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...काश पीछे होता दरवाजा तो नहीं जाती इतनी जान
Updated Mon, 05 Jun 2017 10:04 PM IST
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...काश पीछे होता दरवाजा तो नहीं जाती इतनी जान
ट्रक से टक्कर के बाद डीजल फैलने से बस में हुआ ब्लास्ट
ड्राइविंग सीट छोड़ किसी के पास नहीं रह गया था कोई विकल्प
राजेश तिवारी
गोंडा। जैसे-जैसे दुनिया हाईटेक हो रही है, वैसे-वैसे मार्डन तकनीकी भी आने लगी हैं। लेकिन बड़े हैरत की बात है कि रोडवेज महकमा दुनिया के साथ-साथ बसों की डिजाइन और सेफ्टी को लेकर कोई खास व्यवस्थाएं बसों में नहीं कर पाया है। यहां तक कि जो रोडवेज बसों में जो आपातकालीन दरवाजा कभी बस के पीछे हुआ करता था, उसे अब कंडक्टर सीट के ठीक के दूसरे छोर पर कर दिया गया है। वह भी थ्री सीटर कुर्सी से होकर, जिससे निकल पाना हर किसी के लिए मुश्किल है। रविवार की आधी रात बरेली में हुए हादसे ने एक बार फिर से रोडवेज की इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बस की ट्रक से टक्कर और इसके बाद हुए ब्लास्ट के बीच में केवल चंद पलों का ही फासला था लोगों के पास अपनी जान बचाने का। ऐसे में जो लोग कंडक्टर सीट के पीछे बैठे थे, उनकी यही बस कब्रगाह बन गई। जबकि खुद कंडक्टर अख्तर अजीज को बस से निकालने में न सिर्फ उनका हाथ टूटा, बल्कि पैर भी बुरी तरह झुलस गया। सवाल यही है कि ड्राइविंग सीट से टक्कर के बाद जो आपातकालीन दरवाजा लॉक हो गया था, अगर वही दरवाजा पीछे होता तो शायद इतनी बड़ी तादात में लोगों की जान न जाती।
बाक्स
आपातकालीन दरवाजा हुआ लॉक
ट्रक के बस में टक्कर मारने के बाद न सिर्फ बस का आपातकालीन डोर लॉक हो गया था, बल्कि बस के बेंट हो जाने से कंडक्टर के सामने वाला दरवाजा भी बड़ी मुश्किल मे खुला। बरेली में घटनास्थल पर पहुंचे रोडवेज के आरएम जुनैद अहमद अंसारी की मानें तो ड्राइविंग सीट के ठीक बगल व कंडक्टर वाला दरवाजा, बस में खुला था। इसी दरवाजे से 15 लोगों ने नीचे कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि रात में आग का गोला बनी बस में ड्राइविंग सीट के पास दो व्यक्तियों के शव भी जली हालत में बरामद किए गए। इतना ही नहीं हादसे में बस के कंडक्टर अख्तर अजीज को गेट से निकालने के चक्कर में उनका एक हाथ भी टूट गया था।
इनसेट
दो लगे भाइयों में एक लापता
बरेली में हादसे का शिकार हुई गोंडा डिपो की इसी बस से अपने गांव डिडिसिया खुर्द आ रहे दो सगे भाईयों में जहां एक भाई सोनू का बरेली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है तो वहीं उसका छोटा भाई अनिल लापता है। अस्पताल में भर्ती सोनू ने घरवालों से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि जिस समय बस में आग लगी, सारे लोग ड्राइविंग सीट वाले रास्ते से भागने के लिए उसकी ओर दौडे़ थे, क्योंकि कंडक्टर और आपातकालीन खिड़की वाला दरवाजा लॉक था। उसी दरवाजे से वह भी नीचे कूदा। साथ ही उसका भाई अनिल भी। लेकिन देरशाम समाचार भेजे जाने तक अनिल के सम्बंध में किसी तरह की कोई सूचना नहीं मिल पाई।
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फोटो-22
इनसेट
खुद के साथ 5 लोगों की बचाई जान
दिल्ली से अपने घर गोंडा के मोहल्ला महराजगंज आ रहे मसूद अहमद सिद्दीकी भी गोंडा डिपो की इस बस में सवार थे। बतौर मसूद रविवार की रात शहजहांपुर मोड़ के पास जैसे ही उनकी बस पहुंची कि एक टक ने बस में ड्राइविंग सीट के साइड में ठीक डीजल टैंक के पास टक्कर मार दी थी। जिससे डीजल टैंक फट गया और बस मे आग लग गई। चूंकि वह बस में आगे बैठे थे। इसलिए जैसे ही आग लगी, वह बस से नीचे कूद गए और उन्होंने 11 साल के एक बच्चे के अलावा ड्राइवर, दो महिलाओं सहित बस के कंडक्टर को मिलाकर कुल 6 लोगों को खींच-खींच कर बाहर निकाला। लेकिन डीजल फैलने तक तो कुछ नहीं हुआ, इसके बाद अचानक बस ब्लास्ट कर गई। बस में जितने भी लोग कंडक्टर सीट के पीछे बैठे थे, वह सब उसी में जलकर मर गए। इस हादसे से सहमे मसूद की जुबान पूरी घटना की बारीकी से तस्दीक करते हुए कई बार लड़खड़ाई और आंखे तक भर आई। मसूद की मानें तो अगर कहीं बस में एक दरवाजी पीछे होता तो शायद पीछे रहने वाले लोग भी इस बस हादसे में बच सकते थे। मसूद के मुताबिक बस में ज्यातार लोग परसपुर, रगड़गंज और बेलसर के थे, क्योंकि यह बस परसपुर होते हुए ही आती-जाती थी।
