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Gonda News: 30.65 करोड़ का हिसाब नहीं, ऑडिट में फंसे 196 सचिव-प्रधान
Sun, 04 Jan 2026 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 04 Jan 2026 11:36 PM IST
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गोंडा। जिले के विभिन्न ब्लॉकों की पंचायतों में कराए विकास कार्यों में 30.65 करोड़ रुपये का छह वर्षों के बाद भी ऑडिट टीम को हिसाब-किताब नहीं मिल पा रहा है। इसमें 188 ग्राम पंचायतों के 196 प्रधान व सचिव फंस गए हैं। विधानसभा में पंचायतीराज समिति की बैठक के पहले आरोपी तत्कालीन प्रधान व सचिवों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए प्रशासन सख्त हो गया है।
इसी महीने में विधानसभा में पंचायतीराज समिति की बैठक होनी है। अधिकारियों ने बताया कि डीएम प्रियंका निरंजन खुद शामिल होंगी। 24 और 31 दिसंबर को ऑडिट निस्तारण के लिए डीएम स्तर से बैठकें कर चुकी हैं। इसके बावजूद भी वर्ष 2019-20 के 196 तत्कालीन प्रधान व सचिव ऐसे हैं, जिन्होंने 188 ग्राम पंचायतों में कराए कार्यों के अभिलेख नहीं दिए हैं, जबकि इन प्रधान व सचिवों को कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि करीब 30.65 करोड़ रुपये से अधिक रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है।
पंचायतों में नाली, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर आदि के नाम पर खर्च किए गए हैं। सरकारी धन की बंटरबांट की आशंका है। ऑडिट टीम को अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए। इसके बाद स्पेशल ऑडिट के लिए बुलाया गया तो भी प्रधान व सचिव अभिलेख लेकर नहीं पहुंचे। डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में अगर जल्द अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए जाते तो रिकवरी के साथ ही विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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बैठक में पहले भी हो चुकी है फजीहत
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी अमरेंद्र कुमार की ओर से वर्ष 2019-20 के अभिलेख को लेकर बीते 22 दिसंबर को एक बार फिर डीपीआरओ को पत्र जारी किया है। उनका कहना है कि लगातार बैठकों में विभाग को असहज की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमानुसार संबंधित प्रधान व सचिवों को नोटिस देकर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका
अधिकारियों ने बताया कि हलधरमऊ ब्लॉक के गौरवाखुर्द, भटनैया, भोंका, बभनजोत के अहिरौली, बढ़या, फत्तेपुर, नवाबगंज के सिरसा, तुरकौली, दुल्लापुर, रुपईडीह के कुरसहा, पचरन, बराहेमा, जेठपुरवा, बहल्हीजोत, गौनरिया, इटिथोक के जगतापुर, मध्यनगर, झंझरी के दसियापुर, इमरती विसेन, कटरा बाजार के कटुआ नाला, भगहरिया पूरेमितई, करनैलगंज के कंजेमऊ, कचनापुर, मनकापुर के कटहर बुटहनी, बंदरहा, छपिया के इटैला बुजुर्ग, खटिहन, वजीरगंज के उदयपुर ग्रंट, बभनी, पडरीकृपाल के तेलियानी उपाध्याय, टिकरिया, बेलसर के अकौनी, बढ़नापुर, बरसाड़ा, भिखारी कला, सेमरी कला, ताराडीह आदि पंचायतें खर्च का विवरण नहीं दे पा रही हैं।
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इसी महीने में विधानसभा में पंचायतीराज समिति की बैठक होनी है। अधिकारियों ने बताया कि डीएम प्रियंका निरंजन खुद शामिल होंगी। 24 और 31 दिसंबर को ऑडिट निस्तारण के लिए डीएम स्तर से बैठकें कर चुकी हैं। इसके बावजूद भी वर्ष 2019-20 के 196 तत्कालीन प्रधान व सचिव ऐसे हैं, जिन्होंने 188 ग्राम पंचायतों में कराए कार्यों के अभिलेख नहीं दिए हैं, जबकि इन प्रधान व सचिवों को कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि करीब 30.65 करोड़ रुपये से अधिक रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है।
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पंचायतों में नाली, खड़ंजा, हैंडपंप रिबोर आदि के नाम पर खर्च किए गए हैं। सरकारी धन की बंटरबांट की आशंका है। ऑडिट टीम को अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए। इसके बाद स्पेशल ऑडिट के लिए बुलाया गया तो भी प्रधान व सचिव अभिलेख लेकर नहीं पहुंचे। डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में अगर जल्द अभिलेख नहीं उपलब्ध कराए जाते तो रिकवरी के साथ ही विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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बैठक में पहले भी हो चुकी है फजीहत
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी अमरेंद्र कुमार की ओर से वर्ष 2019-20 के अभिलेख को लेकर बीते 22 दिसंबर को एक बार फिर डीपीआरओ को पत्र जारी किया है। उनका कहना है कि लगातार बैठकों में विभाग को असहज की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमानुसार संबंधित प्रधान व सचिवों को नोटिस देकर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका
अधिकारियों ने बताया कि हलधरमऊ ब्लॉक के गौरवाखुर्द, भटनैया, भोंका, बभनजोत के अहिरौली, बढ़या, फत्तेपुर, नवाबगंज के सिरसा, तुरकौली, दुल्लापुर, रुपईडीह के कुरसहा, पचरन, बराहेमा, जेठपुरवा, बहल्हीजोत, गौनरिया, इटिथोक के जगतापुर, मध्यनगर, झंझरी के दसियापुर, इमरती विसेन, कटरा बाजार के कटुआ नाला, भगहरिया पूरेमितई, करनैलगंज के कंजेमऊ, कचनापुर, मनकापुर के कटहर बुटहनी, बंदरहा, छपिया के इटैला बुजुर्ग, खटिहन, वजीरगंज के उदयपुर ग्रंट, बभनी, पडरीकृपाल के तेलियानी उपाध्याय, टिकरिया, बेलसर के अकौनी, बढ़नापुर, बरसाड़ा, भिखारी कला, सेमरी कला, ताराडीह आदि पंचायतें खर्च का विवरण नहीं दे पा रही हैं।