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निष्ठा से दायित्व का किया जाएगा निर्वहन: डा ओपी मिश्र
Updated Mon, 22 Jan 2018 10:16 PM IST
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किसी बच्चे के साथ नाइंसाफी नहीं होगी : डॉ. ओपी मिश्र
राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का सदस्य नियुक्त होने पर बोले पूर्व प्राचार्य
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। जिंदगी भी एक शिक्षक के रूप में छात्रों और समाज को राह दिखाले वाले डॉ. ओपी मिश्रा को फिर एक बार शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अहम जिम्मेदारी मिली है। बलरामपुर के एमएलके डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. मिश्रा को राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। जिले के मेहनौन क्षेत्र के वीरपुर भोज गांव के रहने वाले डॉ. मिश्र बेहद सरल स्वभाव के हैं। उन्होंने बताया ने अपने सदस्य नियुक्त होने की जानकारी उन्हें अमर उजाला के माध्यम से ही मिली। पेश है उनसे संक्षिप्त बातचीत..
-चयन की जानकारी कैसे हुई?
-वास्तव में मुझे न उम्मीद थी न जानकारी। सोमवार की सुबह जब अमर उजाला अखबार खोला तो इसकी जानकारी हुई। प्रसन्नता हुई।
-अब जब आपको दायित्व मिला है तो इसका निर्वहन कैसे करेंगे?
-मैंने जीवन में अपने सभी दायित्वों का निर्वहन बड़ी जिम्मेदारी से किया है। अध्ययन, अध्यापन व राजनीति में संगठन के प्रति निष्ठा सभी में पूरी ईमानदारी से कार्य किया है। जिस विश्वास के साथ उन्हें दायित्व दिया गया है उसका वे पूरी तरह से पालन करेंगे। कभी मौका नहीं देंगे कि उनके निर्णय पर कोई उंगली उठाए।
-आपकी ईमानदार छवि रही और अधीनस्थ चयन आयोग पर हमेशा अंगुलियां उठती रही हैं इससे कैसे निपटेंगे?
-प्रदेश में भाजपा की सरकार है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ही जनता ने सरकार का निर्माण किया है। इसलिए बोर्ड में भी ईमानदार लोगों को रखा गया है। पूरी ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ कार्य किया जाएगा। किसी को अंगुली उठाने का मौका नहीं मिलेगा।
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यह पहला मौका है जब आपकी शिक्षा के अनुरूप कोई पद मिला है उसे कैसे देखते हैं?
-पद चाहे राजनीति का हो या संगठन का या फिर किसी आयोग के सदस्य या अध्यक्ष की कुर्सी का हो, सभी को उसके अनुसार ही पद मिलता है, हां यह जरूरत है कि वह जीवन भर बच्चों को शिक्षा देते रहे, इसलिए किसी भी बच्चे के साथ नाइंसाफी नहीं होगी।
-आप राजनीति में कब आए?
-वर्ष 1967 में जब अटल जी बलरामपुर से चुनाव लड़ रहे थे वह उनसे बहुत प्रभावित थे। लेकिन अध्ययन काल होने के कारण वह पढ़ाई में लगे रहे, लेकिन 1971 में जनसंघ से प्रताप नरायन तिवारी के साथ प्रचार में लग गए थे तभी से वह राजनीति में हैं।
-शिक्षण व राजनीति दोनों को कैसे साथ लेकर चले और आगे भी कहीं राजनीति आड़े न आ जाए?
-ऐसा नहीं है। शिक्षण कार्य करते समय वह पूरी निष्ठा से जुटे रहते थे। जब राजनीति करते थे तो शिक्षण कार्य पर उसका प्रभाव नहीं पड़ा। इसी तरह वह अधीनस्थ चयन आयोग के सदस्य होने के नाते इसका ध्यान रखेंगे कि संगठन व पार्टी का प्रभाव न पड़े और सभी के साथ ईमानदारी बरती जाए।
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राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का सदस्य नियुक्त होने पर बोले पूर्व प्राचार्य
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। जिंदगी भी एक शिक्षक के रूप में छात्रों और समाज को राह दिखाले वाले डॉ. ओपी मिश्रा को फिर एक बार शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अहम जिम्मेदारी मिली है। बलरामपुर के एमएलके डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. मिश्रा को राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है। जिले के मेहनौन क्षेत्र के वीरपुर भोज गांव के रहने वाले डॉ. मिश्र बेहद सरल स्वभाव के हैं। उन्होंने बताया ने अपने सदस्य नियुक्त होने की जानकारी उन्हें अमर उजाला के माध्यम से ही मिली। पेश है उनसे संक्षिप्त बातचीत..
-चयन की जानकारी कैसे हुई?
-वास्तव में मुझे न उम्मीद थी न जानकारी। सोमवार की सुबह जब अमर उजाला अखबार खोला तो इसकी जानकारी हुई। प्रसन्नता हुई।
-अब जब आपको दायित्व मिला है तो इसका निर्वहन कैसे करेंगे?
-मैंने जीवन में अपने सभी दायित्वों का निर्वहन बड़ी जिम्मेदारी से किया है। अध्ययन, अध्यापन व राजनीति में संगठन के प्रति निष्ठा सभी में पूरी ईमानदारी से कार्य किया है। जिस विश्वास के साथ उन्हें दायित्व दिया गया है उसका वे पूरी तरह से पालन करेंगे। कभी मौका नहीं देंगे कि उनके निर्णय पर कोई उंगली उठाए।
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-आपकी ईमानदार छवि रही और अधीनस्थ चयन आयोग पर हमेशा अंगुलियां उठती रही हैं इससे कैसे निपटेंगे?
-प्रदेश में भाजपा की सरकार है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ही जनता ने सरकार का निर्माण किया है। इसलिए बोर्ड में भी ईमानदार लोगों को रखा गया है। पूरी ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ कार्य किया जाएगा। किसी को अंगुली उठाने का मौका नहीं मिलेगा।
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यह पहला मौका है जब आपकी शिक्षा के अनुरूप कोई पद मिला है उसे कैसे देखते हैं?
-पद चाहे राजनीति का हो या संगठन का या फिर किसी आयोग के सदस्य या अध्यक्ष की कुर्सी का हो, सभी को उसके अनुसार ही पद मिलता है, हां यह जरूरत है कि वह जीवन भर बच्चों को शिक्षा देते रहे, इसलिए किसी भी बच्चे के साथ नाइंसाफी नहीं होगी।
-आप राजनीति में कब आए?
-वर्ष 1967 में जब अटल जी बलरामपुर से चुनाव लड़ रहे थे वह उनसे बहुत प्रभावित थे। लेकिन अध्ययन काल होने के कारण वह पढ़ाई में लगे रहे, लेकिन 1971 में जनसंघ से प्रताप नरायन तिवारी के साथ प्रचार में लग गए थे तभी से वह राजनीति में हैं।
-शिक्षण व राजनीति दोनों को कैसे साथ लेकर चले और आगे भी कहीं राजनीति आड़े न आ जाए?
-ऐसा नहीं है। शिक्षण कार्य करते समय वह पूरी निष्ठा से जुटे रहते थे। जब राजनीति करते थे तो शिक्षण कार्य पर उसका प्रभाव नहीं पड़ा। इसी तरह वह अधीनस्थ चयन आयोग के सदस्य होने के नाते इसका ध्यान रखेंगे कि संगठन व पार्टी का प्रभाव न पड़े और सभी के साथ ईमानदारी बरती जाए।