{"_id":"5acceb484f1c1b1d3d8b45f9","slug":"81523379016-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माडल स्कूल जहां लगती है एडमीशन की लाइन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माडल स्कूल जहां लगती है एडमीशन की लाइन
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
इस मॉडल स्कूल में प्रवेश को होती मारामारी
गोंडा। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से संचालित मॉडल स्कूल करनैलगंज एक ऐसा स्कूल है जहां बच्चों के एडमीशन के लिए मारामारी होती है।
इस स्कूल में अपने बच्चें का प्रवेश कराने के लिए दर्जनों की संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंच रहे हैं मगर संसाधनों व शिक्षकों की कमी से उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से शिखा प्रदान करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने चार साल पहले माडल स्कूल संचालित करने का फार्मूला तैयार किया था।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को वह सारी सुविधा मुहैया कराई जानी थी जो निजी स्कूलों में बच्चों को दी जाती हैं। इस फार्मूले के तहत जिले के प्राथमिक विद्यालय रानीपुरवा व प्राथमिक विद्यालय करनैलगंज को मॉडल स्कूल घोषित किया गया था।
विज्ञापन
इन स्कूलों में पांच पांच शिक्षकों को तैनात किया जाना था मगर शिक्षकों की कमी के चलते चार चार शिक्षक ही तैनात किए जा सके। बावजूद इसके इन दोनों स्कूलों की स्थिति काफी बेहतर है।
अंग्रेजी माध्यम से संचालित माडल स्कूल करनैलगंज में तो बच्चों के प्रवेश के लिए लंबी कतार लग रही है। यह स्कूल के क्षेत्र के कान्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। प्रधानाध्यापक नागेंद्रमणि त्रिपाठी के मुताबिक वर्तमान सत्र में करीब तीन सौ बच्चों का नामांकन है।
इस चार कमरे के स्कूल में प्रधानाध्यापक ने अपने पास से कंप्यूटर, प्रोजेक्टर व अन्य सुविधाएं मुहैया करा रखी है। इन्हे पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक के अलावा सहायक अध्यापक श्याम नरायन पांडेय, आशुतोष शुक्ला व निसात की तैनाती है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कमरों की संख्या व शिक्षकों की कमी के कारण नामांकन कराने के लिए आने वाले अभिभावकों को वापस करना पड़ रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग इस नए सत्र से 90 प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल स्कूल के तौर पर संचालित करने का कार्य पूरा कर चुका है। इन स्कूलों में बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा दी जानी है।
स्कूलों के चयन के साथ अध्यापक चयन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया कि शिक्षकों की काउंसलिंग कराकर उन्हें विद्यालय आवंटित कर दिया गया है। जल्द ही इन स्कूलों का संचालन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग की तरह ही माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने के लिए वर्ष 2014 में माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ से राजकीय मॉडल विद्यालय कंसापुर का निर्माण कराया गया था।
इसके निर्माण में 2.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। माडल स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए सात शिक्षकों की तैनाती की जानी थी मगर विभाग इस स्कूल में एक भी शिक्षक तैनात नहीं कर सका।
स्कूल को संचालित करने के लिए तीन शिक्षकों को संबद्ध किया गया था, वहीं शिक्षक वर्तमान समय में भी स्कूल का संचालन कर रहे हैं। कान्वेंट स्कूलों में मिलने वाली सुविधा भी इस स्कूल से नदारद है।
जिला विद्यालय निरीक्षक सत्यप्रकाश त्रिपाठी का क हना है कि स्कूल निर्मा के साथ ही शिक्षक भर्ती की जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं हो सका। इससे शिक्षकों को संबद्ध कर स्कूल का संचालन कराया जा रहा है।
गोंडा। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से संचालित मॉडल स्कूल करनैलगंज एक ऐसा स्कूल है जहां बच्चों के एडमीशन के लिए मारामारी होती है।
इस स्कूल में अपने बच्चें का प्रवेश कराने के लिए दर्जनों की संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंच रहे हैं मगर संसाधनों व शिक्षकों की कमी से उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से शिखा प्रदान करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने चार साल पहले माडल स्कूल संचालित करने का फार्मूला तैयार किया था।
विज्ञापन
इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को वह सारी सुविधा मुहैया कराई जानी थी जो निजी स्कूलों में बच्चों को दी जाती हैं। इस फार्मूले के तहत जिले के प्राथमिक विद्यालय रानीपुरवा व प्राथमिक विद्यालय करनैलगंज को मॉडल स्कूल घोषित किया गया था।
विज्ञापन
इन स्कूलों में पांच पांच शिक्षकों को तैनात किया जाना था मगर शिक्षकों की कमी के चलते चार चार शिक्षक ही तैनात किए जा सके। बावजूद इसके इन दोनों स्कूलों की स्थिति काफी बेहतर है।
अंग्रेजी माध्यम से संचालित माडल स्कूल करनैलगंज में तो बच्चों के प्रवेश के लिए लंबी कतार लग रही है। यह स्कूल के क्षेत्र के कान्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। प्रधानाध्यापक नागेंद्रमणि त्रिपाठी के मुताबिक वर्तमान सत्र में करीब तीन सौ बच्चों का नामांकन है।
इस चार कमरे के स्कूल में प्रधानाध्यापक ने अपने पास से कंप्यूटर, प्रोजेक्टर व अन्य सुविधाएं मुहैया करा रखी है। इन्हे पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक के अलावा सहायक अध्यापक श्याम नरायन पांडेय, आशुतोष शुक्ला व निसात की तैनाती है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि कमरों की संख्या व शिक्षकों की कमी के कारण नामांकन कराने के लिए आने वाले अभिभावकों को वापस करना पड़ रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग इस नए सत्र से 90 प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल स्कूल के तौर पर संचालित करने का कार्य पूरा कर चुका है। इन स्कूलों में बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर शिक्षा दी जानी है।
स्कूलों के चयन के साथ अध्यापक चयन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया कि शिक्षकों की काउंसलिंग कराकर उन्हें विद्यालय आवंटित कर दिया गया है। जल्द ही इन स्कूलों का संचालन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग की तरह ही माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने के लिए वर्ष 2014 में माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ से राजकीय मॉडल विद्यालय कंसापुर का निर्माण कराया गया था।
इसके निर्माण में 2.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। माडल स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए सात शिक्षकों की तैनाती की जानी थी मगर विभाग इस स्कूल में एक भी शिक्षक तैनात नहीं कर सका।
स्कूल को संचालित करने के लिए तीन शिक्षकों को संबद्ध किया गया था, वहीं शिक्षक वर्तमान समय में भी स्कूल का संचालन कर रहे हैं। कान्वेंट स्कूलों में मिलने वाली सुविधा भी इस स्कूल से नदारद है।
जिला विद्यालय निरीक्षक सत्यप्रकाश त्रिपाठी का क हना है कि स्कूल निर्मा के साथ ही शिक्षक भर्ती की जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं हो सका। इससे शिक्षकों को संबद्ध कर स्कूल का संचालन कराया जा रहा है।