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बिना बोर्ड लगाए साढ़े नौ लाख का भुगतान
Gonda
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
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गोंडा। जिले में मनरेगा के तहत हुए घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है, लेकिन कैग ने भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में भी जिले में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों एवं किए गए भुगतान पर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 272 परियोजनाओं के स्थल पर बिना बोर्ड लगवाए ही करीब नौ लाख 52 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया।
करीब छह महीने पहले ऑडिट करने आई कैग की टीम ने कई बिंदुओं पर अफसरों से रिपोर्ट तलब की है। इनमें लोक निर्माण विभाग और वन विभाग द्वारा धन वापस करने और खर्च किए गए धन का ब्यौरा भी मांगा गया है। वर्ष 2007-08 में मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों द्वारा करीब चार हजार परियोजनाओं पर विकास कार्य कराए गए थे। कैग ने मौके पर जाकर कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया था। सत्यापन के दौरान करीब 272 परियोजनाओं पर कराए गए कार्यों से संबंधित बोर्ड नहीं लगे मिले, जबकि बोर्ड लगाने का भुगतान कर दिया गया।
हर बोर्ड के लिए किया 3,500 रुपये का भुगतान-272 परियोजनाओं पर भी बोर्ड लगाए जाने थे। कैग की जांच में खुलासा हुआ कि इन परियोजनाओं पर बोर्ड लगाने के लिए 3,500 रुपये प्रति बोर्ड की दर से भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर एक भी बोर्ड नहीं लगा मिला। ऐसे में 272 परियोजनाओं पर बोर्ड लगाने के लिए करीब नौ लाख 52 हजार रुपये की धांधली की गई। बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए इसका जवाब मांगा गया है।
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यह है नियम-मनरेगा गाइड लाइन के अनुसार 50 हजार रुपये से अधिक के विकास कार्य कराने पर कार्यस्थल पर एक बोर्ड लगवाया जाता है। उस पर कार्यस्थल, कार्य का नाम, योजना का नाम, खर्च धन आदि ब्यौरा अंकित होता है। एक बोर्ड के निर्माण पर 3,500 रुपये खर्च होते हैं। ये कार्य चाहे क्षेत्र पंचायत से हो या फिर ग्राम पंचायत से।
आज देना है जवाब-कैग की जांच के बाद भेजी गई रिपोर्ट पर कंपलायंस मांगा है। कैग ने लखनऊ स्थित कार्यालय से 17 अक्तूबर को सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा है। बोर्ड नहीं लगे तो क्यों और भुगतान हुआ तो बोर्ड कहां हैं आदि का ब्यौरा मांगा गया है।
पहले का है मामला
कैग ने बिंदुवार आख्या मांगी है। करीब छह बिंदुओं पर आख्या पहले ही भेजी जा चुकी है। बोर्ड नहीं लगे हैं इसका जवाब 17 अक्तूबर को देना है। जवाब तैयार कराया जा रहा है। यह पहले का मामला है।
-मृणाल सिंह, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार गोंडा
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करीब छह महीने पहले ऑडिट करने आई कैग की टीम ने कई बिंदुओं पर अफसरों से रिपोर्ट तलब की है। इनमें लोक निर्माण विभाग और वन विभाग द्वारा धन वापस करने और खर्च किए गए धन का ब्यौरा भी मांगा गया है। वर्ष 2007-08 में मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों द्वारा करीब चार हजार परियोजनाओं पर विकास कार्य कराए गए थे। कैग ने मौके पर जाकर कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया था। सत्यापन के दौरान करीब 272 परियोजनाओं पर कराए गए कार्यों से संबंधित बोर्ड नहीं लगे मिले, जबकि बोर्ड लगाने का भुगतान कर दिया गया।
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हर बोर्ड के लिए किया 3,500 रुपये का भुगतान-272 परियोजनाओं पर भी बोर्ड लगाए जाने थे। कैग की जांच में खुलासा हुआ कि इन परियोजनाओं पर बोर्ड लगाने के लिए 3,500 रुपये प्रति बोर्ड की दर से भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर एक भी बोर्ड नहीं लगा मिला। ऐसे में 272 परियोजनाओं पर बोर्ड लगाने के लिए करीब नौ लाख 52 हजार रुपये की धांधली की गई। बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए इसका जवाब मांगा गया है।
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यह है नियम-मनरेगा गाइड लाइन के अनुसार 50 हजार रुपये से अधिक के विकास कार्य कराने पर कार्यस्थल पर एक बोर्ड लगवाया जाता है। उस पर कार्यस्थल, कार्य का नाम, योजना का नाम, खर्च धन आदि ब्यौरा अंकित होता है। एक बोर्ड के निर्माण पर 3,500 रुपये खर्च होते हैं। ये कार्य चाहे क्षेत्र पंचायत से हो या फिर ग्राम पंचायत से।
आज देना है जवाब-कैग की जांच के बाद भेजी गई रिपोर्ट पर कंपलायंस मांगा है। कैग ने लखनऊ स्थित कार्यालय से 17 अक्तूबर को सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा है। बोर्ड नहीं लगे तो क्यों और भुगतान हुआ तो बोर्ड कहां हैं आदि का ब्यौरा मांगा गया है।
पहले का है मामला
कैग ने बिंदुवार आख्या मांगी है। करीब छह बिंदुओं पर आख्या पहले ही भेजी जा चुकी है। बोर्ड नहीं लगे हैं इसका जवाब 17 अक्तूबर को देना है। जवाब तैयार कराया जा रहा है। यह पहले का मामला है।
-मृणाल सिंह, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार गोंडा