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Gonda News: खातों में जमा 144 करोड़, खोजे नहीं मिल रहे वारिस
Wed, 19 Nov 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 19 Nov 2025 12:31 AM IST
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गोंडा। जिले की विभिन्न बैंकों में करीब नौ लाख से अधिक खातों में जमा लगभग 144 करोड़ रुपये पर संकट मंडरा रहा है। खाताधारक वर्षों से बैंक नहीं पहुंचे हैं, जिससे यह राशि अब भारतीय रिजर्व बैंक के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड यानी डेफ खाते में स्थानांतरित होने की कगार पर है। बैंक अधिकारियों के अनुसार, यदि खातों में 10 वर्षों तक कोई लेनदेन नहीं होता है तो नियमानुसार यह राशि डेफ फंड में चली जाती है। इसके बाद खाताधारकों या उनके वारिस को पैसा प्राप्त करने के लिए लंबी और जटिल प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
अक्तूबर से दिसंबर तक बैंक स्तर पर आपकी पूंजी, आपका अधिकार अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत बैंक खातेदारों से संपर्क कर और उन्हें पैसा वापस करने के लिए शिविर लगा रहा है। एक नवंबर को सदर तहसील में जागरूकता कैंप लगाया गया था, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और अपना दावा किया। कई खाताधारकों के लंबे समय से बंद पड़े खातों को सक्रिय कर उनके पैसे लौटा दिए।
अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में खाताधारक अपने स्थायी पते पर नहीं मिल रहे हैं। कई लोग दूसरे शहरों में जा बसे हैं, जबकि अनेक खातों की तस्दीक नहीं हो पा रही। स्थिति यह है कि सरकारी खातों, ग्राम निधि और शिक्षा निधियों में भी करोड़ों रुपये वर्षों से बिना उपयोग पड़े हैं।
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अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक (एलडीएम) विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि विभागों, शिक्षा अधिकारियों, ग्राम प्रधानों और अन्य जिम्मेदार लोगों से संपर्क किया गया, परंतु बहुतों ने अपने खाते को सक्रिय करने में रुचि नहीं दिखाई।
पैसा न लेने पर होगी बड़ी मुश्किल
एलडीएम विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि 2 से 10 वर्ष तक खाते में लेनदेन न होने पर संबंधित राशि आरबीआई के डेफ फंड में चली जाती है। डेफ फंड में जाने के बाद बैंक यह राशि सरकार को स्थानांतरित कर देता है, जिसका उपयोग शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों में किया जाता है। बाद में खाताधारक या वारिस को राशि वापस पाने के लिए प्रमाणपत्र, सत्यापन, पुलिस रिपोर्ट, बैंक जांच जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
क्यों नहीं आ रहे खाताधारक
बैंक अधिकारियों की मानें तो सबसे अधिक धनराशि सरकारी विभागों की है, जिसे वर्षों से उपयोग नहीं किया गया। शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायतों और अन्य सरकारी इकाइयों के खाते वर्षों से असक्रिय पड़े हैं। यदि कोई अधिकारी पैसा लेने आता है, तो उसे राशि मूल मद में ही खर्च करनी होगी, इसलिए कई विभाग इसमें रुचि नहीं दिखा रहे।
इनसेट
यह है समाधान का तरीका
- खाताधारकों को तुरंत बैंक जाकर केवाईसी अपडेट कराना चाहिए।
- सरकारी विभागों को अपने निष्क्रिय खातों का ऑडिट कर उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए।
- 10 वर्ष पूरे होने से पहले खाते में कोई भी छोटा ट्रांजेक्शन कर खाता सक्रिय किया जा सकता है।
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अक्तूबर से दिसंबर तक बैंक स्तर पर आपकी पूंजी, आपका अधिकार अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत बैंक खातेदारों से संपर्क कर और उन्हें पैसा वापस करने के लिए शिविर लगा रहा है। एक नवंबर को सदर तहसील में जागरूकता कैंप लगाया गया था, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और अपना दावा किया। कई खाताधारकों के लंबे समय से बंद पड़े खातों को सक्रिय कर उनके पैसे लौटा दिए।
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अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में खाताधारक अपने स्थायी पते पर नहीं मिल रहे हैं। कई लोग दूसरे शहरों में जा बसे हैं, जबकि अनेक खातों की तस्दीक नहीं हो पा रही। स्थिति यह है कि सरकारी खातों, ग्राम निधि और शिक्षा निधियों में भी करोड़ों रुपये वर्षों से बिना उपयोग पड़े हैं।
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अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक (एलडीएम) विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि विभागों, शिक्षा अधिकारियों, ग्राम प्रधानों और अन्य जिम्मेदार लोगों से संपर्क किया गया, परंतु बहुतों ने अपने खाते को सक्रिय करने में रुचि नहीं दिखाई।
पैसा न लेने पर होगी बड़ी मुश्किल
एलडीएम विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि 2 से 10 वर्ष तक खाते में लेनदेन न होने पर संबंधित राशि आरबीआई के डेफ फंड में चली जाती है। डेफ फंड में जाने के बाद बैंक यह राशि सरकार को स्थानांतरित कर देता है, जिसका उपयोग शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों में किया जाता है। बाद में खाताधारक या वारिस को राशि वापस पाने के लिए प्रमाणपत्र, सत्यापन, पुलिस रिपोर्ट, बैंक जांच जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
क्यों नहीं आ रहे खाताधारक
बैंक अधिकारियों की मानें तो सबसे अधिक धनराशि सरकारी विभागों की है, जिसे वर्षों से उपयोग नहीं किया गया। शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायतों और अन्य सरकारी इकाइयों के खाते वर्षों से असक्रिय पड़े हैं। यदि कोई अधिकारी पैसा लेने आता है, तो उसे राशि मूल मद में ही खर्च करनी होगी, इसलिए कई विभाग इसमें रुचि नहीं दिखा रहे।
इनसेट
यह है समाधान का तरीका
- खाताधारकों को तुरंत बैंक जाकर केवाईसी अपडेट कराना चाहिए।
- सरकारी विभागों को अपने निष्क्रिय खातों का ऑडिट कर उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए।
- 10 वर्ष पूरे होने से पहले खाते में कोई भी छोटा ट्रांजेक्शन कर खाता सक्रिय किया जा सकता है।