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Gonda News: 53 पंचायतें हुईं टीबी मुक्त, प्रधानों को मिला पुरस्कार
Thu, 03 Apr 2025 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:26 PM IST
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जिला पंचायत सभागार में टीबी मुक्त पंचायत की प्रधान को प्रशस्ति पत्र देतीं जिलाधिकारी नेहा शर्
गोंडा। क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत वर्ष 2024 में टीबी मुक्त घोषित हुईं 53 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को पुरस्कृत किया गया। बृहस्पतिवार को जिला पंचायत सभागार में कार्यक्रम का आयोजन कर 44 प्रधानों को कांस्य पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र तथा नौ प्रधानों को रजत पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र दिया गया।
जिलाधिकारी नेहा शर्मा, सीडीओ अंकिता जैन व डीपीआरओ लालजी दूबे ने प्रधानों को सम्मानित किया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जयगोविंद ने बताया कि एक हजार आबादी वाली इन ग्राम पंचायतों में एक या उससे कम टीबी मरीज हैं। वर्ष 2024 में 59 ग्राम पंचायतों ने टीबी मुक्त घोषित होने के लिए आवेदन किया था, जिसमें जांच के दौरान छह पंचायतों में एक से अधिक टीबी के मरीज पाए गए। 53 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। जो ग्राम पंचायतें पहली बार टीबी मुक्त हुई हैं, उनके ग्राम प्रधानों को कांस्य पुरस्कार व जो दूसरी बार टीबी मुक्त हुई हैं, उनके प्रधानों को रजत पुरस्कार दिया गया है। इस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार डॉ. दीपक चतुर्वेदी, एसीएमओ डॉ. आदित्य वर्मा, डीसीपीएम डॉ. आरपी सिंह, विवेक शरण, अरविंद मिश्र, सूरज सिंह, राजेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। (संवाद)
गांव को क्षयरोग मुक्त बनाने वाली 17 प्रधानों को मिला सम्मान
गोंडा। जिले काे क्षयरोग मुक्त बनाने की मुहिम में आधी आबादी ने सक्रिय भूमिका निभाई। महिला प्रधानों ने टीबी मरीजों की अपने परिवार की तरह देखभाल की। दवा से लेकर पोषण तक पर फोकस किया। जिससे मरीजों ने क्षय रोग को मात दे दी। गांव को टीबी मुक्त घोषित होने पर इन महिला प्रधानों को पुरस्कृत किया गया।
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कटरा बाजार के बरुईगोंदहा की प्रधान लता शुक्ला ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में वर्ष 2022 में टीबी के चार मरीज थे। गरीबी व काम की अधिकता के कारण मरीजों को दवा लाने का समय नहीं मिल पाता था और उनकी बीमारी बढ़ती जा रही थी। वर्ष 2023 में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से उन्होंने टीबी मरीजों के पोषण व देखभाल का जिम्मा ले लिया। टीबी मरीजों को महीने में दो से तीन बार वीडियो कॉल पर नियमित दवा खाने की निगरानी करती थीं। लता ने बताया कि उनके पति दिलीप शुक्ल मरीजों को अपने साथ ले जाकर सीएचसी या जिला स्तरीय टीबी क्लीनिक से दवा दिलवाने में मदद करते थे। वर्ष 2024 उनकी पंचायत टीबी मुक्त घोषित हुई।
हलधरमऊ के भुलभुलिया की प्रधान रश्मि ने बताया कि उनकी पंचायत दूसरी बार टीबी मुक्त हुई है। वर्ष 2020 में तीन मरीजों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई। ग्राम के अन्य लोग मरीजों से दूरी रखते थे, लेकिन वह खुद उनके पास जाकर हालचाल लेती थीं। मरीजों का हौसला बढ़ाती थीं। निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण कराने में मदद की। मरीजों को यदि समय से पोषण प्रोत्साहन भत्ता नहीं मिलता तो अपने पास से आर्थिक मदद करतीं। जिससे वर्ष 2022 में गांव टीबी मुक्त घोषित हुआ।
चंगेरी की प्रधान रंजना सिंह ने बताया कि उनके गांव में भी टीबी के दो मरीज थे। राज्यपाल की अपील के बाद उन्होंने खुद उनके पोषण की जिम्मेदारी संभाली। नियमित दवा खाने की निगरानी करने के साथ ही उनके प्रोत्साहन भत्ते आदि का ध्यान रखा।
