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अब नदी की धारा ही खत्म करने की शुरू हुई मुहिम

Updated Mon, 05 Jun 2017 03:48 PM IST
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टेढ़ी नदी को कूड़े से पाट धारा मोड़ने की कोशिश
अवैध कब्जा करने के लिए दबंगों ने शुरू किया नदी में निर्माण
फोटो-23-24
पर्यावरण पर विशेष
अमर उजाला ब्यूरो
बालपुर(गोंडा)। गंदगी, कूड़ा व नालों के पानी से कराहती टेढ़ी नदी की धारा को ही अवरुद्ध करने का कुत्सित प्रयास शुरू हो गया है। दबंग भू माफिया नदी के कछार में अवैध कब्जा करने के लिए नदी को कूड़े से पाटकर इसकी धारा को आगे करने कोशिश कर रहे हैं। यह पूरा वाकया गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर कस्बे के निकट हो रहा है जहां से प्रतिदिन अधिकारियों की आवाजाही होती है। पांच जून को पर्यावरण दिवस है और जल व वायू प्रदूषण देखना है तो बालपुर इसका जीता जागता उदाहरण है।

पर्यावरण को जल, वायू प्रदूषण से बचाने के लिए जहां पौधों को लगाने की मुहिम चलाई जा रही है और प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन गोंडा में न पेड़ों की कटान रुक रही है और न नदियों या प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने की पहल हो रही है। इसके उलट जिले की नदियों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश हो रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जिले की टेढ़ी, बिसुही नदियां हैं। बहराइच के चित्तौड़ा झील से निकलने वाली टेढ़ी नदी जिले के आठ ब्लॉक क्षेत्रों से होकर गुजरती है। गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर कस्बे के निकट टेढ़ी नदी की जमीन पर ही कब्जे शुरू हो गए हैं। नदी में पानी कम होने की वजह से जहां धारा हुआ करती थी वहां पर दबंग लोगों ने निर्माण शुरू कर दिया है। साथ ही नदी को कूड़े से पाटकर उसकी धारा को आगे करने की कोशिश हो रही है।। इसके अलावा नये पुल व पुराने पुल के बीच गैपिंग में दोनों तरफ से कूड़ा डालकर धारा को रोकने की कोशिश हो रही है। इसी पुल से रोज जिले आला अधिकारी गुजरते हैं लेकिन अब किसी ने इस तरफ ध्यान देने की कोशिश नहीं की।



इनसेट
प्रदूषित हो चुकी है नदी
पौराणिक नदी कुटिला जिसे टेढ़ी कहते हैं उसके तट इतिहास संजोए हैं। नदी के विभिन्न हिस्सों पर घाट थे जो अब खत्म हो चुके हैं साथ ही कई स्थानों पर सती चौरा भी हुआ करता था जो अब आने वाले समय में केवल किवदंतियों में सुनने को मिलेगा। नदी के विभिन्न हिस्सों में कटरा बाजार, बालपुर बाजार सहित अन्य कस्बों का गंदा पानी गिराया जाता है। जब पर्यावरण को सुरक्षित रखने की बात आती है तो इस नदी की दुर्दशा देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण कैसे रुकेगा और लोगों की जिम्मेदारी कब तय होगी।

इनसेट
जानबूझ कर जागरूक नहीं होना चाहते लोग
कस्बे में प्रेक्टिस कर रहे डा मार्कण्डेय त्रिपाठी व पप्पू तिवारी कहते हैं कि हर व्यक्ति गंदगी को लेकर टिप्पणी करता है। सफाई की मुहिम चलाने की बात की जाती है लेकिन स्वयं से किसी ने पहल करने की कोशिश नहीं की। केवल सोशल मीडिया व समाचारों में मुहिम चलने से न तो गंदगी दूर होगी और न पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। नदी तो प्राकृतिक जल स्रोत है जिसमें हजारों लोगों को जीवन मिलता है।
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वर्जन्
नदी प्राकृतिक जल स्रोत होने के बावजूद इससे हजारों जीव जंतुओं को जीवन प्रदान करती है। लोगों को स्वयं जागरूक होना होगा। प्रशासन भी लोगों को जागरूक करने की कोशिश करेगा। यदि इस पर भी लोग नहीं मानते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई भी होगी। अवैध कब्जा ढहाया जाएगा।
-जेबी सिंह, डीएम गोंडा

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