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सांसद, मंत्री व विधायकों की प्रतिष्ठा मतपेटियों में कैद

Wed, 22 Nov 2017 09:46 PM IST
Updated Wed, 22 Nov 2017 09:46 PM IST
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सांसद, मंत्री व विधायकों की प्रतिष्ठा मतपेटियों में कैद
सांसद, मंत्री व विधायकों की प्रतिष्ठा मतपेटियों में कैद
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गोंडा। जिले के सभी विधायकों, मंत्रियों व सांसदों को नगर निकाय चुनाव में जिस तरह से लगाया गया था उसे 2019 के चुनाव का आगाज माना जा रहा है, लेकिन आपसी द्वंद का असर बुधवार को कई नगर निकायों में दिखा।

खास कर नवाबगंज व खरगूपुर में। हालांकि शाम पांच बजे सांसदों, विधायकों व मंत्रियों की प्रतिष्ठा मतपेटियों में कैद हो गई। लेकिन असल कामयाबी एक दिसंबर को दिखेगी जब रिजल्ट आएगा।
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जिले की गोंडा नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद के चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी भले ही एकजुट दिखी लेकिन आपसी द्वंद साफ झलकता दिखाई दिया। संगठन व जनप्रतिनिधियों में खींचतान का असर वोटिंग पर भी दिखा।
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नवाबगंज नगर पालिका सीट से अलग-अलग पार्टियों से तीन बार चुनाव लड़ चुकीं अंजू सिंह भाजपा की उम्मीदवार थीं। यहां सांसद बृजभूषण का खेमा पूरी तरह विरोध में रहा। सांसद पुत्र करण भूषण शरण सिंह ने भाजपा प्रत्याशी अंजू सिंह के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारा और पूरी लाबिंग की।

नवाबगंज के ही कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री को संगठन की ओर से भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए लगाया गया था, जबकि सांसद का खेमा निर्दल प्रत्याशी सत्येंद्र सिंह के पक्ष में था। यहां सत्ता में ही दो फाड़ दिखा।

मतदान प्रतिशत भी यहां जबर्दस्त रहा। नवाबगंज नगर पालिका क्षेत्र गोंडा संसदीय क्षेत्र में आता हे और यहां के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह हैं। यहां उनकी प्रतिष्ठा भी मतपेटियों में कैद हो गई है। खरगूपुर नगर पंचायत में भाजपा का पूरा संगठन पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में खड़ा दिखा, जबकि भाजपा के ही राजीव रस्तोगी निर्दल मैदान में रहे और वह सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के बहुत करीब माने जा रहे हैं।

ऐसे में यहां भी संगठन व सत्ता में दो फाड़ रहा। परसपुर नगर पंचायत में पहली बार वोटिंग हुई। यहां से भाजपा ने विमला सिंह को प्रत्याशी बनाया था। क्षेत्रीय विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भइया दिखाई तक नहीं पड़े, जबकि पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह सपा प्रत्याशी तथा भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में खड़े नजर आए। कटरा बाजार व मनकापुर नगर पंचायत ही ऐसे नगर निकाय रहे जहां संगठन व सत्ता दोनों साथ दिखे। करनैलगंज में भाजपा ने किसी को उम्मीदवार ही नहीं बनाया था।

पहली बार नगर का लाभ लेंगे परसपुर वासी

ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बने परसपुर के लोगों ने पहली बार अपनी नगर की सरकार चुनने के लिए वोट डाला है। यहां भाजपा की प्रतिष्ठा भी दांव में लगी है। अब तो यहां के दिग्गजों की प्रतिष्ठा कैद हो चुकी है।


लेकिन एक बात जरूर है कि नाली, आवास आदि के विकास में विवादित रहे परसपुर की सत्ता अब नगर की हो गई है। ऐसा माना जा रहा है कि यहां के लोगों को अब नगरीय विकास का लाभ मिलेगा।
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