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सवा तीन लाख नौनिहाल सिहरते हुए स्कूल जाने को मजबूर
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गोंडा में स्वेटर का पाकर खुश हुए बच्चे।
- फोटो : GONDA
गोंडा। ठंड से पहले बेसिक शिक्षा के 3139 परिषदीय स्कूलों के 3.36 लाख नौनिहालों को स्वेटर देने के सपनों पर अधिकारियों की लापरवाही भारी है। स्वेटर वितरण के लिए फर्म तय हुए 15 दिनों का समय पूरा हो चुका है लेकिन स्वेटर की आपूर्ति कच्छप गति से चल रही है। माना जा रहा है कि सभी बच्चों तक स्वेटर समय से नही पहुंच पाएंगे। विभाग के जिम्मेदार भी आंखें फेरे हुए हैं। झंझरी के तो दो से तीन स्कूलों में स्वेटर पहुंच चुका है लेकिन अन्य ब्लॉकों में तो अभी श्री गणेश भी नहीं हुआ है। अब नौनिहालों तक स्वेटर कैसे पहुंचेगा, यह पर्दे में है। विभाग भले ही दावा कर रहा है कि 30 नवंबर तक स्वेटर मिल जाएगा, लेकिन जो स्थिति है वह इस दावे को झूठला रहा है। नौनिहाल बिना स्वेटर सिहरते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं।
पहली बार स्वेटर फर्म से वितरित किए जाने की योजना बनी और इससे लोगों के चेहरे खिल उठे। शिक्षकों के सिर से एक बोझ खत्म हुआ और स्वेटर वितरण बाहरी लोगों के हाथ में आ गया। टेंडर कराने में ही प्रशासन को दो बार प्रयास करना पड़ा। जैसे-तैसे एक संस्था को काम भी मिला। अब स्वेटर की उपलब्धता ही नहीं हो पा रही है। कहने को तो झंझरी के छावनी सरकार व रानीपुरवा में वितरण करा दिया गया और फिर मोकलपुर में स्वेटर बांट दिया गया। इससे आगे कदम नहीं बढ़ पा रहे हैं। जिले के 15 ब्लॉकों और नगर क्षेत्र में अभी तक स्वेटर नही बंट पाया है।
माना जा रहा है कि स्वेटर वितरण करने में बड़े स्तर से लापरवाही हो रही है। कार्य हथियाने के बाद अब स्वेटर के लिए मोलतोल हो रहा है। लुधियाना से लेकर स्थानीय स्तर पर स्वेटर देने वालों से रेट सेट किया जा रहा है। एक स्वेटर विक्रेता की मानें तो उसने भी संपर्क किया तो सौ रुपये प्रति स्वेटर से अधिक का रेट देने को तैयार ही नहीं हुए। ऐसे में स्वेटर वितरण की उम्मीद कम ही जताई जा रही है। विभाग की मानें तो 7 ब्लॉकों में स्वेटर पहुंच गया है। सत्यापन के बाद वितरण होगा, लेकिन अभी तक स्वेटर 15 ब्लॉकों के स्कूलों में नही पहुंच पाया है। विभाग का दावा मान भी लें तो 8 ब्लॉकों तक एक भी स्वेटर ही नही पहुंच पाया है। ऐसे में 3 लाख बच्चों तक स्वेटर नहीं पहुंच पाए हैं।
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पौने छह करोड़ का है स्वेटर वितरण का बजट
स्वेटर वितरण के लिए पौने छह करोड़ का बजट तय है। 3139 स्कूलों में पढ़ने वाले 3.36 लाख बच्चों को 30 नवम्बर तक स्वेटर देना है। शासन गंभीर है कि हर बच्चे को गुणवत्ता पूर्ण स्वेटर देना है। विभाग ने इसके लिए जेम पोर्टल से टेंडर तय किया। टेंडर करने में प्रशासन को काफी दिक्कतों को गुजरना पड़ा। फिलहाल जैसे-तैसे फर्म तो तय हो गई है लेकिन स्वेटर के इंतजाम में फर्म के पसीने छूट रहे हैं।
स्वेटर के नमूने नही किए गए सार्वजनिक
प्रशासन ने स्वेटर वितरण के लिए एक नमूना तय किया है। मानका उसी आधार पर है। हर स्कूल को नमूने की जानकारी होनी चाहिए, लेकिन किसी को नमूने की जानकारी नही दी गई है। सत्यापन अधिकारी भी स्वेटर सरसरी कर रहे हैं। नमूने और फर्म की शर्तों को सार्वजनिक न करने से स्वेटर वितरण में कठिनाई आना तय माना जा रहा है।
साइज के फेर में फंसा है 90 हजार नौनिहालों का स्वेटर
जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे 90 हजार से अधिक बच्चों का स्वेटर साइज के फेर में फंस गया है। कक्षा 5 के साथ ही जूनियर हाईस्कूल स्तर के कक्षा 8 तक के करीब 90 हजार बच्चे ऐसे हैं जिनके साइज का स्वेटर अभी तक नहीं आ पाया है। बताया जा रहा है कि साइज न होने से स्वेटर वितरण नहीं हो पा रहा है।
स्वेटर वितरण पर पूरी नजर है, मानक व संख्या के बाद ही सत्यापन कराया जा रहा है। साइज के बारे में फर्म को बता दिया गया है। सभी बच्चों को स्वेटर दिलाया जाएगा। कोई कमी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। -मनिराम सिंह, बीएसए
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पहली बार स्वेटर फर्म से वितरित किए जाने की योजना बनी और इससे लोगों के चेहरे खिल उठे। शिक्षकों के सिर से एक बोझ खत्म हुआ और स्वेटर वितरण बाहरी लोगों के हाथ में आ गया। टेंडर कराने में ही प्रशासन को दो बार प्रयास करना पड़ा। जैसे-तैसे एक संस्था को काम भी मिला। अब स्वेटर की उपलब्धता ही नहीं हो पा रही है। कहने को तो झंझरी के छावनी सरकार व रानीपुरवा में वितरण करा दिया गया और फिर मोकलपुर में स्वेटर बांट दिया गया। इससे आगे कदम नहीं बढ़ पा रहे हैं। जिले के 15 ब्लॉकों और नगर क्षेत्र में अभी तक स्वेटर नही बंट पाया है।
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माना जा रहा है कि स्वेटर वितरण करने में बड़े स्तर से लापरवाही हो रही है। कार्य हथियाने के बाद अब स्वेटर के लिए मोलतोल हो रहा है। लुधियाना से लेकर स्थानीय स्तर पर स्वेटर देने वालों से रेट सेट किया जा रहा है। एक स्वेटर विक्रेता की मानें तो उसने भी संपर्क किया तो सौ रुपये प्रति स्वेटर से अधिक का रेट देने को तैयार ही नहीं हुए। ऐसे में स्वेटर वितरण की उम्मीद कम ही जताई जा रही है। विभाग की मानें तो 7 ब्लॉकों में स्वेटर पहुंच गया है। सत्यापन के बाद वितरण होगा, लेकिन अभी तक स्वेटर 15 ब्लॉकों के स्कूलों में नही पहुंच पाया है। विभाग का दावा मान भी लें तो 8 ब्लॉकों तक एक भी स्वेटर ही नही पहुंच पाया है। ऐसे में 3 लाख बच्चों तक स्वेटर नहीं पहुंच पाए हैं।
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पौने छह करोड़ का है स्वेटर वितरण का बजट
स्वेटर वितरण के लिए पौने छह करोड़ का बजट तय है। 3139 स्कूलों में पढ़ने वाले 3.36 लाख बच्चों को 30 नवम्बर तक स्वेटर देना है। शासन गंभीर है कि हर बच्चे को गुणवत्ता पूर्ण स्वेटर देना है। विभाग ने इसके लिए जेम पोर्टल से टेंडर तय किया। टेंडर करने में प्रशासन को काफी दिक्कतों को गुजरना पड़ा। फिलहाल जैसे-तैसे फर्म तो तय हो गई है लेकिन स्वेटर के इंतजाम में फर्म के पसीने छूट रहे हैं।
स्वेटर के नमूने नही किए गए सार्वजनिक
प्रशासन ने स्वेटर वितरण के लिए एक नमूना तय किया है। मानका उसी आधार पर है। हर स्कूल को नमूने की जानकारी होनी चाहिए, लेकिन किसी को नमूने की जानकारी नही दी गई है। सत्यापन अधिकारी भी स्वेटर सरसरी कर रहे हैं। नमूने और फर्म की शर्तों को सार्वजनिक न करने से स्वेटर वितरण में कठिनाई आना तय माना जा रहा है।
साइज के फेर में फंसा है 90 हजार नौनिहालों का स्वेटर
जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे 90 हजार से अधिक बच्चों का स्वेटर साइज के फेर में फंस गया है। कक्षा 5 के साथ ही जूनियर हाईस्कूल स्तर के कक्षा 8 तक के करीब 90 हजार बच्चे ऐसे हैं जिनके साइज का स्वेटर अभी तक नहीं आ पाया है। बताया जा रहा है कि साइज न होने से स्वेटर वितरण नहीं हो पा रहा है।
स्वेटर वितरण पर पूरी नजर है, मानक व संख्या के बाद ही सत्यापन कराया जा रहा है। साइज के बारे में फर्म को बता दिया गया है। सभी बच्चों को स्वेटर दिलाया जाएगा। कोई कमी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। -मनिराम सिंह, बीएसए