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ट्रक से टक्कर के बाद डीजल फैलने से बस में हुआ ब्लास्ट
ड्राइविंग सीट छोड़ किसी के पास नहीं रह गया था कोई विकल्प
राजेश तिवारी
गोंडा। जैसे-जैसे दुनिया हाईटेक हो रही है, वैसे-वैसे मार्डन तकनीकी भी आने लगी हैं। लेकिन बड़े हैरत की बात है कि रोडवेज महकमा दुनिया के साथ-साथ बसों की डिजाइन और सेफ्टी को लेकर कोई खास व्यवस्थाएं बसों में नहीं कर पाया है। यहां तक कि जो रोडवेज बसों में जो आपातकालीन दरवाजा कभी बस के पीछे हुआ करता था, उसे अब कंडक्टर सीट के ठीक के दूसरे छोर पर कर दिया गया है। वह भी थ्री सीटर कुर्सी से होकर, जिससे निकल पाना हर किसी के लिए मुश्किल है। रविवार की आधी रात बरेली में हुए हादसे ने एक बार फिर से रोडवेज की इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बस की ट्रक से टक्कर और इसके बाद हुए ब्लास्ट के बीच में केवल चंद पलों का ही फासला था लोगों के पास अपनी जान बचाने का। ऐसे में जो लोग कंडक्टर सीट के पीछे बैठे थे, उनकी यही बस कब्रगाह बन गई। जबकि खुद कंडक्टर अख्तर अजीज को बस से निकालने में न सिर्फ उनका हाथ टूटा, बल्कि पैर भी बुरी तरह झुलस गया। सवाल यही है कि ड्राइविंग सीट से टक्कर के बाद जो आपातकालीन दरवाजा लॉक हो गया था, अगर वही दरवाजा पीछे होता तो शायद इतनी बड़ी तादात में लोगों की जान न जाती।
बाक्स
आपातकालीन दरवाजा हुआ लॉक
ट्रक के बस में टक्कर मारने के बाद न सिर्फ बस का आपातकालीन डोर लॉक हो गया था, बल्कि बस के बेंट हो जाने से कंडक्टर के सामने वाला दरवाजा भी बड़ी मुश्किल मे खुला। बरेली में घटनास्थल पर पहुंचे रोडवेज के आरएम जुनैद अहमद अंसारी की मानें तो ड्राइविंग सीट के ठीक बगल व कंडक्टर वाला दरवाजा, बस में खुला था। इसी दरवाजे से 15 लोगों ने नीचे कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि रात में आग का गोला बनी बस में ड्राइविंग सीट के पास दो व्यक्तियों के शव भी जली हालत में बरामद किए गए। इतना ही नहीं हादसे में बस के कंडक्टर अख्तर अजीज को गेट से निकालने के चक्कर में उनका एक हाथ भी टूट गया था।
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दो लगे भाइयों में एक लापता
बरेली में हादसे का शिकार हुई गोंडा डिपो की इसी बस से अपने गांव डिडिसिया खुर्द आ रहे दो सगे भाईयों में जहां एक भाई सोनू का बरेली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है तो वहीं उसका छोटा भाई अनिल लापता है। अस्पताल में भर्ती सोनू ने घरवालों से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि जिस समय बस में आग लगी, सारे लोग ड्राइविंग सीट वाले रास्ते से भागने के लिए उसकी ओर दौडे़ थे, क्योंकि कंडक्टर और आपातकालीन खिड़की वाला दरवाजा लॉक था। उसी दरवाजे से वह भी नीचे कूदा। साथ ही उसका भाई अनिल भी। लेकिन देरशाम समाचार भेजे जाने तक अनिल के सम्बंध में किसी तरह की कोई सूचना नहीं मिल पाई।
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खुद के साथ 5 लोगों की बचाई जान
दिल्ली से अपने घर गोंडा के मोहल्ला महराजगंज आ रहे मसूद अहमद सिद्दीकी भी गोंडा डिपो की इस बस में सवार थे। बतौर मसूद रविवार की रात शहजहांपुर मोड़ के पास जैसे ही उनकी बस पहुंची कि एक टक ने बस में ड्राइविंग सीट के साइड में ठीक डीजल टैंक के पास टक्कर मार दी थी। जिससे डीजल टैंक फट गया और बस मे आग लग गई। चूंकि वह बस में आगे बैठे थे। इसलिए जैसे ही आग लगी, वह बस से नीचे कूद गए और उन्होंने 11 साल के एक बच्चे के अलावा ड्राइवर, दो महिलाओं सहित बस के कंडक्टर को मिलाकर कुल 6 लोगों को खींच-खींच कर बाहर निकाला। लेकिन डीजल फैलने तक तो कुछ नहीं हुआ, इसके बाद अचानक बस ब्लास्ट कर गई। बस में जितने भी लोग कंडक्टर सीट के पीछे बैठे थे, वह सब उसी में जलकर मर गए। इस हादसे से सहमे मसूद की जुबान पूरी घटना की बारीकी से तस्दीक करते हुए कई बार लड़खड़ाई और आंखे तक भर आई। मसूद की मानें तो अगर कहीं बस में एक दरवाजी पीछे होता तो शायद पीछे रहने वाले लोग भी इस बस हादसे में बच सकते थे। मसूद के मुताबिक बस में ज्यातार लोग परसपुर, रगड़गंज और बेलसर के थे, क्योंकि यह बस परसपुर होते हुए ही आती-जाती थी।