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परीक्षा केंद्र बनने की दौड़ से बाहर हो जाएंगे 200 कालेज
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गोंडा। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र तय करने की कवायद शुरू होने के साथ ही कालेज संचालकों की धुकधुकी भी बढ़ गई है। जिले के 483 स्कूलों को केंद्र बनाने के लिए मानक के साथ ही इस बार उनकी मेरिट की सूची तैयार होनी है, जिसमें मानक में रास्तों की शर्त और प्रबंधकीय विवाद की स्थिति भी जुड़ी है। इनमें करीब 200 कालेजों की मुश्किलें बढ़ गई है। अंकों से ही राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन विद्यालयों की मेरिट सूची बनेगी।
स्कूलों को केंद्र बनाने के पहले ब्लाक स्तर की टीम छानबीन करेगी। जिसमें जिस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, उसके सामने कम से कम दस फीट चौड़ी सड़क होना अनिवार्य है। ऐसे किसी भी विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, जिसे पूर्व में ब्लैक लिस्ट किया हो।
जिनकी प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य के बीच विवाद चल रहा होगा। साथ ही ऐसे विद्यालय भी केंद्र नहीं बनाए जाएंगे, जिन निजी विद्यालयों में हॉस्टल सुविधा होगी। एक केंद्र पर कम से कम 250 और क्षमता के अनुसार अधिकतम 1200 परीक्षार्थियों को रखा जाएगा।
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परीक्षार्थियों के बीच छह-छह फीट की दूरी के हिसाब से बैठने की व्यवस्था हो। इसमें ही 200 स्कूलों के खरे उतरने की उम्मीद कम है। माना जा रहा है कि सोमवार से स्कूलों की लोकेशन अपडेट होने के साथ ही इन बिंदुओं की रिपोर्ट भी तैयार होनी है। दो दिसबंर तक ब्लाकों की टीम की रिपोर्ट के आधार तहसील स्तरीय टीम सत्यापन कर रिपोर्ट देगी।
बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाने के लिए सोमवार से सत्यापन का कार्य शुरू होगा। इसमें इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों को 20 व केवल हाईस्कूल स्तर के स्कूलों को 10 अंक मिलेंगे। इसी में जो हाईस्कूल स्तर के कालेज हैं उनके केंद्र बनने की राह में रोड़ा बनना शुरू हो जाएगा।
सही नही इस बार स्कूलों को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा। राजकीय माध्यमिक विद्यालय को 50, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय को 30 तथा वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय को 10 अंक दिए जाएंगे।
यदि स्कूल में पठन-पाठन सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में होता है तो 10 अंक, यदि स्कूल 2020 में परीक्षा केंद्र था तो 20 अंक तथा यदि वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षा में स्कूल का हाईस्कूल व इंटर का परीक्षाफल 90 फीसद रहा है तो भी दस-दस अंक मिलेंगे। इन अंकों की फेर में कई कालेजों को बाहर का रास्ता बोर्ड दिखा सकता है। माना जा रहा है कि अंकों के दायरे में कालेजों को आना ही होगा।
बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाने के लिए जुगाड़ का भी दांव खूब चलता है। स्थिति यह होती है कि पात्रता को पूरी करने वाले केंद्र बनने से चूक जाते हैं। कई कालेज जुगाड़ के दम पर केंद्र बन जाते हैं।
इस बार जुगाड़ पर अंकुश के लिए तीन स्तर की कमेटियां बनाई गई हैं। केंद्रों की रिपोर्ट ब्लाक की टीम के बाद तहसील की टीम सत्यापित करेगी। इसके बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी अंतिम निर्णय लेगी। आपत्तियों के निस्तारण में भी पूर्व में तय किये गये मानक के आधार पर ही फैसला होगी। इससे पहुंच वालों को अभी से पसीने छूट रहे हैं।
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स्कूलों को केंद्र बनाने के पहले ब्लाक स्तर की टीम छानबीन करेगी। जिसमें जिस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, उसके सामने कम से कम दस फीट चौड़ी सड़क होना अनिवार्य है। ऐसे किसी भी विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, जिसे पूर्व में ब्लैक लिस्ट किया हो।
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जिनकी प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य के बीच विवाद चल रहा होगा। साथ ही ऐसे विद्यालय भी केंद्र नहीं बनाए जाएंगे, जिन निजी विद्यालयों में हॉस्टल सुविधा होगी। एक केंद्र पर कम से कम 250 और क्षमता के अनुसार अधिकतम 1200 परीक्षार्थियों को रखा जाएगा।
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परीक्षार्थियों के बीच छह-छह फीट की दूरी के हिसाब से बैठने की व्यवस्था हो। इसमें ही 200 स्कूलों के खरे उतरने की उम्मीद कम है। माना जा रहा है कि सोमवार से स्कूलों की लोकेशन अपडेट होने के साथ ही इन बिंदुओं की रिपोर्ट भी तैयार होनी है। दो दिसबंर तक ब्लाकों की टीम की रिपोर्ट के आधार तहसील स्तरीय टीम सत्यापन कर रिपोर्ट देगी।
बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाने के लिए सोमवार से सत्यापन का कार्य शुरू होगा। इसमें इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों को 20 व केवल हाईस्कूल स्तर के स्कूलों को 10 अंक मिलेंगे। इसी में जो हाईस्कूल स्तर के कालेज हैं उनके केंद्र बनने की राह में रोड़ा बनना शुरू हो जाएगा।
सही नही इस बार स्कूलों को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा। राजकीय माध्यमिक विद्यालय को 50, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय को 30 तथा वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय को 10 अंक दिए जाएंगे।
यदि स्कूल में पठन-पाठन सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में होता है तो 10 अंक, यदि स्कूल 2020 में परीक्षा केंद्र था तो 20 अंक तथा यदि वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षा में स्कूल का हाईस्कूल व इंटर का परीक्षाफल 90 फीसद रहा है तो भी दस-दस अंक मिलेंगे। इन अंकों की फेर में कई कालेजों को बाहर का रास्ता बोर्ड दिखा सकता है। माना जा रहा है कि अंकों के दायरे में कालेजों को आना ही होगा।
बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाने के लिए जुगाड़ का भी दांव खूब चलता है। स्थिति यह होती है कि पात्रता को पूरी करने वाले केंद्र बनने से चूक जाते हैं। कई कालेज जुगाड़ के दम पर केंद्र बन जाते हैं।
इस बार जुगाड़ पर अंकुश के लिए तीन स्तर की कमेटियां बनाई गई हैं। केंद्रों की रिपोर्ट ब्लाक की टीम के बाद तहसील की टीम सत्यापित करेगी। इसके बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी अंतिम निर्णय लेगी। आपत्तियों के निस्तारण में भी पूर्व में तय किये गये मानक के आधार पर ही फैसला होगी। इससे पहुंच वालों को अभी से पसीने छूट रहे हैं।