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खतरे के निशान से ऊपर घाघरा बढ़ा रही बेचैनी
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:31 PM IST
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72 घंटे से खतरे के निशान से ऊपर घाघरा बढ़ रही बेचैनी
कटान स्थल से लगातार करनैलगंज व परसपुर के गांवों में फैल रहा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/परसपुर। 72 घंटों से खतरे के निशान से ऊपर चल रही घाघरा का पानी बड़ी तेजी से करनैलगंज और परसपुर के गांवों में फैल रहा है। करनैलगंज में बंधे के किनारे बसे तमाम गांव और उनके मजरे लबालब पानी में डूबे हुए हैं। जबकि बाढ़ के पानी ने परसपुर के बहुवनमदार माझा गांव के आधा दर्जन मजरों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। शुक्रवार को इसके 6 से ऊपर मजरे पानी में जलमग्न हो गए। आशंका है अगर अगले 24 घंटों में नदी के जलस्तर में गिरवाट नहीं आती है तो कई और गांव कल तक घाघरा से फैलने वाले पानी की जद में होंगे।
एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी लगातार खतरे के निशान 106.07 से ऊपर बह रही है। वहीं कल तक रह-रह कर बढने वाला सरयू नदी का जलस्तर शुक्रवार की दोपहर बाद स्थिर हो गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर नेपाल से कोई पानी इधर 24 से 48 घंटों के भीतर नहीं छोड़ा गया होगा, तो दोनों नदियों का जलस्तर घटकर खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। क्योंकि शुक्रवार को गुरुवार की अपेक्षा नदी में सिर्फ 1.87 लाख क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज हुआ। जबकि गुरुवार को इससे कहीं ज्यादा 2.25 लाख क्यूसेक पानी नदी में डिस्चार्ज हो रहा था। 72 घंटों से लगातार खतरे के निशान से ऊपर घाघरा का पानी तेजी से करनैलगंज के साथ ही परसपुर के मजरों को अपने आगोश में लेता जा रहा है। जिससे प्रभावित मजरों की संख्या रोज ही 10 से 20 मजरे बढ़ जा रही है। शुक्रवार को इसके पानी की जद में आने से बहुवनमदार माझा गांव के गोडिय़नपुरवा, बेनीसिंह के पुरवा, कंगडनपुरवा, तिवारीपुरवा, नउवनपुरवा भी पानी से जलमग्न हो गए। यहां की प्रधान अनुपमा यादव ने बताया कि नदी का पानी पूरब छोर के गांवों में तेजी से बढ़ रहा है। अगर पानी बढ़ने की यही गति रही तो शनिवार को गांव के एक दर्जन मजरे इससे प्रभावित हो जाएंगे। नदी के बढ़ते पानी से करनैलगंज इलाके में फैलने के चलते यहां के 80 से ऊपर मजरे प्रभावित हैं। जहां किसी मजरे में घुटने तक तो कहीं कमर तक पानी भरा है। पिछले 72 घंटों से नदी का जलस्तर न तो कम हो रहा है न ही बढ़ रहा है। इस वजह से इसके पानी का फैलाव पहले की तरह हो रहा है। करनैलगंज के कई गांवों को जाने वाली सडक़ों पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। इस वजह से लोगों को नाव के रास्ते ही आना-जाना पड़ रहा है। बाढग़्रस्त इलाकों के लोग लगातार पड़ रही गर्मी से बेहाल है, वहीं इससे संक्रामक रोगो के फैलने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
इनसेट
घाघरा नदी पिछले 24 घंटे से कभी दो सेमी बढ़ जा रही है तो कभी घट जाती है। खतरे के निशान से ऊपर घाघरा का जलस्तर अगले कुछ घंटों में कम होने की उम्मीद है। क्योंकि शुक्रवार को नदी में 1.87 लाख क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज हुआ है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों को प्रशासन से हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है। शुक्रवार को भी बाढग़्रस्त इलाकों में 5 हजार से ऊपर लंच पैकेट बांटे गए।
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-त्रिलोकी सिंह, अपर जिलाधिकारी गोंडा
इनसेट
दोनों मंत्रियों का टला दौरा
बाढ़ प्रभावित करनैलगंज इलाके का हवाई दौरा करने के बाद शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ राज्यमंत्री स्वाती सिंह को जिले आकर एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करना था। जिसके लिए सर्किट हाउस में सारे इंतजाम भी कर रखे गए थे। लेकिन ऐन मौके पर दोनों मंत्रियों का जिले में आने का कार्यक्रम रद्द हो गया। जिससे बाढ़ ग्रस्त इलाकों में पीड़ितों को मिलने वाली संभावित मदद की कोई जानकारी नहीं मिल पाई। न ही बाढ़ के मसले पर सरकार की क्या तैयारी है, इसका ही कोई पता चल पाया। बता दे कि इससे पहले भी राज्यमंत्री स्वाती सिंह का एक बार कार्यक्रम टल चुका है।
