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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   29 years after the scam ground surfaced

29 साल बाद सामने आया जमीन घोटाला

Mon, 12 Dec 2016 10:52 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Mon, 12 Dec 2016 10:52 PM IST
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मनरेगा घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, अवैध खनन के मामले में अव्च्वल गोंडा जिले में एक और घोटाला होने का प्रमाण प्रशासन के हाथ लग गया है। यह घोटाला 29 साल पहले नई तहसील निर्माण के दौरान का है। उस वक्त सरकारी जमीनों के अभिलेखों में हेराफेरी कर करीब एक हजार बीघे जमीन को लोगों ने अपने नाम करवा लिया था।
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यह जमीन घोटाला केवल दो राजस्व गांवों में अभी सामने आया है जिस पर 175 लोग भूमिधरी बनकर काबिज हैं। अब जब मामले की जांच शुरू हुई तो एक-एक घोटाले का सच बाहर आने लगा है। प्रशासन की नजर करीब छह राजस्व गांवों पर और टिकी है जिसके प्रमाण खोजने में तहसील प्रशासन जुट गया है और इसकी सूचना डीएम को भी भेजी जा रही है।
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करनैलगंज में तहसील स्थापना के समय पुरानी तहसील तरबगंज से अभिलेखों के स्थानांतरण में हेराफेरी कराकर भूमाफियाओं ने करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि का अभिलेखों में नाम दर्ज करा लिया।
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राजस्व ग्राम लालेमऊ एवं बसेरिया में सरकारी भूमि बंजर, नवीन परती, जलमग्न, खलिहान, ग्राम समाज के खातों में दर्ज भूमि को पट्टा दिखाकर नामांतरण बही एवं पट्टा प्रमाण रजिस्टर में खातेदारों के नाम दर्ज हैं। इसका प्रमाण उस समय मिला जब एसडीएम करनैलगंज को एक गोपनीय प्रार्थना पत्र मिला जिसमें पुराने अभिलेखों की नकल एवं खतौनी में दर्ज नामों की सूची मिली।

यही नहीं भूमि को पट्टा दिखाकर नाम से दर्ज किए जाने की सूचना के साथ ही गांव या जिले के बाहर रहने वाले कुछ लोगों के नाम भी भूमि दर्ज होने की शिकायत मिली। एसडीएम ने इतने समय से भूमि के घोटाले को समझने के लिए कुछ भूमिधरी खाताधारकों के नाम के खातों को खंगालना शुरू किया तो किसी भी पुराने अभिलेखों में इसकी पुष्टि नहीं हुई। भूमि करीब एक हजार बीघे से अधिक होने का अनुमान है जिसके लिए गोंडा अभिलेखागार से कुछ पुराने अभिलेखों को खंगालने के लिए पत्रावली मंगाने का आदेश एसडीएम ने दिया है। 

वर्ष 1987 में करनैलगंज तहसील बनी। तरबगंज व गोंडा तहसील से 389 राजस्व गांवों को काटकर करनैलगंज तहसील से जोड़ा गया। इसमें तीन परगना शामिल हैं। सबसे बड़ी परगना ग्वारिच के राजस्व क्षेत्र परसपुर के 92 राजस्व गांव, करनैलगंज क्षेत्र के 109 राजस्व गांव तरबगंज से कटकर करनैलगंज में शामिल हुआ था। इसी तरह गोंडा तहसील से परगना गोंडा व पहाड़ापुर के राजस्व क्षेत्र हलधरमऊ के 90 तथा कटरा के 98 राजस्व गांव को शामिल किया गया था।

अभिलेखों के स्थानांतरण के दौरान सरकारी जमीनों पर पट्टा दिखाकर दो राजस्व गांवों के 175 लोगों के नाम बतौर भूमिधरी दर्ज हो गए। खास बात यह है कि खलिहान, नवीन परती, जलमग्न व बंजर भूमि का पट्टा आवंटन नहीं हो सकता था। केवल ग्राम समाज की भूमि को ही पट्टे पर दिया जाना था। लेकिन भूमाफियाओं ने सभी प्रकार की सरकारी भूमि को अपने नाम करा लिया। तहसील प्रशासन के अनुसार करीब एक हजार बीघा जमीन के घोटाले का मामला अभी सामने आया है। कई और राजस्व गांव हैं जिसमें इस तरह के घोटाले सामने आ सकते हैं।


एसडीएम हरिशंकर लाल शुक्ला ने बताया कि फर्जी तरीके से सरकारी भूमि को अपने नाम दर्ज कराने के मामले की जानकारी डीएम को भी दी जा रही है। जिस पर जांच करके पूरी रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंपी जाएगी तथा फर्जी पट्टों को निरस्त कराया जाएगा। सभी भूमिधरों को नोटिस देकर उनसे पट्टा पुष्टि प्रमाण पत्र मांगा जाएगा। यदि प्रमाण न मिला तो सभी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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