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बिना बने ही 40 दुकानों की हो गई नीलामी
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2015 11:31 PM IST
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जिला पंचायत की बाउंड्रीवाल से सटकर बनाई जाने वाली दुकानों की नीलामी के लिए इसके अध्यक्ष ने नियम-कानूनों का भी ध्यान नहीं रखा और जिस जमीन का बैनामा अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत के नाम से होना चाहिए था, उसे अपने नाम से ही बैनामा करा लिया। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से होने और एक अन्य व्यक्ति की दायर याचिका पर फिलहाल के लिए उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए इसमें होने वाली किसी तरह की अग्रिम कार्रवाई पर रोक लगा दी है। वहीं सबसे बड़ी हैरत की बात यह है कि जिन दुकानों की नीलामी हो रही है, उनका दूर-दूर तक कहीं कोई अता-पता नहीं है। इसके बावजूद गुरुवार को जिला पंचायत में 40 दुकानों की नीलामी हो गई और नकद राशि जमा कराई गई। मामला अंबेडकर चौराहे से जेल की तरफ जाने वाली रोड का है। बताते हैं कि पूर्व में इस रोड के दोनों किनारों पर दुकानें हुआ करती थीं। इन्हें तीन साल पहले अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी रामबहादुर ने अभियान के दौरान ढहा दिया था। साथ ही उसी दरम्यान जिला पंचायत की जगह-जगह से टूटी पड़ी बाउंड्रीवाल को उठाकर इसके दोनों किनारों पर पेड़ लगवा दिए थे। बताते हैं कि इसी जगह पर हाल में जिला पंचायत की ओर से दुकानों की नीलामी का एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया गया। जिसकी बुधवार से जिला पंचायत में नीलामी की जा रही है, लेकिन दुकानों का कहीं कोई अता-पता नहीं है। विष्णुपुरी कॉलोनी निवासी महेंद्र प्रताप सिंह का आरोप है कि जिला पंचायत की भूमि जिस पर जिला पंचायत का सभागार और कार्यालय स्थित है, उसका वाणिज्यिक उपयोग किए जाने के लिए उसे फ्रीहोल्ड कराया गया। लेकिन यह जमीन जिसे कि अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत के नाम से बैनामा कराया जाना था, उसे जिला पंचायत अध्यक्ष विजयलक्ष्मी सिंह ने अपने ही नाम बैनामा करा लिया। ताकि जमीन जिला पंचायत के स्वामित्व में न होकर सीधे उनके स्वामित्व में आ जाए, जो कि पूरी तरह से अवैध है। क्योंकि एक बार पहले भी इसी तरह का प्रयास तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा पाण्डेय की ओर से वर्ष 1997-2000 में किया जा चुका है। जिला पंचायत परिसर में इसी स्थान पर दुकान बनवाने के लिए उस समय भी एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया गया था। जिसे अवैध मानते हुए तत्कालीन डीएम सदाकांत ने इस कारण रद्द कर दिया था कि नजूल भूमि जिला पंचायत को पट्टे के रूप में इसलिए दी गई है, ताकि इसका प्रयोग सरकारी प्रयोजन के लिए हो न कि व्यक्तिगत। महेंद्र ने इसे लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष विजयलक्ष्मी सिंह पर अपने पति, जो कि सपा सरकार में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री हैं, की ऊंची पहुंच के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। जिला पंचायत की भूमि पर मानचित्र स्वीकृत कराने सहित अन्य कारणों को लेकर उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है। मान बहादुर सिंह व अन्य की ओर से उच्च न्यायालय लखनऊ खंड पीठ में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 16 जून को जारी की गई नोटिस को स्थगित करते हुए दस दिन के अंदर निस्तारण का आदेश जारी किया है। जिला पंचायत की बाउंड्रीवाल से सटकर बनी थी, उनकी तरफ से दायर वाद पर सुनवाई करते हुए फिलहाल के लिए उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण में होने वाली किसी भी तरह की अग्रिम कार्रवाई पर रोक लगा दी है। उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह के पति बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि जिला पंचायत की भूमि अध्यक्ष के नाम हो सकती है। अध्यक्ष पदेन होता है। इसलिए बैनामा कराया गया है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह से सही कार्य हुआ है। इसकी जानकारी डीएम, एडीएम सहित अन्य अधिकारियों को भी है।
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