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बाढ़ का दंश झेल रही 20 हजार आबादी

Sat, 20 Aug 2016 10:48 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Sat, 20 Aug 2016 10:48 PM IST
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20 thousand population is facing the problem of flooding
पानी से गुजरते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ से प्रभावित गांवों में पानी घटने लगा है, उसके बावजूद चार ग्राम पंचायतों के करीब दो दर्जन मजरे बाढ़ के पानी से अब भी प्रभावित हैं। बाकी गांवों में सड़कों पर बह रहा पानी अब निकल गया है। मार्गों पर आवागमन लगभग शुरू हो गया है। मगर करीब 20 हजार आबादी अभी भी बाढ़ का दंश झेल रही है। ग्रामीण मार्गों पर भरे पानी से होकर गुजर रहे हैं। 
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घाघरा का जलस्तर जैसे-जैसे खतरे के निशान से नीचे हो रहा है, वैसे-वैसे क्षेत्र में बाढ़ का पानी भी घटने लगा है। एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के बाद करनैलगंज तहसील की ग्राम पंचायत काशीपुर, घरकुइंया, प्रतापपुर, नैनुवा जगन्नाथपुर, पसका, चरसड़ी, बाबा मांझा, पाल्हापुर, गौरासिंहनापुुर, चन्दापुर किटौली, अतरसुइया मांझा, नकहरा, बहुवनमदार मांझा, दिवली, बैद्यपुर तथा गोंडा की सीमा पर बसी बाराबंकी जिले की ग्राम पंचायत कमियार, बेहटा, परसावल, रायपुर, नैपुरा भंयकर बाढ़ की विभीषिका झेल रहे थे।
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शनिवार को गांवों में बाढ़ की स्थिति बिल्कुुल बदलने लगी। अब तीन बड़ी ग्राम पंचायतें बहुवन मदार मांझा, घरकुंइया, दिवली व प्रतापपुर में जलभराव की स्थिति है, बाकी गांवों से पानी तेजी से निकल रहा है। नकहरा, काशीपुर गौरासिंहनापुर आदि गांवों में सड़क यातायात पूरी तरह से बंद रहा जो पानी घटने के बाद बहाल हो गया है। ग्राम बाबा मांझा में अब भी स्थिति खराब चल रही है।
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इस गांव को आने-जाने के लिए मार्ग पर पानी के साथ नाले पर बने पुल के ऊपर से पानी चल रहा है। शनिवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया। 105.956 पर जलस्तर चल रहा था। उधर, शनिवार को क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह ने बाढ़ से प्रभावित गांवों में राहत सामग्री बांटी। विधायक ने ग्राम घरकुंइया, भटपुरवा, सम्मयथान, दिवली में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री का वितरण किया।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए तीन नाले ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। प्रतापपुर-झिंगही नाला, चचरी नाला, व कमियार नाला क्षेत्र में तबाही रोकने के लिए बाढ़ के दुश्मन बने रहे। घाघरा नदी की धारा करनैलगंज की ओर मुड़ चुकी थी और तेजी से पानी क्षेत्र में आ रहा था, मगर कमियार नाले में बाबा मांझा के निकट लगा रेगुलेटर खोल दिए जाने से बाढ़ का पानी पुुुन: घाघरा में चला जाता है, इसलिए बाढ़ क्षेत्र का पानी तेजी से घट गया।


नालों से बाढ़ का पानी तीन भागों में बंट गया और क्षेत्र में बाढ़ की तबाही रुक गई। इन नालों के ब्लॉक होने के कारण वर्ष 2011 में बाढ़ ने क्षेत्र में जमकर कहर बरपाया था तथा बाढ़ से करीब 18 लोगों की जानें गईं थीं। 
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