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5706 गांवों में नहीं पहुंची बिजली
अमर उजाला/गोंडा
Updated Wed, 18 May 2016 11:25 PM IST
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बल्लियों के सहारे लाई जा रही केबल
- फोटो : अमर उजाला
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विद्युतीकरण की तमाम योजनाएं लागू होने के बाद भी जिले में 57 सौ के करीब मजरे ऐसे हैं, जहां बिजली की रोशनी आज तक नहीं पहुंची। इन गांवों को अक्तूबर 2016 से भरपूर बिजली देने का वादा प्रदेश सरकार ने आज से दो साल पहले किया था, लेकिन कॉरपोरेशन के अधिकारियों की लापरवाही और कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी से आज तक इसमें से एक भी गांव का विद्युतीकरण नहीं हो पाया है।
हालत यह है कि राजीव गांधी विद्युतीकरण की 11वीं व 12वीं योजना में तकरीबन 250 करोड़ रुपये की लागत से इन मजरों का विद्युतीकरण किया जाना अपेक्षित है। लेकिन जिन-जिन कार्यदायी संस्थाओं को इसका काम मिला है, वह अभी तक इसके लक्ष्य का एक फीसदी टारगेट तक एचीव नहीं कर पाई हैं। जिसकी वजह से विद्युतीकरण का यह काम अगर आगामी एक साल में भी पूरा हो जाए तो बड़ी बात है।
राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत जिले में मौजूदा वक्त दो प्लान एक साथ चल रहे हैं। जिसमें 11वें प्लान के तहत 300 व उससे ऊपर की आबादी के 1836 मजरों का विद्युतीकरण समाज कल्याण को कराना है।
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यह काम इस संस्था को आज से डेढ़ साल पहले आवंटित हुआ था। जिसके सापेक्ष संस्था अभी तक 10 फीसदी लक्ष्य भी एचीव नहीं कर पाई है। वहीं 12वें प्लान में होने वाले 100 व उससे ऊपर की आबादी के मजरों के विद्युतीकरण का काम दो साल पहले कार्यदायी संस्था वैरीगेट को आवंटित किया गया था, लेकिन फर्म को छह महीने पहले ब्लैक लिस्टेड कर दिए जाने के बाद अब इसका काम कॉरपोरेशन विभागीय रूप से करा रहा है। जिसकी शुरूआत अभी तक किसी भी गांव में नहीं हो पाई है।
जिले में जिन गांवों का विद्युतीकरण नहीं हुआ है, उनकी बात छोड़ अगर विद्युतीकृत गांवों की बात करें तो उनको मौजूदा वक्त 8 से 10 घंटे भी बिजली एक दिन में मिल जाए तो बड़ी बात है। ग्रामीण इलाकों के लिए पावर कॉरपोरेशन ने 14 घंटे बिजली का शेड्यूल लागू कर रखा है। बावजूद इसके लोकल फाल्ट और आपात कटौती के चलते उन गांवों की बिजली में 6 से 8 घंटे की कटौती रोज की जा रही है। जिससे लोगों का जीना दुश्वार हो चला है।
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हालत यह है कि राजीव गांधी विद्युतीकरण की 11वीं व 12वीं योजना में तकरीबन 250 करोड़ रुपये की लागत से इन मजरों का विद्युतीकरण किया जाना अपेक्षित है। लेकिन जिन-जिन कार्यदायी संस्थाओं को इसका काम मिला है, वह अभी तक इसके लक्ष्य का एक फीसदी टारगेट तक एचीव नहीं कर पाई हैं। जिसकी वजह से विद्युतीकरण का यह काम अगर आगामी एक साल में भी पूरा हो जाए तो बड़ी बात है।
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राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत जिले में मौजूदा वक्त दो प्लान एक साथ चल रहे हैं। जिसमें 11वें प्लान के तहत 300 व उससे ऊपर की आबादी के 1836 मजरों का विद्युतीकरण समाज कल्याण को कराना है।
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यह काम इस संस्था को आज से डेढ़ साल पहले आवंटित हुआ था। जिसके सापेक्ष संस्था अभी तक 10 फीसदी लक्ष्य भी एचीव नहीं कर पाई है। वहीं 12वें प्लान में होने वाले 100 व उससे ऊपर की आबादी के मजरों के विद्युतीकरण का काम दो साल पहले कार्यदायी संस्था वैरीगेट को आवंटित किया गया था, लेकिन फर्म को छह महीने पहले ब्लैक लिस्टेड कर दिए जाने के बाद अब इसका काम कॉरपोरेशन विभागीय रूप से करा रहा है। जिसकी शुरूआत अभी तक किसी भी गांव में नहीं हो पाई है।
जिले में जिन गांवों का विद्युतीकरण नहीं हुआ है, उनकी बात छोड़ अगर विद्युतीकृत गांवों की बात करें तो उनको मौजूदा वक्त 8 से 10 घंटे भी बिजली एक दिन में मिल जाए तो बड़ी बात है। ग्रामीण इलाकों के लिए पावर कॉरपोरेशन ने 14 घंटे बिजली का शेड्यूल लागू कर रखा है। बावजूद इसके लोकल फाल्ट और आपात कटौती के चलते उन गांवों की बिजली में 6 से 8 घंटे की कटौती रोज की जा रही है। जिससे लोगों का जीना दुश्वार हो चला है।