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Gonda News: 7.6 लाख लाभार्थी आयुष्मान योजना से वंचित
Thu, 13 Jul 2023 11:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 13 Jul 2023 11:30 PM IST
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गोंडा। सेहत की बेहतर देखभाल के लिए पांच साल पहले शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज मिलना तो दूर अभी तक स्वास्थ्य विभाग 7,63114 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड तक नहीं दे पाया। जिससे वे विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना से वंचित हैं।
जिले में एक अप्रैल 2018 से आयुष्मान योजना का संचालन शुरू हुआ था। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को हर साल पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज करवाने का फायदा मिलता है। योजना का लाभ दिलाने के लिए जिले के 2,82,857 परिवारों के 12,02,154 सदस्यों को चयनित किया गया था। सुस्त रफ्तार के कारण अभी भी बड़ी संख्या में चयनित लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। जबकि गोल्डन कार्ड बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के 32 आरोग्य मित्रों के अलावा 1214 पंचायत सहायक व करीब दो हजार सीएचसी संचालकों को लगाया गया है।
लाभार्थियों के इलाज से मुंह मोड़ रहे निजी अस्पताल
भले ही सरकार की ओर से मुफ्त इलाज के लिए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रेलवे अस्पताल के अलावा 16 निजी नर्सिंगहोम को भी चयनित किया हो, लेकिन निजी अस्पताल संचालक आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का इलाज करने से कतरा रहे हैं। इलाज के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में नूर हॉस्पिटल ने पांच व कस्तूरी अस्पताल ने सात मरीजों का ही इलाज किया। वहीं सिटी मैटरनिटी एंड ट्राॅमा सेंटर ने नौ, सदभावना मेडिकल सेंटर ने 59 व लाइफ लाइन हॉस्पिटल ने 99 मरीजों का ही इलाज किया है।
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गोल्डन कार्ड बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अस्पताल आए मरीजाें का तत्काल पंजीकरण कर दिया जा रहा है। इलाज के मामले में खराब प्रगति वाले अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है।
- डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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जिले में एक अप्रैल 2018 से आयुष्मान योजना का संचालन शुरू हुआ था। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी को हर साल पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज करवाने का फायदा मिलता है। योजना का लाभ दिलाने के लिए जिले के 2,82,857 परिवारों के 12,02,154 सदस्यों को चयनित किया गया था। सुस्त रफ्तार के कारण अभी भी बड़ी संख्या में चयनित लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड नहीं बन पाए हैं। जबकि गोल्डन कार्ड बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के 32 आरोग्य मित्रों के अलावा 1214 पंचायत सहायक व करीब दो हजार सीएचसी संचालकों को लगाया गया है।
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लाभार्थियों के इलाज से मुंह मोड़ रहे निजी अस्पताल
भले ही सरकार की ओर से मुफ्त इलाज के लिए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रेलवे अस्पताल के अलावा 16 निजी नर्सिंगहोम को भी चयनित किया हो, लेकिन निजी अस्पताल संचालक आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का इलाज करने से कतरा रहे हैं। इलाज के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में नूर हॉस्पिटल ने पांच व कस्तूरी अस्पताल ने सात मरीजों का ही इलाज किया। वहीं सिटी मैटरनिटी एंड ट्राॅमा सेंटर ने नौ, सदभावना मेडिकल सेंटर ने 59 व लाइफ लाइन हॉस्पिटल ने 99 मरीजों का ही इलाज किया है।
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गोल्डन कार्ड बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अस्पताल आए मरीजाें का तत्काल पंजीकरण कर दिया जा रहा है। इलाज के मामले में खराब प्रगति वाले अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है।
- डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