदाधिकारियों का चयन किया गया। जिसमें राजकिशोर शुक्ल को संयोजक, शिवनंदन वैश्य को अध्यक्ष, अनिल सिंह को मंत्री, वीके श्रीवास्तव को उपाध्यक्ष, एवं सीतारी गुप्ता को संगठन मंत्री मनोनीत किया गया।
विज्ञापन
बैठक को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष जय प्रकाश मिश्र ने कहा कि शिक्षा विभाग की दोहरी नीतियों को देखते हुए इस संघ की स्थापना की गई है। विद्यालय के संचालन से लेकर मान्यता करवाने तक विद्यालय के प्रबंधकों को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
इसकी चिंता किसी को नहीं है। इन्हें सभी सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। किसी तरह भूमि भवन की व्यवस्था करके विद्यालय का संचालन प्रारंभ करने वाले प्रबंधकों को प्रोत्साहित करने के बजाय उन्हें परेशान किया जाता है।
विज्ञापन
छोटे स्तर की तो बात ही छोड़ दीजिए डीएम से लेकर सीएम तक सभी लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में न पढ़ा कर, प्राइवेट व वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। यदि हम बहुत गलत हैं और मानक विहीन हैं तो फिर अपने बच्चों को सरकार चला रहे लोग व सरकारी अधिकारी हमारे विद्यालय में क्यों पढ़ा रहे हैं।
दो से पांच हजार रुपये तक पाने वाले शिक्षक के पढ़ाये हुए कक्षा एक के छात्र अपना हस्ताक्षर अंग्रेजी में बना रहे हैं और उनके यहां 25 से 35 हजार रुपये पाने वाले शिक्षक के पढ़ाये कक्षा आठ के छात्र अपना नाम हिंदी में किसी तरह लिख पा रहे हैं। ऐसे में यह लोग किस मानक की बात कर रहे हैं।
वास्तव में मानक विहीन हमारा नही उनका विद्यालय हैं। हमारे अच्छे कार्य को देख कर सरकार को तो घर बैठे हमारे विद्यालय की मान्यता दे देनी चाहिए। लेकिन ऐसा भी नही हो रहा है, हमारे प्रबंधकों को उल्टे नियम और कानून बताए जा रहे हैं।
वह मान्यता के लिये मोटी फाइल बनाकर इस कार्यालय से उस कार्यालय का चक्कर काटते रहते हैं। जिला अध्यक्ष लाखन सिंह, नीलम प्रकाश पाठक, संजय श्रीवास्तव, मनोज यादव, खालिक अख्तर एवं एसपी गुप्त सहित अन्य कई लोगों ने बैठक का संबोधित किया।
उसके बाद तहसील स्तरीय पदाधिकारियों का चयन किया गया। जिसमें राजकिशोर शुक्ल को संयोजक, शिवनंदन वैश्य को अध्यक्ष, अनिल सिंह को मंत्री, वीके श्रीवास्तव को उपाध्यक्ष, एवं सीतारी गुप्ता को संगठन मंत्री मनोनीत किया गया।