कटान स्थल से लगातार करनैलगंज व परसपुर के गांवों में फैल रहा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/परसपुर। 72 घंटों से खतरे के निशान से ऊपर चल रही घाघरा का पानी बड़ी तेजी से करनैलगंज और परसपुर के गांवों में फैल रहा है। करनैलगंज में बंधे के किनारे बसे तमाम गांव और उनके मजरे लबालब पानी में डूबे हुए हैं। जबकि बाढ़ के पानी ने परसपुर के बहुवनमदार माझा गांव के आधा दर्जन मजरों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। शुक्रवार को इसके 6 से ऊपर मजरे पानी में जलमग्न हो गए। आशंका है अगर अगले 24 घंटों में नदी के जलस्तर में गिरवाट नहीं आती है तो कई और गांव कल तक घाघरा से फैलने वाले पानी की जद में होंगे।
एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी लगातार खतरे के निशान 106.07 से ऊपर बह रही है। वहीं कल तक रह-रह कर बढने वाला सरयू नदी का जलस्तर शुक्रवार की दोपहर बाद स्थिर हो गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर नेपाल से कोई पानी इधर 24 से 48 घंटों के भीतर नहीं छोड़ा गया होगा, तो दोनों नदियों का जलस्तर घटकर खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। क्योंकि शुक्रवार को गुरुवार की अपेक्षा नदी में सिर्फ 1.87 लाख क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज हुआ। जबकि गुरुवार को इससे कहीं ज्यादा 2.25 लाख क्यूसेक पानी नदी में डिस्चार्ज हो रहा था। 72 घंटों से लगातार खतरे के निशान से ऊपर घाघरा का पानी तेजी से करनैलगंज के साथ ही परसपुर के मजरों को अपने आगोश में लेता जा रहा है। जिससे प्रभावित मजरों की संख्या रोज ही 10 से 20 मजरे बढ़ जा रही है। शुक्रवार को इसके पानी की जद में आने से बहुवनमदार माझा गांव के गोडिय़नपुरवा, बेनीसिंह के पुरवा, कंगडनपुरवा, तिवारीपुरवा, नउवनपुरवा भी पानी से जलमग्न हो गए। यहां की प्रधान अनुपमा यादव ने बताया कि नदी का पानी पूरब छोर के गांवों में तेजी से बढ़ रहा है। अगर पानी बढ़ने की यही गति रही तो शनिवार को गांव के एक दर्जन मजरे इससे प्रभावित हो जाएंगे। नदी के बढ़ते पानी से करनैलगंज इलाके में फैलने के चलते यहां के 80 से ऊपर मजरे प्रभावित हैं। जहां किसी मजरे में घुटने तक तो कहीं कमर तक पानी भरा है। पिछले 72 घंटों से नदी का जलस्तर न तो कम हो रहा है न ही बढ़ रहा है। इस वजह से इसके पानी का फैलाव पहले की तरह हो रहा है। करनैलगंज के कई गांवों को जाने वाली सडक़ों पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। इस वजह से लोगों को नाव के रास्ते ही आना-जाना पड़ रहा है। बाढग़्रस्त इलाकों के लोग लगातार पड़ रही गर्मी से बेहाल है, वहीं इससे संक्रामक रोगो के फैलने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
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घाघरा नदी पिछले 24 घंटे से कभी दो सेमी बढ़ जा रही है तो कभी घट जाती है। खतरे के निशान से ऊपर घाघरा का जलस्तर अगले कुछ घंटों में कम होने की उम्मीद है। क्योंकि शुक्रवार को नदी में 1.87 लाख क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज हुआ है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों को प्रशासन से हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है। शुक्रवार को भी बाढग़्रस्त इलाकों में 5 हजार से ऊपर लंच पैकेट बांटे गए।
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-त्रिलोकी सिंह, अपर जिलाधिकारी गोंडा
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दोनों मंत्रियों का टला दौरा
बाढ़ प्रभावित करनैलगंज इलाके का हवाई दौरा करने के बाद शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ राज्यमंत्री स्वाती सिंह को जिले आकर एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करना था। जिसके लिए सर्किट हाउस में सारे इंतजाम भी कर रखे गए थे। लेकिन ऐन मौके पर दोनों मंत्रियों का जिले में आने का कार्यक्रम रद्द हो गया। जिससे बाढ़ ग्रस्त इलाकों में पीड़ितों को मिलने वाली संभावित मदद की कोई जानकारी नहीं मिल पाई। न ही बाढ़ के मसले पर सरकार की क्या तैयारी है, इसका ही कोई पता चल पाया। बता दे कि इससे पहले भी राज्यमंत्री स्वाती सिंह का एक बार कार्यक्रम टल चुका है।