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20 लेखपालों की गई नौकरी, समस्याएं जस की तस
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गोंडा के जिला पंचायत के सामने धरने पर बैठे लेखपाल।
- फोटो : GONDA
गोंडा। लेखपालों की समस्याएं तो जस की तस हैं, लेकिन कार्रवाई का सिलसिला जारी है। धरना देने वाले 20 लेखपालों को नौकरी से निकालने का आदेश अब तक जारी किया जा चुका है। इसके अलावा 345 लेखपालों की सर्विस पहले ही ब्रेक की जा चुकी है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी लेखपाल आंदोलन से पीछे नहीं हट रहे हैं। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार गुप्त व महामंत्री राम बहादुर पांडेय ने कहा कि मांगों के पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन की कार्रवाई हमारे आंदोलन को दबा नहीं सकता है।
लेखपालों के विरुद्ध प्रशासन की तरफ से हो रही कार्रवाईयों के बाद भी लेखपाल पूरे उत्साह में हैं और अपने मांगों को लेकर अडिग हैं। उप जिलाधिकारी वीर बहादुर यादव ने एक सप्ताह में 20 लेखपालों को बर्खास्त कर सेवा से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही शासन ने नो वर्क नो पे का फामूर्ले पर सर्विस ब्रेक कर दी थी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन लगातार लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है। जिले में 381 लेखपालों की तैनाती है और 29 लेखपाल धरने से अलग हैैं। वह प्रशासन के साथ हैं, इसके बावजूद 352 लेखपाल धरने में शामिल हैं।
इनमें से पहले 11 लेखपालों और फिर 8 लेखपालों बर्खास्त कर दिया था। कार्रवाईयों से विचलित हुए बिना लेखपाल लगातार धरना दे रहे हैं और इससे करीब 21 हजार लोगों के आवेदन लंबित हैं। इसमें सबसे ज्यादा मामले आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के मामले हैं। इसके अलावा राजस्व के कई मामले लंबित हैं, जिससे भूमि विवाद के मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा हैं। सोमवार को धरने की अध्यक्षता राकेश गुप्ता ने की और संचालन करुणेश कुमार व धर्मेन्द्र कुमार ने किया। इस दौरान सुधा सिंह, आकांक्षा मिश्रा, हितेश कुमार तिवारी, राम निवास तिवारी, बैकुंठ नाथ तिवारी, ज्ञानचंद्र भारती, मनोज कुमार, स्नेहलता, संगीता गौड़, दीपा सैनी आदि मौजूद रहे। जिलामंत्री राम बहादुर पांडे ने कहा कि अब संघर्ष आरपार की होगी।
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लेखपालों के विरुद्ध प्रशासन की तरफ से हो रही कार्रवाईयों के बाद भी लेखपाल पूरे उत्साह में हैं और अपने मांगों को लेकर अडिग हैं। उप जिलाधिकारी वीर बहादुर यादव ने एक सप्ताह में 20 लेखपालों को बर्खास्त कर सेवा से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही शासन ने नो वर्क नो पे का फामूर्ले पर सर्विस ब्रेक कर दी थी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन लगातार लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है। जिले में 381 लेखपालों की तैनाती है और 29 लेखपाल धरने से अलग हैैं। वह प्रशासन के साथ हैं, इसके बावजूद 352 लेखपाल धरने में शामिल हैं।
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इनमें से पहले 11 लेखपालों और फिर 8 लेखपालों बर्खास्त कर दिया था। कार्रवाईयों से विचलित हुए बिना लेखपाल लगातार धरना दे रहे हैं और इससे करीब 21 हजार लोगों के आवेदन लंबित हैं। इसमें सबसे ज्यादा मामले आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के मामले हैं। इसके अलावा राजस्व के कई मामले लंबित हैं, जिससे भूमि विवाद के मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा हैं। सोमवार को धरने की अध्यक्षता राकेश गुप्ता ने की और संचालन करुणेश कुमार व धर्मेन्द्र कुमार ने किया। इस दौरान सुधा सिंह, आकांक्षा मिश्रा, हितेश कुमार तिवारी, राम निवास तिवारी, बैकुंठ नाथ तिवारी, ज्ञानचंद्र भारती, मनोज कुमार, स्नेहलता, संगीता गौड़, दीपा सैनी आदि मौजूद रहे। जिलामंत्री राम बहादुर पांडे ने कहा कि अब संघर्ष आरपार की होगी।
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