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नये साल पर मिलेगी 39 करोड़ से बने मण्डलीय हास्पिटल की सुविधा
Updated Sun, 08 Jul 2018 10:16 PM IST
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एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी स्वास्थ्य सुविधाएं
गोंडा। जिले के लोगों को नये साल पर 39 करोड़ रुपये से बनने वाले मण्डलीय हास्पिटल की आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। 300 बेड वाले इस चार मन्जिला आधुनिक मंडलीय अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को बड़े जीने, रैम्प व ऑटोमैटिक लिफ्ट की सहूलियत मिलेगी।
एक ही छत के नीचे सभी मरीजों को चिकित्सों को दिखाने के लिए ओपीडी, जांच के लिए लैब भर्ती करने के लिए वार्ड बनाया गया है। मण्डलीय हास्पिटल के भवन निर्माण का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है। कार्यदायी संस्था नये भवन को स्वास्थ्य विभाग को इस साल के दिसम्बर माह तक हैंडओवर कर देगी।
जिले की कुल करीब 32 लाख की आबादी है। जिला अस्पताल में इस समय औसतन रोजाना 2500 से 3000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। जिले की कुल आबादी को देखते हुए जिला अस्पताल के संसाधन इस समय नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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इस समय जिला अस्पताल में कुल 174 बेड की ही सुविधा है। मौसम बदलने के दौर में मरीजों की आमद बढ़ जाती है। ऐसे में कई बार गंभीर बीमार मरीज को भी भर्ती करने के लिए अस्पताल में बेड खाली नही मिलता है।
नये अस्पताल व ट्रामा सेंटर के भवन में करीब 225 मरीजों के बेड का इंतजाम रहेगा। इसी भवन में आधुनिक ओपीडी,लैब की भी सुविधा होगी।
जिला अस्पताल के मण्डलीय अस्पताल के रूप में आधुनिक सुविधाओं के साथ उच्चीकृत हो जाने का सीधा लाभ मरीजों व तीमारदारों को मिलेगा। अस्पताल भवन के सभी फ्लोर पर आने जाने के लिए बड़े चौड़े जीने,रैम्प के अलावा चार लिफ्ट लगाई जा रही है।
तैयार हो रहे 87 आवास
अस्पताल परिसर में ही डाक्टरों व अस्पताल के कर्मचारियों के लिए सुसज्जित आवास बन रहा है। अस्पताल में टाइप-1, टाइप-2, टाइप-3, टाइप-4 व टाइप-5 किस्म के आवास बन रहे हैं।
अस्पताल के डाक्टर व कर्मचारी सही समय से अस्पताल में उपलब्ध रहें इसके लिए अस्पताल परिसर में ही किनारे आवास का निर्माण चल रहा है। अस्पताल व आवास के निर्माण का कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण इकाई की ओर से कराया जा रहा है।
एमआरआई जांच के लिए बनेगा भवन
गोंडा। अब जिले के मरीजों को एमआरआई जांच के लिए राजधानी व दूसरे बड़े शहरों की भागदौड़ नही करनी पड़ेगी। एमआरआई जांच के लिए मण्डलीय अस्पताल परिसर में ही एक करोड़ की लागत से एक अलग भवन का निर्माण शुरू हो गया है।
एमआरआई जांच के लिए आधुनिक मशीन को स्थापित करने के लिए अस्पताल परिसर में ही अलग विभाग बनेगा। एमआरआई जांच की सुविधा हो जाने से मरीजों व उनके तीमारदारों को सहूलियत होगी। एमआरआई जांच की सुविधा अभी तक सिर्फ राजधानी के मेडिकल कालेज व पीजीआई में ही है। इस जांच के लिए लोगों को राजधानी जाना पड़ता है।
पांच करोड़ से बनेगा वाटरहार्वेस्टिंग व ड्रेनेज प्रोजेक्ट
मंडलीय हॉस्पिटल परिसर में पांच करोड़ की लागत से वाटर हार्वेस्टिंग व डे्रनेज सिस्टम बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। पानी को संरक्षित रखने के लिए वाटरहार्वेस्टिग बनेगा। बारिश का पानी वाटरहार्वेस्टिंग के जरिये सुरक्षित रहेगा जिसे फिलटर करके उपयोग में लाया जा सकेगा।
इसके अलावा परिसर व नाली आदि के गन्दे पानी की निकासी के लिए डे्रनेज प्रोजेक्ट बनाया गया। शासन के स्वीकृत के लिए इसे भेजा जा रहा है। अत्याधिक बारिश व अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले गंदे पानी का अस्पताल परिसर व वहां की नाली में जमाव नही रहेगा। अस्पताल का गंदा पानी नाले से होकर शहर से बाहर निकल जाएगा। इस व्यवस्था से अस्पताल में गंदगी नही होगी।