बभनजोत के अगया बुजुर्ग निवासी मंजू पांडेय ने भी बेहतर देखरेख से टीबी मरीज को बीमारी से निजात दिलाने में मदद की। इसी प्रकार क्षय रोग उन्मूलन में भागीदारी निभाने वाली 17 ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने इस प्रयास की सराहना की है।
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जिलाधिकारी नेहा शर्मा, सीडीओ अंकिता जैन व डीपीआरओ लालजी दूबे ने प्रधानों को सम्मानित किया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जयगोविंद ने बताया कि एक हजार आबादी वाली इन ग्राम पंचायतों में एक या उससे कम टीबी मरीज हैं। वर्ष 2024 में 59 ग्राम पंचायतों ने टीबी मुक्त घोषित होने के लिए आवेदन किया था, जिसमें जांच के दौरान छह पंचायतों में एक से अधिक टीबी के मरीज पाए गए। 53 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। जो ग्राम पंचायतें पहली बार टीबी मुक्त हुई हैं, उनके ग्राम प्रधानों को कांस्य पुरस्कार व जो दूसरी बार टीबी मुक्त हुई हैं, उनके प्रधानों को रजत पुरस्कार दिया गया है। इस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार डॉ. दीपक चतुर्वेदी, एसीएमओ डॉ. आदित्य वर्मा, डीसीपीएम डॉ. आरपी सिंह, विवेक शरण, अरविंद मिश्र, सूरज सिंह, राजेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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गांव को क्षयरोग मुक्त बनाने वाली 17 प्रधानों को मिला सम्मान
गोंडा। जिले काे क्षयरोग मुक्त बनाने की मुहिम में आधी आबादी ने सक्रिय भूमिका निभाई। महिला प्रधानों ने टीबी मरीजों की अपने परिवार की तरह देखभाल की। दवा से लेकर पोषण तक पर फोकस किया। जिससे मरीजों ने क्षय रोग को मात दे दी। गांव को टीबी मुक्त घोषित होने पर इन महिला प्रधानों को पुरस्कृत किया गया।
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कटरा बाजार के बरुईगोंदहा की प्रधान लता शुक्ला ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में वर्ष 2022 में टीबी के चार मरीज थे। गरीबी व काम की अधिकता के कारण मरीजों को दवा लाने का समय नहीं मिल पाता था और उनकी बीमारी बढ़ती जा रही थी। वर्ष 2023 में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से उन्होंने टीबी मरीजों के पोषण व देखभाल का जिम्मा ले लिया। टीबी मरीजों को महीने में दो से तीन बार वीडियो कॉल पर नियमित दवा खाने की निगरानी करती थीं। लता ने बताया कि उनके पति दिलीप शुक्ल मरीजों को अपने साथ ले जाकर सीएचसी या जिला स्तरीय टीबी क्लीनिक से दवा दिलवाने में मदद करते थे। वर्ष 2024 उनकी पंचायत टीबी मुक्त घोषित हुई।
हलधरमऊ के भुलभुलिया की प्रधान रश्मि ने बताया कि उनकी पंचायत दूसरी बार टीबी मुक्त हुई है। वर्ष 2020 में तीन मरीजों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई। ग्राम के अन्य लोग मरीजों से दूरी रखते थे, लेकिन वह खुद उनके पास जाकर हालचाल लेती थीं। मरीजों का हौसला बढ़ाती थीं। निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण कराने में मदद की। मरीजों को यदि समय से पोषण प्रोत्साहन भत्ता नहीं मिलता तो अपने पास से आर्थिक मदद करतीं। जिससे वर्ष 2022 में गांव टीबी मुक्त घोषित हुआ।
चंगेरी की प्रधान रंजना सिंह ने बताया कि उनके गांव में भी टीबी के दो मरीज थे। राज्यपाल की अपील के बाद उन्होंने खुद उनके पोषण की जिम्मेदारी संभाली। नियमित दवा खाने की निगरानी करने के साथ ही उनके प्रोत्साहन भत्ते आदि का ध्यान रखा।
बभनजोत के अगया बुजुर्ग निवासी मंजू पांडेय ने भी बेहतर देखरेख से टीबी मरीज को बीमारी से निजात दिलाने में मदद की। इसी प्रकार क्षय रोग उन्मूलन में भागीदारी निभाने वाली 17 ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने इस प्रयास की सराहना की है।