गोंडा। जिले के लोगों को नये साल पर 39 करोड़ रुपये से बनने वाले मण्डलीय हास्पिटल की आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। 300 बेड वाले इस चार मन्जिला आधुनिक मंडलीय अस्पताल में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को बड़े जीने, रैम्प व ऑटोमैटिक लिफ्ट की सहूलियत मिलेगी।
एक ही छत के नीचे सभी मरीजों को चिकित्सों को दिखाने के लिए ओपीडी, जांच के लिए लैब भर्ती करने के लिए वार्ड बनाया गया है। मण्डलीय हास्पिटल के भवन निर्माण का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है। कार्यदायी संस्था नये भवन को स्वास्थ्य विभाग को इस साल के दिसम्बर माह तक हैंडओवर कर देगी।
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जिले की कुल करीब 32 लाख की आबादी है। जिला अस्पताल में इस समय औसतन रोजाना 2500 से 3000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। जिले की कुल आबादी को देखते हुए जिला अस्पताल के संसाधन इस समय नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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इस समय जिला अस्पताल में कुल 174 बेड की ही सुविधा है। मौसम बदलने के दौर में मरीजों की आमद बढ़ जाती है। ऐसे में कई बार गंभीर बीमार मरीज को भी भर्ती करने के लिए अस्पताल में बेड खाली नही मिलता है।
नये अस्पताल व ट्रामा सेंटर के भवन में करीब 225 मरीजों के बेड का इंतजाम रहेगा। इसी भवन में आधुनिक ओपीडी,लैब की भी सुविधा होगी।
जिला अस्पताल के मण्डलीय अस्पताल के रूप में आधुनिक सुविधाओं के साथ उच्चीकृत हो जाने का सीधा लाभ मरीजों व तीमारदारों को मिलेगा। अस्पताल भवन के सभी फ्लोर पर आने जाने के लिए बड़े चौड़े जीने,रैम्प के अलावा चार लिफ्ट लगाई जा रही है।
तैयार हो रहे 87 आवास
अस्पताल परिसर में ही डाक्टरों व अस्पताल के कर्मचारियों के लिए सुसज्जित आवास बन रहा है। अस्पताल में टाइप-1, टाइप-2, टाइप-3, टाइप-4 व टाइप-5 किस्म के आवास बन रहे हैं।
अस्पताल के डाक्टर व कर्मचारी सही समय से अस्पताल में उपलब्ध रहें इसके लिए अस्पताल परिसर में ही किनारे आवास का निर्माण चल रहा है। अस्पताल व आवास के निर्माण का कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण इकाई की ओर से कराया जा रहा है।
एमआरआई जांच के लिए बनेगा भवन
गोंडा। अब जिले के मरीजों को एमआरआई जांच के लिए राजधानी व दूसरे बड़े शहरों की भागदौड़ नही करनी पड़ेगी। एमआरआई जांच के लिए मण्डलीय अस्पताल परिसर में ही एक करोड़ की लागत से एक अलग भवन का निर्माण शुरू हो गया है।
एमआरआई जांच के लिए आधुनिक मशीन को स्थापित करने के लिए अस्पताल परिसर में ही अलग विभाग बनेगा। एमआरआई जांच की सुविधा हो जाने से मरीजों व उनके तीमारदारों को सहूलियत होगी। एमआरआई जांच की सुविधा अभी तक सिर्फ राजधानी के मेडिकल कालेज व पीजीआई में ही है। इस जांच के लिए लोगों को राजधानी जाना पड़ता है।
पांच करोड़ से बनेगा वाटरहार्वेस्टिंग व ड्रेनेज प्रोजेक्ट
मंडलीय हॉस्पिटल परिसर में पांच करोड़ की लागत से वाटर हार्वेस्टिंग व डे्रनेज सिस्टम बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। पानी को संरक्षित रखने के लिए वाटरहार्वेस्टिग बनेगा। बारिश का पानी वाटरहार्वेस्टिंग के जरिये सुरक्षित रहेगा जिसे फिलटर करके उपयोग में लाया जा सकेगा।
इसके अलावा परिसर व नाली आदि के गन्दे पानी की निकासी के लिए डे्रनेज प्रोजेक्ट बनाया गया। शासन के स्वीकृत के लिए इसे भेजा जा रहा है। अत्याधिक बारिश व अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले गंदे पानी का अस्पताल परिसर व वहां की नाली में जमाव नही रहेगा। अस्पताल का गंदा पानी नाले से होकर शहर से बाहर निकल जाएगा। इस व्यवस्था से अस्पताल में गंदगी नही होगी।